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राजस्व नक्शे जर्जर:68 साल पुराने राजस्व नक्शे फट गए, 20 साल में सेटलमेंट करना होता है, हुआ नहीं

टोंकएक महीने पहले
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मालपुरा। तहसीलदार कार्यालय में क्षेत्रों की जर्जर नक्शा शीटें। - Dainik Bhaskar
मालपुरा। तहसीलदार कार्यालय में क्षेत्रों की जर्जर नक्शा शीटें।
  • 50 साल से इंतजार, किसानों को सीमाज्ञान, बंटवारे सहित अन्य राजस्व मामलों के निस्तारण में परेशानी

मालपुरा राजस्व क्षेत्र का सेटलमेंट कर वर्ष 1952-53 में कपडे पर बनाए गए खेतों, सरकारी जमीनों, नदी नाले तालाब व चरागाहों सहित अन्य राजस्व संपत्तियों रिकार्डेड नक्शे अब जीर्ण क्षीण जर्जर, लीर-लीर हो जाने से किसानों के सीमाज्ञान, तरमीम, बंटवारे सहित विचाराधीन विवादित मामलों सहित तहसील कार्यालय के प्रकरणों का निस्तारण समस्या बना हुआ है।आलम यह है कि बीते बीस सालों से जो भी अधिकारी आए वे जैसे तैसे काम चलाने की बात कहते रहे लेकिन किसानों आमजन को स्थिति गंभीरता से आज तक निजात नहीं मिली।

खास बात यह है कि अधिकारियों की जानकारी में राजस्व नक्शे जर्जर होना अत्यंत गंभीर समस्या के बावजूद नए नक्शे बनाने या नया सेटलमेंट करने की कार्रवाई नहीं की गई। जबकि बीस साल में दुबारा सेटलमेंट करने का नियम बताया गया है।दस साल से तहसील में नहीं मिलती नक्शे की नकलेंजर्जर व लीर लीर हुए राजस्व नक्शा शीटों के कारण बीते आठ दस साल से किसानों को मालपुरा तहसील कार्यालय से अपने खेत की नकलें नहीं मिल रही है।

170 गांवों के राजस्व नक्शे फटने से दिक्कत हो रही तहसील कार्यालय के ऑफिस कानूनगो नाथूलाल खंगार व अतिरिक्त ऑफिस कानूनगो अमित कुमार जैन ने बताया कि 170 राजस्व गांवों के फटे नक्शा सीटों में से करीब 45 गांवों की सीटें तैयार होकर मालपुरा कार्यालय में आई है उनमें अभी तक तरमीम करने का काम चल रहा है शेष 125 गांवों के नक्शा सीट अभी तक नहीं है। इस संबंध में कई बार सेटलमेंट डिपार्टमेंट टोंक को पत्र लिखे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

चार साल पहले सेटलमेंट का शुरू हुआ काम बंद टोंक जिले में मात्र मालपुरा उपखंड क्षेत्र के अटके पड़े नवीन सेटलमेंट के काम को चार साल पहले सेटेलाइट से नवीनीकरण करने का काम शुरू किया गया था इसके लिए खेतों में खंभे लगा कर काम शुरू करने का सिलसिला चला था लेकिन बाद में बंद कर दिया गया।

जैसे-तैसे चला रहे हैं काम राजस्व नक्शा शीटें फट चुकी है नक्शे कट गए हैं। नया सेटलमेंट नहीं हो रहा। तहसील का काम जैसे तैसे चलाया जा रहा है। किसान अपने काम कराने के लिए अपने स्तर पर जिला कार्यालय या अन्य जगहों से नक्शे की नकलें लेकर आते है उनके आधार पर प्रकरणों का निस्तारण कर काम चलाया जा रहा है। ओमप्रकाश जैन, तहसीलदारना तरमीम ना सीमाज्ञान^पटवारी शंकर लाल चौधरी ने कहा है कि राजस्व नक्शे नहीं होने से क्षेत्र में किसानों के सीमाज्ञान, बंटवारे, तरमीन सहित अन्य राजस्व प्रकरणों के निस्तारण में भारी परेशानी हो रही है । पटवारी ने बताया कि न्यायालय के आदेशों की पालना में भी नक्शा सीटें नहीं होने से परेशान होना पड़ रहा है।-शंकर लाल चौधरी, पटवारी

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