ई-मित्र दुकानों की जांच:आईटी टीम ने ई-मित्र दुकानों पर की जांच, मिली पटवारी की आईडी

टोंक22 दिन पहले
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  • दूसरी दुकान पर बूंदी जिले से संबंधित कागज मिले, दुकान संचालक टीम को चकमा देकर हुआ फरार

ई-मित्र संचालकों द्वारा पटवारियों की मिलीभगत निशुल्क आवेदन फार्मों का शुल्क वसूलने का मामला दैनिक भास्कर में प्रकाशित होने के बाद गुरुवार को उनियारा एसडीएम व सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार (आईटी) विभाग की टीम ने गौंडों की झोंपडिय़ां स्थित दो ई-मित्र दुकानों का निरीक्षण किया। एक ई-मित्र की दुकान पर पटवारी की आईडी से रजिस्ट्रेशन करना सहित कई अनियमितताएं मिलीं। जिस पर टीम ने दुकान का कंप्यूटर सीपीओ जब्त कर लिया। मां अंबिका ई-मित्र की दुकान पर बूंदी जिले की श्रम डायरी बनाने के कागजात सहित अन्य अनियमितताएं मिलीं। टीम ने कागजात जब्त कर लिए। दुकान संचालक टीम को चकमा देकर फरार हो गया। आईटी टीम उक्त मामले की जानकारी कलेक्टर को भेजी।

दैनिक भास्कर में गुरुवार के अंक में पटवारियों की मिलीभगत, निशुल्क फार्मों का शुल्क वसूल रहे हैं ई-मित्र संचालक के शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। जिसके बाद गुरुवार को उनियारा एसडीएम रजनी मीणा, आईटी टोंक के संयुक्त निदेशक देवेंद्र माथुर, प्रोग्राम पवन महावर, महावीर साहू, नूतन मीणा, ब्रजमोहन गुर्जर, अनिल महावर आदि गौंडों की झोंपडिय़ां गांव पहुंची। यहां मां अंबिका ई-मित्र व गौरव ई-मित्र की दुकान पर जांच शुरू की। जांच के दौरान गौरव ई-मित्र पर पटवारी की आईडी से किसानों के आवेदनों को रजिस्ट्रेशन करने का पता चला। टीम ने दुकान से कंप्यूटर सीपीओ जब्त कर लिया। वहीं जब मां अंबिका ई-मित्र की दुकान पर पहुंची तो दुकान संचालक विजेंद्र सिंह कुशवाह टीम को चकमा देकर फरार हो गया। टीम को दुकान पर बूंदी जिले के वासी, दुगारी सहित कई गांवों के लोगों की श्रम डायरी बनाने कागजात मिले हैं।

जिन्हें भी जब्त कर लिया। जांच में पता चला कि उक्त दुकान उखलाना गांव में आवंटित है। मगर यहां गौंडों की झोंपडिय़ां में दुकान खोल रखी थी। आईटी टीम मामले की कलेक्टर को रिपोर्ट भेजेगी। उनियारा एसडीएम रजनी मीणा ने कहा कि कि इस प्रकरण में लिप्त पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसानों ने की थी शिकायत सरकार द्वारा विशेष गिरदावरी करवाकर उनियारा तहसील के सभी 224 गांव को अभावग्रस्त घोषित कर खराब हुई फसलों के लिए कृषि आदान अनुदान के रूप में मुआवजा राशि देने की घोषणा की थी। जिसके लिए किसान को संबंधित पटवारी के पास अपने आधार नंबर उपलब्ध करवाकर हुए एक प्रार्थना पत्र देगा। यह आवेदन पटवारियों द्वारा निशुल्क ऑनलाइन भरा जाना था। किसानों ने आरोप था कि पटवारियों ने ई-मित्र संचालकों के जरिए आवेदन करवाकर किसानों से 50 से 100 वसूले जा रहे थे।

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