समाधि मरण:टोडा में ब्रह्मचारिणी कंचन बाई सर्राफ समाधि मरण को प्राप्त

टोंकएक वर्ष पहले
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टोडारायसिंह सप्तम प्रतिमा धारी ब्रह्मचारिणी कंचन बाई सर्राफ का गुरुवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में समाधि मरण हो गया। जिनकी जैन समाज के लोगों ने बैण्ड बाजे से पुष्प वर्षा करते हुए अंतिम यात्रा निकाली। ब्रह्मचारिणी कंचन बाई ने आचार्य वीर सागर जी महाराज से व्रत नियमों की शुरुआत करते हुए आचार्य पदम नंदी जी महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत लिया। क्षेत्र में आए साधु संतों के आहार एवं नगर में पधारे हुए समस्त साधु साध्वियों का आहार कराते हुए स्वयं की भी उन्हीं से धार्मिक भावनाओं से एकाकार होते हुए सात्विक जीवन जिया। चरित्र शुद्धि के 1234 उपवास सहित 16 का रणजी दशलक्षण जी अष्टानिका एवं अष्टमी चतुर्दशी सहित सभी तरह के व्रत उपवास विधान आदि की बचपन से ही धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत अंतिम समय में भी आपने गणिनी आर्यिका रत्न यशस्विनी माता जी एवं आर्य का रतन श्रुत मति माताजी आर्यिका रत्न गरिमा मति माता जी एवं गंभीर मति माता जी से उद्बोधन प्राप्त कर सभी प्रकार के त्याग करते हुए समाधि मरण को प्राप्त किया एवं सल्लेखना धारण की। जिसमें जैन समाज के लोगों ने शामिल होकर उसी त्यागी वृत्ति के सल्लेखना मरण में भाग लिया।

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