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बाघों के गढ़ में खूबसूरत झरने, VIDEO:घने जंगलों के बीच राजस्थान की एकमात्र ऐसी जगह जहां एक साथ बहते हैं 20 झरने, इन पर इंसान नहीं, यहां के टाइगर का राज

सवाई माधोपुरएक वर्ष पहलेलेखक: नरेंद्र भारद्वाज
सवाई माधोपुर।

राजस्थान का सवाई माधोपुर जिला नेशनल पार्क रणथंभौर के बाघों के लिए काफी प्रसिद्ध है, लेकिन जंगल में बहने वाले झरनों की खूबसूरती भी कम नहीं है। बारिश में झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। राजस्थान का एक मात्र नेशनल पार्क होगा जहां पर एक साथ 20 झरने पूरे जंगल में बहते हैं। यहां के कुछ झरनों पर बाघों का राज है। वहीं झरनों के नाम यहां के मंदिर से पड़े हैं।

रणथंभौर नेशनल पार्क 1334 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। पूरे नेशनल पार्क में करीब 72 टाइगर फैमिली का राज है। घने जंगलों में करीब 20 झरने हैं। अमरेश्वर महादेव, सोलेश्वर महादेव, झोझेश्वर महादेव, केल कुंड, सीता माता, सलावटी घाटी झरना, माता खोहरा, मोर कुंड, खटोला, भंवर खो, डेढ़ पत्या की बावड़ी, तारागढ़ किले का झरना, मिश्र दर्रा, कुशालीदर्रा के नाम के झरने हैं। कई झरने ऐसे हैं जो बाघों की टेरिटरी जोन में आते हैं। सोलेश्वर, सलावटी झरना यहां के बाघों की टेरिटरी है। जबकि अमरेश्वर झरने के पास भी इनका मूवमेंट देखा जाता है।

इन तीन झरनों पर यहां के टाइगर का राज

झोझेश्वर महादेव झरना।
झोझेश्वर महादेव झरना।

झोझेश्ववर झरना: यहां का सबसे खूबसूरत झरना माना जाता है, लेकिन यह टाइगर की टेरिटरी है। जोन नंबर 10 में आती है।

सोलेश्वर महादेव झरना।
सोलेश्वर महादेव झरना।

सोलेश्वर झरना: बारिश के दिनों में इस झरने से करीब 50 फीट की ऊंचाई से पानी गिरता है। यह झरना जोन नंबर 2 में आता है। जहां टाइगर की टेरेटरी है।

सलावटी घाटी झरना: यह जंगल के सबसे विरान क्षेत्र में से एक है। यह टाइगर की टेरिटरी है। जोन नंबर 6 में आती है।

जिले में यह भी है पर्यटन के बेहतर स्थल

भगवान शिव के 12 वें ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध हैं घुश्मेश्वर महादेव
राजस्थान में भगवान शिव के अनेक प्राचीन मंदिर हैं। इन प्राचीन एवं सिद्ध मंदिरों में सवाईमाधोपुर के शिवाड़ का नाम भी शामिल है। यहां स्थित घुश्मेश्वर महादेव मन्दिर भगवान शिव के 12 वें ज्योतिर्लिंग के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। यहां बारिश के मौसम में हरियाली बड़ी ही मनमोहक दिखाई देती हैं।

चौथ माता मन्दिर चौथ का बरवाड़ा।
चौथ माता मन्दिर चौथ का बरवाड़ा।

चौथ माता मंदिर : चौथ माता मंदिर सवाई माधोपुर के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर सवाई माधोपुर शहर से 35 किमी दूर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इसकी पहाड़ी की ऊंचाई 897 मीटर है, जो राजस्थान 9 वीं सबसे ऊंची पहाड़ी है।

बारिश में हरियाली से परिपूर्ण रणथम्भौर दुर्ग।
बारिश में हरियाली से परिपूर्ण रणथम्भौर दुर्ग।

रणथम्भौर किला : ऐतिहासिक जानकारियां समेटे रणथम्भौर दुर्ग राजस्थान के शानदार दुर्ग और पर्यटक स्थलों में शुमार हैं। इतिहासकार अबुल फजल ने रणथम्भौर दुर्ग के लिए कहा था कि अन्य सब किले नंगे हैं , जबकि यह बख्तरबंद है। इस दुर्ग के बारे में यह इसलिए कहा गया कि इसके एक तरफ खाई, एक तरफ जंगल और पहाड़ी है। इस किले में त्रिनेत्र गणेश मन्दिर, हम्मीर कचहरी, 32 खम्भों की छतरी, पद्मला तालाब, जैन मन्दिर, दरगाह सहित बहुत से दर्शनीय स्थल हैं।

काला गोरा भैरव मन्दिर सवाई माधोपुर।
काला गोरा भैरव मन्दिर सवाई माधोपुर।

काला गोरा भैरव: सवाई माधोपुर शहर के कोतवाल के रुप में मुख्य दरवाजे पर काला गौरा भैरव का मन्दिर स्थित है। यह मन्दिर भैरव की तांत्रिक पीठ के रूप में पूरे भारत विख्यात है। यह स्थान नाथ योगियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है।

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