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दहशत:ईटावदा गांव में बाघ का डेरा, वन विभाग पहचान में जुटा, छह ट्रैप कैमरे लगाए

सवाई माधोपुर10 दिन पहले
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  • किसान के सामने गाय का शिकार, बाघ या तो टी-65 है या फिर टी-3

रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य के बाघों का आबादी में विचरण का सिलसिला रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है। क्षेत्र के बाणपुर, काछड़ा के बाद अब ईटावदा गांव में बाघ ने डेरा डाल दिया है। यहां शुक्रवार को अभयारण्य के बाघ ने एक गाय का शिकार किया है। दूसरी ओर बाघ के आबादी क्षेत्र में शिकार की घटना के बाद से वन विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। समाचार लिखे जाने तक मौके पर क्षेत्रीय वनाधिकारी मोहनलाल गर्ग के नेतृत्व में वन विभाग की विभिन्न टीमें बाघ की निगरानी कर रही थी तथा मौके पर फोटो ट्रेप कैमरे लगाने की प्रक्रिया जारी थी। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे ईटावदा गांव निवासी हनुमान माली की गाय खेत पर जा रही थी। इसी दौरान गांव के राजकीय स्कूल के नजदीक भैरूजी के पास आम रास्ते में अचानक से रणथंभौर अभयारण्य का बाघ आ धमका और गाय पर हमला कर दिया। गाय जमीन पर गिरने के बाद बाघ गाय को घसीटते हुए रास्ते से करीब 30 फुट दूर गिलाईसागर वाले रास्ते में ले गया। इस पूरी घटना को किसान नागाराम गुर्जर ने अपनी आंखों से देखा था क्योंकि उस समय वह भी अपनी भैसें चराने के लिए खेत पर जा रहा था। घटना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। वहीं बाघ ग्रामीणों के शोरगुल से शिकार को छोड़कर मौके पर इधर उधर झाड़ियों में औझल हो गया। बाद में सूचना पर खंडार रेंज के फोरेस्टर हनुमान मीणा, फोरेस्ट गार्ड राजेंद्र, निरंजन शर्मा, जगदीश जाट सहित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तथा बाघ के पगमार्क जुटाने का प्रयास किया। इस दौरान शिकार के आसपास वन विभाग की टीम को बाघ के पगमार्क भी नजर आए। इसके बाद टीम ने मौके पर मौजूद गाय के मालिक व ग्रामीणों से घटना के संबंध में पूरी जानकारी ली तथा उन्हें सुरक्षा की दृष्टी से शिकार से दूरी बनाने का आग्रह किया गया।

अब तक इन आबादी इलाकों में बाघ का विचरण
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के बाणपुर, काछड़ा, ईटावदा, अनियाला, खिदरपुर जादौन, विस्थापित पादड़ा, रांवरा, खंडार, गोठबिहारी, कुशलपुर, सांवटा, परसीपुरा, मेई कलां, गोपालपुरा, फरीया सहित अन्य क्षेत्रों में अभयारण्य के विभिन्न बाघ कई दिनों तक आबादी व इसके निकटवर्ती वन क्षेत्र में विचरण कर चुके है। वहीं कई स्थानों पर बाघों द्वारा मवेशियों के शिकार व मानवीय हमले भी हो चुके है। हालांकि वन विभाग द्वारा बाघों के अभयारण्य से बाहर आने पर पूरी सुरक्षा के साथ सतर्कता बरती जाती रही है।

गिलाई सागर का क्षेत्र बाघ टी-65 का
मौजूद वन विभाग की टीम ने बताया कि घटनास्थल गिलाईसागर वन क्षेत्र से लगा हुआ है। गिलाईसागर वन क्षेत्र में बाघ टी 65 उसकी साथी बाघिन टी 69 व इनके दो शावकों के साथ विचरण करता है। ऐसे में शिकारी बाघ संभावित बाघ टी 65 हो सकता है। हालांकि वन विभाग द्वारा घटनास्थल व इसके आसपास के क्षेत्र में करीब आधा दर्जन स्थानों पर कैमरे लगाए गए है। कैमरे में फोटो ट्रेप होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि शिकारी बाघ कौनसा है।
फोटो मिलने के बाद ही होगी पहचान
मोहनलाल गर्ग क्षेत्रीय वनाधिकारी खंडार का कहना है कि ईटावदा में बाघ द्वारा गाय का शिकार किया गया है। मौके पर निगरानी के लिए वन विभाग की टीम तैनात कर दी गई है तथा घटनास्थल पर आधा दर्जन स्थानाें पर कैमरे लगाए गए है। शिकारी बाघ टी 65 या फिर बाघ टी 3 भी हो सकता है। क्योंकि बाघ टी 3 ने भी अभयारण्य में थूंमका ईलाका क्रोस किया है। घटनास्थल के आस पास लगे कैमरो में बाघ का फोटो आने के बाद ही शिकारी बाघ का पता चल पाएगा।

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