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कोरोना इफेक्ट:दस माह से निवर्तमान अध्यक्ष के सहारे चल रही कांग्रेस की बागडोर

टोंक13 दिन पहले
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  • राजनीतिक नियुक्ति पर भी ढाई साल से ब्रेक, कार्यकर्ता मिल बैठकर नहीं कर पा रहे दिशा तय

कांग्रेस में इतने दिनों जिलाध्यक्ष व अन्य पद खाली नहीं रहे। जितना इस बार देखा जा रहा है। हाल ये है कि पिछले 10 माह से कांग्रेस निवर्तमान अध्यक्ष के सहारे चलती दिखाई रही है।गौरतलब है कि गत वर्ष मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट में चली राजनीतिक खींचतान के बाद राज्य में संगठन को भंग कर दिया गया था। कई जगह जिलाध्यक्षों ने इस्तीफा भी दे दिया था। उसके बाद से अब तक कोई भी जिलाध्यक्ष नियुक्त नहीं हो सका है।

हालांकि निवर्तमान जिलाध्यक्ष के नाम से संगठन की कुछ गतिविधियों चलती नजर तो आ रही है। लेकिन उसमें बेहद कम कार्यकर्ता ही जुट पा रहे हैं। जो कार्यकर्ता कांग्रेस के किसी भी संकट की स्थिति में उसके साथ डटे रहते थे। उनमें से अधिकांश कई कार्यक्रमों में नदारद ही दिखाई देने लगे हैं। गुटबाजी के साथ ही राजनीतिक खींचतान के चलते संगठन एक जाजम पर आना भी दिनों दिन मुश्किल होता जा रहा है। जहां 10 माह से जिलाध्यक्ष सहित अन्य पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पा रही है। वहीं ढाई साल से राजनीतिक नियुक्तियों भी नहीं हो पाई है। कई कार्यकर्ताओं गुटबाजी के आरोप भी जनप्रतिनिधियों लगा रहे हैं।

कई कार्यकर्ता सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी नाराजगी को व्यक्त भी करने लगे है। बहरहाल कांग्रेस का अपना संगठन है, वो जो चाहे करें। लेकिन सबसे बड़ी बात ये हैं कि कांग्रेस के कार्यकर्ता विकास के लिए कोई ऐसा कारगर सुझाव एवं कार्य नहीं करवा पा रहे हैं, जिसकी बेहद मांग रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुराद गांधी सहित कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने तथा जिलाध्यक्ष व अन्य पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के कारण संगठन पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पा रहा है। कार्यकर्ताओं में उदासीनता आती जा रही है। उन्होंने भी कई बार प्रदेश व राष्ट्रीय नेताओं को पत्र लिखकर राजनीतिक नियुक्तियों एवं संगठन के बारे में उच्च स्तरीय नेताओं को अवगत कराया है। उन्होंने कांग्रेस को मजबूत संगठन बताते हुए शीघ्र ही आवश्यक सुधार की उम्मीद भी जताई है।

राजनीतिक नियुक्तियों पर है नजर जिले में इस बार राजनीतिक नियुक्तियों के तहत जिले के किसी नेता को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। लेकिन ढाई साल बाद भी ये उम्मीद पूरी नहीं हो पा रही है। अधिकांश कार्यकर्ताओं का कयास है कि अल्पसंख्यक आयोग, मदरसा बोर्ड, राज्य हज कमेटी, राजस्थान उर्दू अकादमी आदि में जिले के किसी नेता को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। पूर्व में इसके लिए कई नेता प्रयास भी कर चुके हैं।

अब तक बने कांग्रेस जिला अध्यक्षजिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर दामोदर लाल व्यास, चंद्र बिहारीलाल व्यास, राम रतन टिक्कीवाल, भंवरलाल तांबी, किशन लाल पटेल, हबीबुर्रहमान, चतुर्भुज चौधरी श्याम बिहारी सक्सेना, आत्माराम गोयल, बनवारी लाल बैरवा, रामबिलास चौधरी, लक्ष्मण चौधरी गाता जिला अध्यक्ष बन चुके हैं। लक्ष्मण गाता करीब 10 माह पूर्व इस्तीफा भी दे चुके हैं। उसके बाद से अब तक कोई नियुक्तियों नहीं हो पाई है।

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