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पंचायत चूनाव परिणाम:सवाई विधायक दानिश अबरार पर दो पंचायत समितियों के साथ जिला परिषद में भी कांग्रेस का बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी

सवाई माधोपुर13 दिन पहले
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  • पंचायत चुनाव में नेताओं का रिपोर्ट कार्ड : कांग्रेस विधायकों में किसने खाई मात और कौन रहा अव्वल

जिले में इस समय कांग्रेस से निर्वाचित 3 विधायकों के साथ एक निर्दलीय भी कांग्रेस के ही साथ है। ऐसे में जिले की चारों विधानसभा में कांग्रेस के चार विधायक माने जाते हैं। इस बार जिला परिषद एवं पंचायत समितियों के चुनाव में अगर चारों के रण कौशल की बात की जाए तो इसमें सबसे शानदार प्रदर्शन सवाई माधोपुर विधायक दानिश अबरार का रहा। यहां तक कि तीनों विधायक उनकी रणनीति के आगे आसपास भी नहीं फटक पाए।तीन के पास दो-दो एवं एक के पास एक समिति की थी जिम्मेदारीजिले के चार विधायकों की बात की जाए तो खंडार विधायक अशोक बैरवा के पास दो पंस, सवाई माधोपुर विधायक दानिश अबरार के पास दो, बामनवास विधायक इंदिरा मीना के पास दो एवं गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीना के पास मात्र एक ही पंचायत समिति जिताकर लाने का जिम्मा था।

इसके अलावा दानिश अबरार ने अपनी दो पंचायत समितियों के साथ साथ जिला परिषद में भी कांग्रेस का बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर शेष तीन विधायकों को इस चिंता से मुक्त कर अपनी-अपनी पंचायत समितियों को संभालने के लिए आजाद कर रखा था।कौन कहां खा गया मात, किसने कर दिखाया चुनाव में कमालसवाई माधोपुर विधायक, दानिश अबरार: चार विधायकों में सबसे कम उम्र के दानिश अबरार ने इस बार अपने क्षेत्र की दोनों पंचायत समितियों सवाई माधोपुर एवं मलारना डूंगर में बिना किसी व्यवधान के अपने प्रधान बिठा दिए। इसके अलावा जिला परिषद में भी अपने करीबी की पत्नी को सदस्य बना कर जिला प्रमुख बनाने में कामयाबी प्राप्त की है।खंडार विधायक अशोक बैरवा का शानदार प्रदर्शनविधायक अशोक बैरवा ने इस बार पंचायत समितियों के सदस्यों के चुनाव में तो अपनी टीम के साथ शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन जब प्रधान की सीट पर काबिज होने की बारी आई तो वे अपने ही गढ़ में बहुमत के बावजूद मात खा गए और पुत्र मोह में खंडार पंचायत समिति को गंवाने के साथ ही भाजपा की झोली में डालने का काम कर बैठे, फिर भी वे एक पंचायत समिति को बचा कर अपनी साख को पूरी तरह धूमिल होने से बचाने में कामयाब रहे।

राजनीतिक अनुभव चारों विधायकों में सबसे कमविधायक इंदिरा मीना का राजनीतिक अनुभव जिले के चारों विधायकों में सबसे कम हैं। इस चुनाव में उनके पास बौंली एवं बामनवास पंचायत समितियों की जिम्मेदारी थी। इसके लिए उनके द्वारा तय की गई रणनीति को जनता ने पहले ही मोर्चे पर विफल कर दिया और दोनों ही जगह उनके सदस्यों की संख्या भाजपा से कम रह गई। नतीजा यह रहा कि वे विधायकों के रण कौशल के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गई हर प्रकार से खाली हाथ लेकर घर लौटी है। सबसे बुरी हालत गंगापुर सिटी विधायक मीना कीइस लड़ाई में सबसे बुरी हालत गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीना की रही है। उनके पास मात्र एक पंचायत समिति में प्रधान बनाने की जिम्मेदारी थी। विधायक रामकेश ने अपने चयन के आधार पर ही टिकटों का वितरण किया था, लेकिन वे परिणामों के बाद संख्या बल में ही पिछड़ गए। इसके बाद जब जोड़तोड़ की बारी आई तो वहां पर भी मात खा गए और इस रण में हर मोर्चे पर विफल होकर सबसे बुरे प्रदर्शन के साथ सबसे निचले पायदान पर रहे हैं।

भाजपा में किसने कहां दिखाया दमजिले में चारों विधानसभा में इस समय कांग्रेसी या कांग्रेस को समर्थन करने वाले विधायकों का कब्जा हैं। इनमें से तीन विधानसभाओं में हारे हुए भाजपा के विधायक एवं प्रत्याशी मैदान में डटे रहे, लेकिन सवाई माधोपुर विधानसभा क्षेत्र में न तो भाजपा का कोई दिग्गज चेहरा था और न ही दमदार हारा हुआ प्रत्याशी, इस कारण इस विधानसभा क्षेत्र को भाजपा ने अपनी ही कमजोरी के कारण रणनीतिक रूप से लगभग खाली छोड़ रखा था, जिसका खामियाजा भाजपा को चुकाना भी पड़ा हैं।मात खाकर भी महारथी बने गोठवालखंडार के पूर्व विधायक रहे जितेंद्र गोठवाल इस बार सदस्यों के परिणामों के बाद खंडार एवं चौथ का बरवाड़ा दोनों पंचायत समितियां गंवा बैठे थे, लेकिन जब प्रधान बिठाने की बारी आई तो उन्होंने जिले की सबसे हॉट सीट पर वह कर दिखाया, जिसकी कांग्रेस ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने अपनी रणनीति से न केवल कांग्रेस की जेब में रखी खंडार की सीट छीनी, बल्कि कांग्रेस में ही तोड़ फोड कर उनके ही सदस्य को भाजपा में शामिल कर अपना प्रधान बना लिया।

विधायक का सपना तोड़कर अपना प्रधान बैठाया मानसिंह नेगंगापुर सिटी के पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर ने भी इस बार शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने मौजूदा विधायक रामकेश को राजनैतिक रण में अपनी ताकत एवं रणनीति से रूबरू भी करवा दिया है। स्पष्ट बहुमत दोनों के पास नहीं था। निर्दलीयों को तोड़ने एवं अपने खेमे में लाने के खुले खेल में मानसिंह रामकेश पर भारी पड़े और साबित कर दिया कि वे विधायक का चुनाव हारे हैं, हिम्मत नहीं।भाजपा, बेटी दोनों की उम्मीदों पर खरे उतरे राजेंद्र मीनाबामनवास से विधायक के लिए भाजपा के प्रत्याशी रहे राजेंद्र मीना ने भी इस बार शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपने पिता की तरह ही खुद को बामनवास क्षेत्र में प्रमाणित किया है। राजेंद्र ने इस बार इस लड़ाई में प्रधान की सीट पर भाजपा को काबिज करवा दिया है। उन्होंने भाजपा के साथ साथ अपनी बेटी को इस सीट पर बिठा कर खुद की प्रमाणिकता को साबित किया है।

सबने मिलकर पूंजी पति के दम पर मारी बाजीबौंली पंचायत समिति में इस बार कोई भी बड़ा चेहरा भाजपा के पास नहीं था। वहां स्थानीय नेता रामवतार मीना एवं दूसरे कार्यकर्ताओं ने ही संगठन की ताकत दिखा कर चुनाव लड़ा था, लेकिन यहां पर भाजपा के पास सबसे बड़ी ताकत प्रधान बने कृष्ण पोषवाल के भाई थे। आर्थिक रूप से संपन्न इस प्रत्याशी के कारण भाजपा के लोगों को हौंसला पहले दिन से ही पूरी बुलंदी पर था। यही कारण था कि वहां विधायक कांग्रेस की होने पर भी सामने कोई दमदार चुनौती देने वाला नहीं होने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने विधायक को उसके ही गढ़ में मात दे दी।सवाई में भाजपा का कोई नहींभाजपा की सबसे बुरी हालत सवाई माधोपुर विधानसभा क्षेत्र में रही है। यहां न तो विधायक दानिश को आमने सामने चुनौती देने वाला कोई था और न ही कोई बड़ा रणनीतिकार। भाजपा की हारी हुई प्रत्याशी के पास इतना राजनैतिक अनुभव नहीं था कि वे आमने सामने आकर इस चुनाव की लड़ाई को रोचक बनाने के साथ बाजी पलट पाती। भाजपा के पास यहां कुछ बड़े चेहरे हो सकते थे, लेकिन भाजपा उनकी प्रतिष्ठा को दाव पर लगाकर उनको मैदान में लाई ही नहीं पाई। नतीजा यहां दोनों सीट गंवाने के साथ जिला परिषद से भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा हैं।

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