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सांसों पर संकट:जिला अस्पताल में 131 ऑक्सीजन बेड पर 90 सिलेंडर की सप्लाई, रोजाना 50 की कमी

सवाई माधोपुरएक महीने पहले
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सवाई माधोपुर| सामान्य चिकित्सालय के आईसीयू वार्ड में लगा वेंटिलेटर ऑक्सीजन के अभाव में अनुपयोगी। - Dainik Bhaskar
सवाई माधोपुर| सामान्य चिकित्सालय के आईसीयू वार्ड में लगा वेंटिलेटर ऑक्सीजन के अभाव में अनुपयोगी।
  • जिले में ऑक्सीजन के 264 बेड पर सिलेंडर की सप्लाई सिर्फ 200 सिलेंडरों से
  • बेड, सिलेंडर और रेगुलेटर की व्यवस्था में भटक रहे मरीजों के परिजन

चिकित्सा प्रशासन जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को पर्याप्त ऑक्सीजन आपूर्ति के भले ही लाख दावे करें, लेकिन हालात इसके उलट है। ऑक्सीजन के अभाव में वार्डों में मरीजों की उखड़ती सांसों के कारण वे तड़प रहे हैं। हालात यह है परिजन बेड से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर व रेगुलेटर की व्यवस्था करने में चक्करघिन्नी हो रहे हैं। मरीज को तड़पता देख परिजन चिकित्साकर्मी से लेकर अधिकारियों के सामने गुहार लगा रहे हैं। इधर-उधर से एप्रोच लगवाने के बाद सिलेंडर उपलब्ध करवा भी दिया तो रेगुलेटर के लिए हाथ खड़े कर दिए जाते हैं। परिजनों पर स्वयं के स्तर पर इंतजाम करने की जिम्मेदारी डाल दी जाती है।

बेड पर तड़पते मरीज के परिजन फिर परेशान। ऐसे में इस लेटलतीफी के कारण जब तक मरीज की सांसों को प्राण वायु मिलती है, तब तक कई मरीज दम तोड़ देते हैं।जिला अस्पताल के नेत्र वार्ड में भर्ती भैरू दरवाजा निवासी एक मरीज के परिजन ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उसके पिता की पिछले कुछ दिनों से तबियत खराब चल रही है। अस्पताल मे भर्ती के लिए पहले तो बेड नहीं मिला। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के सामने गुहार लगाने के बाद गत दिवस नेत्र वार्ड में बेड तो मिल गया, लेकिन दूसरे दिन दोपहर तक ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिला। दोपहर बाद स्थानीय विधायक दानिश अबरार से गुहार लगाने के बाद बडी मुश्किल से आईसीयू में शिफ्ट किया। लेकिन अब चिकित्साकर्मी रेगुलेटर नहीं होने की बात कह कर स्वयं के स्तर पर रेगुलेटर का इंतजाम करने की बात कह रहे हैं। मेडिकल पर भी पता कर लिया, लेकिन रेगुलेटर कहीं नहीं मिल रहा। ऐसे में अब क्या करू ? कुछ समझ नहीं आ रहा।

131 बेड की क्षमता, 50 सिलेंडर ऑक्सीजन कम हो रही सप्लाई

अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए 161 बेड है। इनमें से 131 बेड ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले मरीजों के लिए है। इन बेड पर ऑक्सीजन सप्लाई के लिए ऑटो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगा रखा है। इस प्लांट की क्षमता 24 घंटे में 30 से 35 सिलेंडर मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन करने की है। इसके अलावा अस्पताल में 50 से 60 सिलेंडर अगल से मंगवाकर वार्ड में मरीजों को ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है। कुल मिलाकर 131 बेड पर मरीजों की संख्या के अनुरूप 131 सिलेंडर की आवश्यकता है, लेकिन ऑक्सीजन सप्लाई केवल 80 से 90 सिलेंडर हो रही है। ऐसे में 40 से 50 सिलेंडरों की कमी के चलते 131 मरीजों में 90 सिलेंडर ऑक्सीजन से काम चला रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि मरीज पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं।

रोगी भर्ती के लिए जिले में दो सरकारी के अलावा दो निजी अस्पतालों में व्यवस्था

कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए जिले में दो सरकारी अस्पतालों के अलावा दो निजी अस्पतालों में व्यवस्था की गई है। चारों अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए कुल 376 बेड है। इनमें से 264 बेड ऑक्सीजन के है। इसके लिए विभाग की ओर से गुरुवार को 152 सिलेंडर काम में लिए गए। इसके अलावा यदि जिला अस्पताल व गंगापुर अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट की 30 सिलेंडर ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता के अनुसार 60 सिलेंडर को मिलाकर भी 212 सिलेंडर ही हो रहे हैं। ऐसे में 212 सिलेंडरों से 264 बेड पर एक साथ पर्याप्त मात्रा में कैसे ऑक्सीजन सप्लाई की जा सकती है, यह बात समझ से परे हैं। लेकिन संबंधित अधिकारी अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए मरीजों व परिजनों को पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई की झूठी दिलासा देते रहते हैं।

एक बड़ा सिलेंडर 7 से 8 घंटे चलता ऑक्सीजन शरीर के लिए एक दवा है। एक मरीज को 8 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से भी ऑक्सीजन दी जाए तो एक बड़ा सिलेंडर 7 से 8 घंटे चल जाता है।-डॉ. भरत लाल मथुरिया, सांस रोग विशेषज्ञ ऑक्सीजन सप्लाई के बारे में नोडल प्रभारी मधुसूदन बता पाएंगे। उन्हीं को ज्यादा जानकारी है।-डॉ. कैलाश सोनी, सीएमएचओ

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