लड़खड़ाकर गिरते ही मुंह में झाग और फिर मौत:रहस्यमयी बीमारी से 80 से अधिक बकरियों ने तोड़ा दम, पशुपालक परेशान

शाहपुरा3 दिन पहले
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बागावास चौरासी कस्बे में इन दिनों रहस्यमयी बीमारी से बकरियां काल का ग्रास बन रही है। पिछले एक सप्ताह में 80 से अधिक बकरियों ने दम तोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार बागावास चौरासी कस्बा सहित, जवानपुरा, चतरपुरा, जोगीपुरा आदि इलाकों में इन दिनों रहस्यमयी बीमारी से बकरियों की पलक झपकते ही मौत हो रही है। इन क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह में 80 से अधिक बकरियों ने दम तोड़ दिया है। जिससे पशुपालक चितिंत है। जिससे पशुपालकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। पशुपालकों ने बताया कि विभाग की और से अभी तक टीकाकरण भी शुरु नहीं किया गया है।

पलक झपकते ही तोड़ देती है दम
रहस्यमयी बीमारी को पशुपालक भी नहीं समझ पा रहे है। पशुपालकों ने बताया कि पहले तो बकरियों के दस्त शुरु होते है। कुछ देर बाद लड़खड़ाकर गिरते ही मुंह में झाग आकर दम तोड़ देती है।

केस 1 : बागावास चौरासी निवासी गबदुराम मीणा ने बताया कि शुक्रवार सायं 5 बजे बकरी को दुध निकालकर लाए थे। एक घंटे बाद वापस जाकर देखा तो बकरी मरी हुई मिली। बताया कि बीमारी से अब तक उनकी 4 बकरियां मर चुकी है।

केस 2 : काली पहाड़ी निवासी हजारीलाल मीणा ने बताया कि एक सप्ताह पहले एक बकरी को अचानक दस्त हुए थे। लड़खड़ाकर गिरने के बाद ही उसने दम तोड़ दिया। अब तक उसकी 6 बकरियां मर चुकी है।

इन लोगों की बकरियों ने तोड़ा दम
रहस्यमयी बीमारी से अब तक बागावास चौरासी निवासी छंगाराम मीणा की तीन, नाथूराम मीणा की पांच, महेन्द्र धानका की दो, हरफूल कुम्हार की दो, महेन्द्र मीणा की दो, देशराज मीणा की तीन, ख्यालीराम मीणा की पांच, कैलाश की दो, सुगाराम की दो, सुरेश मीणा की दो, रामकिशन की एक सहित अब तक 25 पशुपालकों की 80 बकरियों ने दम तोड़ दिया है।

रेसवाड़ी फैलने का सता रहा है डर
क्षेत्र में 70 प्रतिशत लोगों की आजिविका पशुपालक है। यहां बड़ी संख्या में बकरी पालन का कार्य किया जाता है। बकरियों की लगातार हो रही मौतों के कारण पशुपालकों में भय का माहौल है। पशुपालकों कों चिंता सता रही है कि बकरियो में अगर रेसवाड़ी आ गई तो आजिविका पर संकट मंडरा जाएगा।

15 लाख से अधिक का नुकसान
बकरियों की मौत होने से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। एक बकरी की औसत कीमत करीब 20 हजार रुपए है। अब तक करीब 15 लाख रुपए कीमत की बकरियों ने दम तोड़ दिया है। इधर बकरियों की मौत होने पर पशुपालक झोलाछापों से उपचार करवा रहे है, जिससे झोलाछाप जमकर चांदी कूट रहे है।

बीमारी जानने के किए जाएंगे प्रयास
कार्मिकों द्वारा मुझे आज ही मामले की जानकारी मिली है। टीम भिजवाकर मामले की जांच करवाई जाएगी। अगर मौतों का ग्राम बढ़ता है तो सैंपल आगे भेजकर बीमारी का पता लगाया जाएगा। बकरी के बीमार होते ही पशुपालक विभाग को मामले की जानकारी दें, ताकि बीमारी के कारणों को पता लगाकर उपचार किया जा सके।
-बनवारीलाल यादव, पशु चिकित्सक, विराटनगर

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