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खेती-किसानी:गर्मी के मौसम में गहरी जुताई से खेत कीटों से हो जाता है सुरक्षित

सूरवाल16 दिन पहले
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  • कृषि विभाग के विशेषज्ञ अधिकारियों ने करमोदा, दोंदरी, सूरवाल कई गांवों में गर्मी में गहरी जुताई का बताया महत्व

रबी फसलों गेहूं, चना व सरसों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। इस समय किसानों के खेत खाली पड़े हैं। ऐसे में कृषि विभाग विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी जा रही है कि उनको गर्मी के मौसम में अपने खेतों गहरी जुताई कर लेवें, जिससे उनकी आगामी फसलों में कई प्रकार के लाभ मिल सकेंगे। सूरवाल, करमोदा, दोंदरी सहित दर्जनों गांवों में कृषि विभाग के अधिकारियों ने पहुंचकर वहां पर किसानों को बताया गर्मी में खेत की गहरी जुताई से अनेक फायदे है बशर्ते कि ये तय समय पर हों। करमोदा के कृषि पर्यवेक्षक विजय जैन ने बताया कि 10 अप्रैल से 10 मई तक कम से कम 9 इंच गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से की जानी चाहिए। गर्मी की जुताई से रबी फसलों पर लगे हुए हानिकारक कीटों के अंडे या लार्वा, जो दरारों में छिपे होते हैं, मई-जून की तेज धूप से नष्ट हो जाते हैं।

इससे खेत कीट-पतंगों से सुरक्षित हो जाता है एवं अगली फसल में कीटों के प्रकोप की संभावना कम हो जाती है। साथ ही साथ खरपतवार के बीज अधिक गहराई में पहुंच नहीं पाते हैं। रबी या खरीफ फसलों में प्रयोग किए गए कीट और खरपतवार नाशकों का असर जमीन में गहराई तक हो जाता है। गर्मी में जुताई कर देने से खेत में उनका प्रभाव खत्म हो जाता है। तीव्र ऊर्जा और प्रकाश से उक्त जहरीले रसायन विघटित हो जाते हैं एवं उनका खेत में असर नहीं रह जाता है। इसी तरह प्रयुक्त किए गए रासायनिक उर्वरकों का अंश अघुलनशील अवस्था में खेत में अवशेष के रूप में पड़ा रह जाता है। ये धीरे-धीरे खेत को बंजर बनाता जाता है। गर्मी की जुताई से सूर्य की तेज धूप से यह रसायन विघटित होकर घुलनशील उर्वरकों में परिवर्तित हो जाते हैं, जो अगली फसल को पोषण देते हैं।

बार-बार जुताई एवं सिंचाई करने से मिट्टी के कणों के बीच का खाली स्थान कम हो जाता है। खेत की मिट्टी सख्त और कठोर हो जाती है। इससे मृदा में वायु का संचार अवरुद्ध हो जाता है, जिससे उसकी उर्वरता कम हो जाती है। गर्मी की जुताई से मिट्टी की नमी खत्म होने लगती है और कणों के बीच का खाली स्थान बढ़ जाता है, अर्थात जमीन पोली हो जाती है। इससे उसमें वायु का संचार होने लगता है, जो फसल के स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है। गर्मी की जुताई से खेत की नमी काफी गहराई तक सूख जाती है। मिट्टी के सुराख खुल जाने से वर्षा जल बहुतात से जमीन में सोख लिया जाता है। इससे मिट्टी में जल धारण क्षमता बढ़ जाती है। नमी पर्याप्त मात्रा में खेत में संचित रहती है। यह नमी खरीफ के फसल उत्पादन में काम आती है। गर्मी के समय में खेत की जुताई से वर्षा का जल ज्यादा से ज्यादा खेत में अवशोषित होगा। भूमि का कटाव रोकने में भी मदद मिलेगी। हल्की और रेतीली भूमि में ज्यादा जुताई न करें। क्योंकि इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और हवा तथा बरसात से मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है।

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