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एनीकट किसानों के लिए अनुपयोगी:दो साल में एक बार भी नहीं भरा बागात का एनीकट, किसानों के लिए अनुपयोगी

टोंक7 दिन पहले
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टोडारायसिंह। बागात में बनाया गया एनीकट जो बारिश के बाद भी दो साल से सूखा पड़ा है। - Dainik Bhaskar
टोडारायसिंह। बागात में बनाया गया एनीकट जो बारिश के बाद भी दो साल से सूखा पड़ा है।
  • सिंचाई विभाग ने 3.66 करोड से कराया था निर्माण, बागात क्षेत्र की कृषि भूमि को नहीं मिला लाभ

शहर के समीप बागात में सिंचाई विभाग ने दो साल पहले 3.66 करोड से बडा एनिकट इस उम्मीद से निर्माण कराया था कि इससे टोडारायसिंह के बागात क्षेत्र के किसानों की हजारों बीघा कृषि भूमि सिंचित होगी और कुओं व बावड़ियों में पानी रिचार्ज हो कर जल स्तर बढेगा, लेकिन एनीकट के बनने के बाद दो साल में एक बार भी नही भरने से किसानों में मायूसी है। किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने टोडारायसिंह में स्थित बागात में दो साल पहले 3.66 करोड रुपए बड़ा एनीकट निर्माण कराया था। एनीकट बनने के बाद पिछले साल भी बारिश के सीजन में सामान्य से अधिक बारिश होने के बावजूद यह खाली रह गया था।

वहीं इस बार भी बारिश का सीजन समाप्ति की ओर आ जाने पर भी एनिकट बिलकुल खाली पड़ा है। इससे सिंचाई विभाग का यह करोड़ों रुपए का एनिकट अनुपयोगी साबित हुआ है।सिंचाई विभाग ने इस एनीकट को 100 मीटर लंबाई में बनाया है। इसकी चौडाई टॉप पर एक मीटर है तथा नींव में 7 मीटर है। जिसे स्लोप में बनाया गया है। पक्के एनिकट के दोनों ओर 450 मीटर लंबाई में मिट्टी की दीवार बनाई गई है। हजारों गैलन क्षमता का यह ऐनीकट पर्याप्त बारिश होने के बावजूद यह बिल्कुल खाली रह गया है। जबकि टोडारायसिंह अन्य जल स्रोत भर चुके है। अगर यह ऐनीकट पानी से भर जाता तो थडोली पंचायत सहित टोडारायसिंह वासियों के लिए वरदान साबित होता। इस एनिकट को बनाने की यहां के ग्रामीणों की वर्षों पुराने की मांग थी।

जिसे तत्कालीन भाजपा सरकार ने मंजूरी देकर इसका कार्य करवाया था। हालात यह है कि एनिकट में पानी आकर भी वहां की बालू मिट्टी सोख जाती है। पानी के अभाव में बागात में फसलें कम पैदा होती है। यह एनीकट टोडारायसिंह में अबतक बने सभी एनिकटों में सबसे बडा बनाया गया था।खेतों के लिए नही मिला लाभएनीकट को बनाने के पीछे बागात की हजारों बीघा कृषि भूमि को रिचार्ज करना, लिफ्ट द्वारा खेतों में सिंचाई करना तथा आस पास के मवेशियों के पीने लिए पानी उपलब्ध कराना था। साथ ही इसके आस पास के कुएं, बावडियां व खेतों का जलस्तरबढ़ाना था।पानी की आवक अवरूद्धएनीकट में हाथी खल्ला, जोगी खल्ला व लाडपुरा खाल से पानी की आवक होनी थी। लेकिन तीनों ही स्रोतों से आवक अवरूद्ध होने व एनीकट के भराव स्थल पर बालू रेत होने से पानी एकत्र नही होता है। इससे इस बार भी यह बिलकुल पूरा खाली रह गया।

दो साल में बिल्कुल खाली रह जाने से किसानों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है।बीसलपुर का ओवरफ्लोपानी ही विकल्पशहर के किसान परसराम सैनी, कैलाश आर्यवीर, रतनलाल माली, सत्यनारायण दग्धी, रामअवतार सैनी, हेमराज सैनी, महेन्द्र कुमार माली, रमेश सैनी, अशोक आरेडिया, ओमप्रकाश, कंवरपाल सैनी, मनोज सैनी, बाबूलाल, कालूराम, मनोज कुमार, महावीर, राजेन्द्र सैनी आदि किसानों ने बताया है कि बीसलपुर बांध ओवरफ्लो होने की स्थिति में सूरजपुरा फिल्टर प्लांट से बागात के इस एनिकट में पानी डलवाया दिया जाए तो यह किसानों व मवेशियों के लिए उपयोगी हो सकता है। सूरजपुरा प्लांट से इस एनिकट की दूरी मात्र आधा किलोमीटर ही है। एक बार भरने के बाद आने वाले 4-5 सालों तक बागात के किसानों को पानी की समस्या का सामना नही करना पडेगा।

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