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पुलिस के सामने बजरी परिवहन:SP ने 5 थाना क्षेत्र के मार्गों पर लगाए थे 26 नाके, लेकिन फिर भी जारी बजरी से भरे वाहनों की आवाजाही, देखें VIDEO

सवाई माधोपुर9 दिन पहले
जस्टाना नाके से होता अवैध बजरी परिवहन।

जिले के बनास नदी से बजरी खनन व सड़कों पर अवैध परिवहन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अवैध बजरी परिवहन को रोकने के लिए एसपी राजेश सिंह द्वारा जिले के 5 थानों पर 26 नाके बनाए गए थे। फिलहाल जहां 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, लेकिन इन नाकों और पुलिस की आंखो के सामने से अवैध बजरी का परिवहन हो रहा है और पुलिस मूकदर्शी बनी हुई है।

जिले में बौंली और चौथ का बरवाड़ा थाने के अंतर्गत 7-7 नाके, मलारना डूंगर थाने में 6 नाके, खंडार में 5 नाके, बहरावंडा कलां में 1 नाका बनाया गया है, लेकिन इन सब के बावजूद पुलिस द्वारा ही इन नाकों का बंटाधार किया जा रहा है। जहां जिले के सीमा के जस्टाना नाके पर पुलिसकर्मी की मौजूदगी में ही बजरी वाहनों को निकालने का वीडियो सामने आया है ।

वीडियो में पुलिसकर्मी ने हाथ से इशारा किया, झट से निकल गया बजरी वाहन

जिले में बजरी परिवहन को रोकने के लिए बनाए गए बौलीं थाना क्षेत्र के जस्टाना नाके का एक वीडियो सामने आया है। यह वीडियो मंगलवार शाम सात बजे का बताया जा रहा है। वीडियो में बनास नदी से बजरी भरकर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली तेज गति से आ रही है। नाके पर बाकायदा बैरिकेड आदि लगाए हैं और पुलिसकर्मी भी वहीं खड़ा नजर आ रहा है। पुलिसकर्मी को देखते ही बजरी वाहन के चालक ने इशारा किया और झट से निकल गया।

लाचार पुलिस

जिले में अवैध बजरी माफियाओं के सामने पुलिस लाचार दिखाई पड़ती है। पुलिस की तरफ से माफियाओं ​के खिलाफ ​​​​​​कोई बड़ी कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया गया है। पुलिस द्वारा कभी-कभी एक दो अवैध बजरी परिवहन के वाहनों को जब्त कर कागजी कार्रवाई पूरी कर ली जाती है। जिले में पुलिस बजरी माफियाओं के आगे इस तरह लाचार है कि वह कार्रवाई के नाम पर कच्चे रास्तों को काटने की कार्रवाई करती रहती है। जबकि माफिया पुलिस के लौटने के चंद घंटों बाद ही उन रास्तों को फिर से पाट देते हैं।

2017 से प्रदेश में बजरी खनन पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने लीजधारकों को दिसंबर 2013 में पर्यावरण अनुमति लेने तक नियमों के दायरे में रहकर बजरी खनन की अनुमति दी थी। कुछ लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट में सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में बजरी खनन को बिना पर्यावरण अनुमति लिए बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नवंबर 2017 से प्रदेश में बजरी खनन पर रोक लगा रखी है ।

2013 से लेकर 2017 तक प्राप्त राजस्व

एलओआई से पूर्व प्राप्त राजस्व117 करोड़
अस्थाई अनुमति से प्राप्त राजस्व106 करोड़
समानुपातिक राशि207 करोड़
डैड रेंट व पेनल्टी88 करोड़
रॉयल्टी, परमिट फीस622 करोड़
कुल1140 करोड़

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