VIDEO, विश्व की सबसे बड़ी झाड़ू:30 बांस की स्टिक, खजूर की पत्तियों से 15 दिन में बनाई 66 फीट लंबी झाड़ू, 145 किलो वजन, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज

सवाई माधोपुर3 महीने पहलेलेखक: नरेंद्र भारद्वाज
दुनिया का सबसे बड़ा झाडू।

सवाई माधोपुर के बामनवास उपखंड के टिगरीया गांव के टीचर अशोक कुमार बैरवा का नाम दुनिया की सबसे बड़ा झाड़ू बनाने पर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। फिलहाल वे राजकीय प्रवेशिका संस्कृत स्कूल बसेडी सिकराय दौसा में कार्यरत हैं। 66 फीट लंबी इस झाड़ू को बनाने में उन्हें करीब 15 दिन का समय लगा। अपने साथियों के साथ मिलकर उन्होंने 145 किलो वजनी झाड़ू बनाई है। इससे पहले भी वे अपना नाम क्लाम बुक ऑफ रिकार्ड, सहित कई अवार्ड और रिकॉर्ड में दर्ज करवा चुके हैं।

दुनिया का सबसे बड़े झाड़ू का सर्टिफिकेट
दुनिया का सबसे बड़े झाड़ू का सर्टिफिकेट

प्रधानमंंत्री मोदी से प्रेरित हो 15 दिन में बनाई दुनिया की सबसे बड़ी झाड़ू

अशोक बताते हैं कि झाड़ू बनाने का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन मुहिम को सफल बनाना था। उन्होंने अपने साथी विनोद कुमार, सुखदेव गोयल व पन्नालाल गोयल के साथ मिलकर लोगों को स्वच्छता मिशन के प्रति अधिक से अधिक जागरुकता लाने के लिए ऐसा किया। इसे बनाने में 30 से अधिक बॉस की स्टिक, रस्से, और अन्य सामान काम में लिए। इसका बुहरन वाला हिस्सा 12 फीट व ऊपर वाला हिस्सा 54 फीट का बनाया। झाड़ू की अधिकारिक नाप वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया की देख रेख में हुई। झाड़ू का वजन 145 किलो मापा गया। इसे बनाने में करीब 5 हजार रुपए का खर्चा आया है।

लिम्का बुक ऑफ सर्टिफिकेट
लिम्का बुक ऑफ सर्टिफिकेट

निवार से बांधकर स्टिक को मजबूत बनाया

अशोक बताते है कि उन्होंने इसे बनाने के लिए बांस को आपस में जोड़ा जिससे इसकी लम्बाई 54 फीट हुई। इन बांसों को आपस में जोड़कर ऊपर से पलंग की निवार से बांधकर चिपकाया गया। जिससे इसे मजबूती मिल सके। इसी के साथ इसका बुहारन वाला भाग खजूर की पत्तियों से बनाया गया।। इसकी लम्बाई 12 फीट है। उन्हें आपस में जोड़कर यह दुनिया का सबसे बड़ा झाड़ू बनाई है। इसकी कुल लम्बाई 66 फीट है।

कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए

कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर देश में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शिक्षक और मोटिवेशनल लेखक अशोक कुमार बैरवा ने कई अवार्ड और रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। गौरतलब है कि लेखन और शिक्षण कार्य से जुड़े शिक्षक बैरवा पूर्व में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड, हई रेंज वर्ल्ड रिकॉर्ड, एशिया बुक, वर्ल्ड रिकॉर्ड, बेस्ट टीचर आइकॉन, अटल बिहारी नेशनल अवार्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं।

पिछले महीने द डेकोइज ऑफ एशिया यूनिवर्सिटी चेन्नई से इन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि के लिए चुना गया था। वर्तमान में शिक्षा और करियर के चुनाव में युवा अपना सही निर्णय नहीं ले पाते हैं और तनाव, अवसाद में आकर आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठा लेते हैं। इसके लिए वह युवाओं को मार्गदर्शन और जीवन का अर्थ समझाने के लिए 'Don't Die Before your death' एक पुस्तक लिख रहे हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड ने अपनी वेबसाइट पर लिखा की अशोक कुमार पिछले कई सालों से गिनीज बुक के लिए अपना नाम दर्ज करवाने के लिए प्रयासरत थे। लम्बे अंतराल और बेहद कठोर परिश्रम के बाद अशोक अपना नाम दर्ज करा पाने में कामयाब हुए। 25 साल के अशोक कुमार बताते हैं कि मम्मी और पापा हमेशा चाहते थे कि बेटा कुछ बड़ा नाम करें। अशोक ने बताया कि जब तक कोई काम किया नहीं जाता तब तक वह असम्भव लगता है। अगर आपके साथ चमत्कार नहीं होता है तो आप खुद एक चमत्कार बन जाइए।

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