ये हौसलों की उड़ान हैं:संघर्ष के बीच विकलांग युवक ने लिखी सफलता की कहानी, पहले प्रयास में ही नीट परीक्षा पास

भाबरु2 वर्ष पहले
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  • 17 साल पहले सड़क दुर्घटना में पिता की मौत, एक साल बाद मां भी छोड़ गई थी

शारीरिक रूप से विकलांग जन्मे बच्चे के भविष्य को लेकर परिजन चिंतित थे। 17 साल पहले सड़क दुर्घटना में पिता की मौत हो गई, जिससे परिजनों पर बच्चों के लालन-पालन की चिंता के साथ दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दुखों की कहानी यहां भी नहीं थमी और पिता की मौत के एक साल बाद मां पुनर्विवाह करके दूसरे के साथ चली गई।

बाल्यावस्था ने ही दुःख सहन करने के साथ, बच्चों के लालन पालन व भविष्य की उम्मीदों पर भी वज्रपात टूट पड़ा था, लेकिन मजबूत हौसले व अटल इरादों के बीच बड़े लड़के ने अपनी मेहनत जारी रखी। नियति के प्रहार को सहन करते हुए जिंदगी में कुछ कर गुजरने के जज्बे के साथ संघर्ष जारी रखा और आखिरकार कठिनाइयों के रास्तों से निकलकर उसने कामयाबी की इबारत लिख दी। यह कहानी है कस्बे के प्रवीण चौहान की, जिसने पिता को खोने व मां के चले जाने के बाद भी अपनी संघर्ष की डायरी में हौसलों की लिखावट जारी रखी और पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा उत्तीर्ण करते हुए सफलता प्राप्त की।

युवक की सफलता के पीछे दादी व ताऊ-ताई का भरपूर सहयोग रहा। प्रवीण के पिता लालचंद वर्मा की 2003 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उस समय प्रवीण की आयु मात्र 3 वर्ष थी। परिजन दोनों बच्चे प्रवीण व प्रदीप की परवरिश में जुट गए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता की मौत के एक साल बाद मां ने पुनर्विवाह कर लिया। अल्पायु में ही दोनों बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। नियति की मंजूरी समझकर दादी सुरजी देवी, ताऊ श्रीराम चौहान व ताई तारा देवी ने दोनों बच्चों की परवरिश की। कभी माता-पिता की कमी का अहसास नहीं होने दिया।

प्रवीण ने जिंदगी में कुछ कर गुजरने की तमन्ना के साथ अपना संघर्ष जारी रखा। पावटा के सरकारी स्कूल में अध्ययन करते हुए उसने 12वीं कक्षा में 86 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसके बाद नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर सीकर अध्ययन करने लगा। हाल ही जारी नीट परीक्षा परिणाम में प्रवीण ने फिजिकल हैंडीकैप में ऑल इंडिया में 484वीं रैंक प्राप्त की। प्रवीण अब जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है।

सरकारी स्कूल में ही की पढ़ाई
प्रवीण ने कस्बे के राउमावि में अध्ययन करते हुए कक्षा 10वीं में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। वह डॉक्टर बनना चाहता था, लेकिन कस्बे में विज्ञान संकाय नहीं होने से एक बार फिर उसे संघर्ष का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। अपने सपनों को पूरा करने के लिए पावटा के सरकारी स्कूल में प्रवेश लिया।
ताऊ व दादी ने मजदूरी कर पढ़ाया : प्रवीण को उसके ताऊ व दादी ने मजदूरी करके पढ़ाया। आर्थिक संकट से गुजरने के बाद भी प्रवीण को पढ़ने के लिए सीकर भेजा। प्रवीण ने अपनी सफलता का श्रेय गुरुजनों व परिजनों को दिया।

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