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बीमार व्यवस्था:नए रजिस्ट्रेशन भवन में 7 में से 4 काउंटर ही खुलने से रहती है लोगों की भीड़

सवाई माधोपुर20 दिन पहले
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सवाई माधोपुर। सामान्य चिकित्सालय में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगी कतार। - Dainik Bhaskar
सवाई माधोपुर। सामान्य चिकित्सालय में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगी कतार।
  • रजिस्ट्रेशन के नाम पर रोजाना 12 हजार रुपए का राजस्व
  • फिर भी पर्ची के लिए कतार में मरीज व परिजन

जिला मुख्यालय पर सबसे बड़े अस्पताल में आने वाले मरीजों से रजिस्ट्रेशन की एवज में विभाग को रोजाना करीब 8 से 12 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। इतना राजस्व देने के बावजूद यहां आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को पर्ची लेने के लिए कतार में खड़े रहकर इंतजार करना पड़ रहा है।

खास बात यह है कि रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगने वाली भीड़ को कम करने व रजिस्ट्रेशन काउंटरों का विस्तार करने के लिए अस्पताल परिसर में ही लाखों की लागत से नया भवन बनवाया गया है। इन भवन में रजिस्ट्रेशन का कार्य शुरू भी हो गया है, लेकिन अभी तक 7 में से केवल 4 ही काउंटरों पर रजिस्ट्रेशन का कार्य किया जा रहा है। इस कारण अस्पताल आने वाले मरीज एवं परिजनों को रजिस्ट्रेशन के लिए वर्षों बाद भी कतार से अभी तक मुक्ति नहीं मिल पाई है।

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व में यहां रजिस्ट्रेशन के लिए एक छोटे से कमरे में तीन ही काउंटर संचालित हो रहे थे। इनमें एक काउंटर पर बीपीएल व सीनियर सिटीजन व अन्य दो काउंटरों पर सामान्य मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जाता था। इस कारण यहां हमेशा समय सुबह से दोपहर तक मरीज व परिजनों की लंबी कतारें लगी रहती थी। इससे मरीज व परिजनों को घंटों तक कतार में खड़े रहकर इंतजार करने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस परेशानी को देखते हुए कई संगठनों ने अस्पताल में रजिस्ट्रेशन काउंटर बढाने की मांग की थी। मरीजों व परिजनों की इस परेशानी को देखते हुए छोटे पार्किंग स्टैंड की खाली जगह पर नए रजिस्ट्रेशन भवन का निर्माण करवाया गया है। नए भवन में मरीजों के रजिस्ट्रेशन के लिए 9 काउंटर बनाए गए हैं। यहां प्रत्येक काउंटर के सामने रेलिंग भी लगाई गई है।

800 से 1000 मरीज आते हैं रोजाना

अस्पताल में रोजाना करीब 800 से 1000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से कुछ मरीज भर्ती होते हैं तो कुछ आउटडोर पेशेंट होते हैं। आउटडोर पेशेंट से रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में प्रत्येक से 10 रुपए तथा प्रत्येक आईपीडी पेशेंट से 40 रुपए का शुल्क लिया जाता है। इस हिसाब से मरीजों के रजिस्ट्रेशन से अस्पताल प्रशासन को रोजाना करीब 8 से 12 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। गर्मी के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ने से यह आंकड़ा 15 हजार से अधिक तक पहुंच जाता है। खास बात यह है कि सवाई माधोपुर जिले के साथ ही यहां मध्यप्रदेश के श्योपुर, बूंदी व टोंक जिले के गांवों से भी काफी संख्या में मरीज आते हैं।

7 काउंटरों का काम 4 काउंटरों पर ही

अस्पताल में आने वाले बीपीएल, सीनियर सीटीजन, पेंशनर, विकलांग, मेल, फीमेल व इनडोर पेशेंट के रजिस्ट्रेशन के लिए श्रेणी वार अलग-अगल रजिस्ट्रेशन काउंटर होने चाहिए। इसी हिसाब से नए भवन में 7 काउंटर बनाए भी गए है, लेकिन इन 7 काउंटरों में से 4 काउंटरों पर ही अभी रजिस्ट्रेशन का कार्य किया जा रहा है। 3 काउंटर खाली पड़े होने से बीपीएल, सीनियर सीटीजन, पेंशनर व विकलांग श्रेणी मरीजों का रजिस्ट्रेशन एक ही काउंटर पर किया जा रहा है।

वहीं दो काउंटर मेल व फीमेल तथा एक काउंटर पर इनडोर पेशेंट का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। इस कारण चारों काउंटरों पर भीड़ लगी रहती है। इसके चलते काफी देर तक नंबर नहीं आने व कतार में खड़े रहने से मरीज व परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रोगी को दिखाने व दवा लेने तक कतार

सामान्य चिकित्सालय में साधारण बीमारी के परामर्श के लिए भी मरीज व परिजनों को लंबा संघर्ष करना पड़ता है। अस्पताल जाने का मतलब है कि 3 से 4 घंटे का समय खराब होना। आलनपुर निवासी हरिप्रसाद योगी ने बताया कि सुबह अस्पताल में जाने पर सबसे पहले रजिस्ट्रेशन के लिए कतार में लगना पड़ता है। यहां काफी देर तक इंतजार करने के बाद बडी मुश्किल से पर्ची मिलती है। इसके बाद फिर दवा काउंटर पर लंबी कतार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते रहो। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज व परिजनों का करीब 3 से 4 घंटे का समय खराब हो जाता है। कई मरीज अस्पताल में चिकित्सकों को दिखाने के बजाए निजी मेडिकल से दवा लेकर ही काम चलाना ज्यादा उचित समझते हैं।

नए काउंटर के लिए अनुमति लेनी होगी

नए रजिस्ट्रेशन भवन में 4 काउंटर संचालित है। इसमें दो काउंटर लैब वाले भी संचालित करेंगे, जिन पर केवल लैब वाले मरीजों का ही रजिस्ट्रेशन होगा। दो काउंटर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में संचालित हैं। नए काउंटर खोलने के लिए विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। पहले की अपेक्षा अब कतार में कमी आई है। अस्पताल आने वाले मरीज परिजनों को रजिस्ट्रेशन के लिए कम से कम परेशानी हो, इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। -डॉ. बी.एल. मीना, पीएमओ, सामान्य चिकित्सालय

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