नवरात्रि विशेष:चांदली में हिंगलाज माता के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था, अखंड ज्योत का आंखों में काजल लगाते हैं श्रद्धालु

टोंकएक महीने पहले
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  • पहाड़ी पर है हिंगलाज माता का 500 साल पुराना मंदिर

चांदली की तलहटी में पहाड़ों पर विराजमान मातेश्वरी के आंगन में बिखरे पत्थर को घिसकर आंखों की पलकों पर लगा देने से, या या अखंड ज्योति के काजल को लगा देने मात्र से आंखों की रोशनी लौट आती है। यह तथाकथित नहीं बल्कि सत्य है।जी हां हम बात कर रहे हैं उपखंड के चांदली गांव में सरोवर के समीप ऊंची पहाड़ी पर विराजमान हिंगलाज मातेश्वरी की। कहते हैं ना कि आस्था प्रबल हो तो बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं।

चांदली की हिंगलाज मां को नेत्रदान करने वाली माताजी के नाम से भी जाना जाता है। ताज्जुब तो इस बात का है कि मातेश्वरी का स्मरण करते हुए यदि आपकी आंखें खराब है तो उनके आंगन में बिखरे पड़े पत्थर को घर ले जाइए और घीस कर आंखों की ऊपर नीचे की पलकों पर लगाते रहे। माता के इस नुक्से मात्र से ही आंखों की रोशनी लौट आती है। यही नहीं माता रानी की चल रही अखंड ज्योत का काजल की आंखों में लगाने से लोगों की नेत्र ज्योति लौट आती है। ऐसे कई उदाहरण नवरात्रा में मंदिर पर आए श्रद्धालुओं से बात करने पर सामने आ जाते हैं।

पाकिस्तान के बाद हिंगलाज मातेश्वरी का चांदली गांव के पास पहाड़ी पर स्थित है विशाल मंदिर

अरावली पर्वतमाला की श्रंखला से जुड़ी चांदली की पहाड़ियों में पहले सलखनी की पहाड़ी पर करीब 500 साल पूर्व माताजी प्रकट हुई थी। जो बाद में चांदली सरोवर के पास स्थित बड़ी पहाड़ी पर पूजा ने लगी। किदवंती है कि पाकिस्तान में पहाड़ों पर विराजमान हिंगलाज माताजी आक्रांताओं के आतंक से रुष्ट होकर राजस्थान में टोंक जिले के देवली कस्बे के समीप चांदली गांव में पहाड़ी पर प्रकट हुई थी। इस दौरान इस मातेश्वरी ने कुंभकार परिवार को दर्शन देकर अपने आने की बात बताई थी। आज इस स्थल पर लाखों करोड़ों रुपयों की लागत से भव्य मंदिर बनकर तैयार है। क्षेत्र के ही नहीं बल्कि देश विदेश से भी इस माता रानी के दर्शन करने श्रद्धालु आते है।

इस मनोवैज्ञानिक युग में भले ही लोगों को यह बात गले नहीं उतरती हो लेकिन नवरात्रि पर माता के दर्शन करने वाले श्रद्धालु जिनकी आंखें अखंड ज्योत का काजल लगाने से या परिसर में बिखरे पड़े पत्थर को घर ले जाकर घिसकर लगाने से रोशनी लौट आती है। इस मंदिर में नेत्र रोगियों का कोई पंजीयन नहीं होता है लेकिन सालाना 50 से 60 ऐसे अंध भक्तों को माता रानी रोशनी लौटा देती है।माता रानी से मांगी गई मनौती पूर्ण होने पर श्रद्धालु सोने चांदी के आभूषण एवं नेत्र क्षेत्र भी अर्पित करते हैं सालाना लाखों की तादाद में क्षेत्र से नहीं राजस्थान के बाहर से भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

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