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आज से खुलेंगे डिग्गी कल्याणजी मंदिर के पट:सात माह बाद आज से खुलेंगे डिग्गी कल्याणजी मंदिर के पट

टोंक11 दिन पहले
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  • कोरोना के कारण 19 मार्च से बंद है मंदिर, पुजारियों को जेब से करना पड़ा मंदिर के खर्चे का भुगतान

मालपुरा वैश्विक महामारी के कारण 19 मार्च से दर्शनार्थियों के लिए बंद हुए लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र डिग्गी कल्याणधणी मंदिर के पट सात माह बाद 18 अक्टूबर से फिर खुलेंगे। इसके लिए एसडीएम व मंदिर ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार मीणा ने सशर्त आदेश जारी किए हैं। साबुन से हाथ धोए बगैर व सेनेटाइज तथा किसी भी दर्शनार्थी को बगैर मास्क के मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंदिर में प्रसाद व माला तथा पूजा का सामान लेकर जाने पर रोक रहेगी। इसके लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से गेट पर बाउंसर तैनात किए जाएंगे। मंदिर के मुख्य द्वार से प्रवेश व बाएं दरवाजे से निकास की व्यवस्था रहेगी। डिग्गी पुलिस के जवान भी भीड को नियंत्रित करने के लिए तैनात रहेंगे। संभावना यह है कि लंबे समय बाद व नवरात्रा में कल्याणधणी के पट खुलने के कारण बडी संख्या में दर्शनार्थी श्रद्धालु डिग्गी में उमडेंगे। भक्तों की सभांवित भीड को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने गरुड खंभ के पास से लोगों को दर्शन कराने के आदेश दिए है जबकि पुजारियों ने इसका विरोध करते हुए दर्शनार्थियों को या तो गेट के बाहर से दर्शन कराने अथवा मंदिर के अंदर पूर्व की भांति दर्शन कराने की बात कही है।

मास्क ही वैक्सीन; जो ना पहने, रोकिए-टोकिए

साबुन से हाथ धोए बगैर व सेनिटाइज के प्रवेश नहीं।मंदिर में प्रसाद व पूजा का सामान लेकर जाने पर रोक।मंदिर ट्रस्ट की ओर से गेट पर बाउंसर तैनात रहेंगे। डिग्गी पुलिस के जवान भी सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे।

ट्रस्ट को 20 लाख का घाटा महामारी के कारण सात बंद रहे कल्याणधणी मंदिर के पट के कारण सबसे ज्यादा नुकसान मंदिर ट्रस्ट कल्याणजी महाराज डिग्गीपुरी को हुआ है। ट्रस्ट के अहलकार दिनेश शर्मा ने बताया कि बंद के दोरान दान से आमद कम हुई जबकि औषतन तीन लाख रुपए प्रतिमाह खर्च चालू रहा। इसमें रोड लाइट बिल, कर्मचारियों का वेतन, गोशाला खर्च अन्य खर्च शामिल है। जबकि सात माह दौरान मात्र एक लाख 32 हजार रुपए दान से प्राप्त हुए।

जेब से चुकाया मंदिर खर्च सात माह तक मंदिर के पट बंद रहने के कारण इस दौरान जिन पुजारियों का सेवा का ओसरा आया उन्हें बतोर मंदिर खर्च करीब आठ हजार रुपए प्रतिदिन जेब से भुगतान करना पडा है। पुजारी रामक्लयाण शर्मा ने बताया कि इन खर्चों में जैसे मंदिर के अंदर का बिजली खर्च, इत्र, बालभोग, राजभोग, फलफ्रूट भोग, शाम को पांच किलो का भोग, जोत खर्च इत्यादि शामिल है। अधिकांश पुजारी परिवार मंदिर की सेवा से होने वाली आय पर आश्रित होने से उनकी सेवा के समय बंद रहने से कोई आय नहीं हुई।

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