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ऐसे कैसे थमेगा कोरोना का कहर:कोरोना वार्ड के हाल बदहाल, जगह जगह पड़े हैं यूज किये ग्लव्स और मास्क, गंदगी के ढेर लगे; कोरोना मरीजों के साथ ठहरे उनके परिजन

सवाई माधोपुरएक महीने पहले
कोरोना वार्ड में मरीजों के साथ रुके परिजन।

जिला अस्पताल के हालात गंभीर बने हुए हैं। कोरोना वार्ड के हाल बदहाल है। कोरोना वार्ड में संक्रमितों के साथ देखभाल के लिए उनके परिजन अटेंडेंट के रूप में मौजूद हैं। जिससे इनके खुद के संक्रमित होने का खतरा तो है ही, इसी के साथ कोरोना संक्रमण फैलने के भी पूरे आसार बने हुए हैं।

कोरोना वार्ड के कचरा पात्रों में उपयोग में लिये गये मास्क व ग्लव्स से भरे पड़े हैं जो की कोरोना संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं। यहां सुरक्षा कर्मी तो तैनात हैं, लेकिन वार्ड में आने-जाने वालों पर से किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं है जिससे कोविड मरीजों के वार्ड में भी परिजनों की भारी भीड़ बनी रहती है। नये मरीज भर्ती के लिये भटकते रहते हैं जिन्हें बेडों की कमी के कारण बेड उपलब्ध नहीं हो पा रहे। इसी तरह कोरोना वार्ड में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं किया जा रहा है।

कोरोना वार्ड के बाहर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इन कचरे के ढेर में यूज किये गये ग्लव्स के साथ ही आरटीपीसीआर के सैम्पल की खाली शीशीयां पड़ी हुई हैं जिनसे संक्रमण का गहरा खतरा बना हुआ है। वार्ड में कार्यरत कार्मिकों का कहना है की यहां सफाई की व्यवस्था बदतर है। वार्ड में सफाई तीन चार दिन तक नहीं हो पाती है। रेमडिसिविर इंजेक्शन के लिए मरीजों व उनके परिजनों की डिमान्ड के बाद भी समय पर स्वीकृति नहीं मिल पा रही है और जिससे वितरण भी पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।

इसी तरह अस्पताल परिसर भी कचरे से अटा पड़ा हुआ है। यहां नालों में कीचड़ व कचरा भरा पड़ा होने से चारों और बदबू फैल रही थी। अस्पताल के सभी वार्डों में सूखे-गीले कचरों के अलग- अलग पात्र कचरे से अटे पड़े हैं। कचरा पात्रों के भरे होने के कारण कचरा बाहर भी पड़ा रहता है। सूत्रों की मानें तो सेनेटाइजर,मास्क,पीपीपी किट, रेमडेसिविर की राज्य सरकार से आपूर्ति 40-50 प्रतिशत ही हो पा रही है। जिससे व्यवस्था बदहाल है।

इनका कहना है

पिछले काफी समय से मैं अवकाश पर था। कल ही कार्यभार संभाला है, अगर सफाई नहीं हो पा रही है तो जल्दी ही सफाई करवाते हुए व्यवस्था को माकूल करवाया जाएगा - डॉ. तेजराम मीना सीएचएमओ