16 लाख की आबादी में नहीं कार्डियोलॉजिस्ट:हर माह आते है एक हजार हार्ट पेसेंट, फिजिशियन ही प्राथमिक उपचार के बाद पेसेंट को करते है रेफर

टोंक2 महीने पहले
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सआदत अस्पताल का वार्ड । - Dainik Bhaskar
सआदत अस्पताल का वार्ड ।

आधुनिकता की इस भागदौड़ की जिंदगी में बढ़ रहे हार्ट पेसेंट लोगों की जान ले रहा है। इसके बावजूद इसके समुचित इलाज की व्यवस्था जिले में नहीं है। इससे जिले के सब बड़े अस्पताल में भी लोगों की तत्काल जान बचाना भारी पड़ रहा है। जिले में हर माह करीब एक हजार हार्ट पेसेंट डॉक्टर्स के पास और अस्पताल में आते है। यहां पर्याप्त जांचें और सुविधाएं नहीं होने से उन्हें इलाज के लिए कोटा, जयपुर और अजमेर जाना पड़ रहा है। यहां हार्ट के डॉक्टर कार्डियोलॉजिस्ट भी नही है और नहीं उसका पद स्वीकृत है।

जिले में भी करीब 10 साल से हृदय रोग के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टर ( फिजिशियन) बीएल मीना ने बताया कि इस भागम भाग के दौर लोग स्वास्थ्य के प्रति गंभीर नहीं है। गलत खान पान, तनाव आदि कारणों से लोग हार्ट से संबंधित बीमारियों के शिकार हो रहे है। हालत यह है कि बीमारियों से जो मौतें हो रही है। उनमें से करीब 27 प्रतिशत लोग हार्ट पेसेंट के होते है। जो लोगों के लिए काफी चिंता की बात है। सआदत अस्पताल के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अभी आउटडोर में दो हजार मरीज विभिन्न बीमारियों के आ रहे हैं। इनमें से करीब 10 से 15 प्रतिशत मरीज हार्ट से संबंधित बीमारी के आ रहे है।

रक्त के थक्के को पिघलाने के इंजेक्शन

सआदत अस्पताल के फिजिशियन डॉ.बीएल नामा ने बताया कि मेडिकल जैसी सुविधा तो नहीं है, लेकिन आईसीयू वार्ड है। उसमे पांच बेड है। यहां हार्ट पेसेंट को भर्ती किया जाता और उसका इलाज किया जाता है। उसकी धमनियों में खून का थक्का जमने से हार्ट अटैक आता है, उस थक्के को पिघलाने के लिए के लिए तीन तरह के इंजेक्शन है। उन्हें मरीजों को लगाते हैं। उससे मरीज काफी हद तक सामान्य स्थिति में आ जाता है। उसके बाद उसे अन्य सुविधाजनक अस्पताल में या कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाने की सलाह दी जाती है।

आईसीयू में किया जाता है इलाज

सआदत अस्पताल के उप नियंत्रक बीएल मीणा ने बताया कि रोजाना आने वाले मरीजों में से 10 से 15 प्रतिशत मरीज हार्ट से संबंधित आते हैं। उनके लिया आईसीयू में बेड है। कार्डियोलॉजिस्ट का पद नहीं है। इस कारण एक भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। उनकी जगह चार फिजीशियन है। वे हार्ट से संबंधित बीमारियों के पेसेंट को संभालते हैं। जिसके कारण दूसरे हॉस्पिटल में रेफर करना पड़ता है। इस बीमारी से संबंधित जिले के सबसे बडे़ सआदत अस्पताल में भी में एक भी पद नहीं है।

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