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गौर करे सरकार:सिंधु घाटी की तरह नगरफोर्ट में भी दफन हैं खेड़ा सभ्यता के अवशेष

टोंकएक महीने पहले
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  • ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार दसवीं शताब्दी तक वजूद में रहे मिनी पुष्कर क्षेत्र को महाभारत काल से जोड़कर भी देखा जाता है

सिंधु घाटी सभ्यता क्षेत्र में खुदाई के दौरान जगह-जगह ईंटें निकलती थी। ऐसी ही खुदाई में ईंटें व अवशेष नगरफोर्ट के मिनी पुष्कर क्षेत्र के समीप भी निकलते रहे हैं। सिंधु घाटी सभ्यता एवं नगरफोर्ट की खेड़ा सभ्यता में भी कई समानताएं है। लेकिन करीब 150 साल पहले कार्लाइल ने जो खोज की उससे आगे अब तक कोई विशेष खोज नहीं हो सकी है। हालांकि कुछ माह पूर्व राजस्थान के पुरातत्व विभाग के मंत्री बीडी कल्ला ने इस पर ध्यान देने की बात कहीं। लेकिन अब तक कोई सुध नहीं ली है। जिसका परिणाम ये हैं कि दुनिया के एक प्राचीन अमीर शहर का रहस्य आज भी धरती के गर्भ में ही दफन है। बहरहाल पुरातत्व के खोजकर्ताओं के अनुसार इस क्षेत्र में एक जौहरी बाजार, छोटा व बड़ा माणक चौक जैसे अनेक हिस्से थे। क्षेत्र औद्योगिक नगरी के रुप में स्थापित था। इस सभ्यता को महाभारत काल से भी पौराणिक गाथों के अनुसार जोड़कर देखा जाता है।

आज भी उपेक्षा का शिकार मिनी पुष्कर अब तक नहीं ली नगरफोर्ट की खेड़ा सभ्यता की सरकार ने सुध, खुदाई में मिले मकान के अवेशष

कोलकाता में संग्रहीत हैं कई अवशेषब्रिटिश काल के पुरातत्व विशेषज्ञ कार्लाइल ने इस सभ्यता की खोज 1871-72 में की। यहां से छह हजार तांबे के सिक्के प्राप्त किए। 110 मुद्राएं इंडियन म्यूजियम कलकत्ता में संग्रहित की गई थी। उस समय इन मुद्राओं का अध्ययन बिन्सेट स्मिथ ने किया था। डा. स्मिथ का विचार था कि इन सिक्कों में से 35 सिक्कें ऐसे थे, जो बाहर से लाए गए और शेष 75 सिक्कें नगर में ही ढाले गए थे। कार्लाइल ने इस सिक्कों का अध्ययन करके 40 मुख्य नामों की पहचान की थी, उनमें से 20 तो मालवगण प्रमुखों के नाम है। इन मुद्राओं पर ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया था। और उनका निर्माण काल मुद्रा शास्त्रियों ने व्दितीय शताब्दी ईपू. से चतुर्थ ई. के मध्य माना है। कुछ सिक्कों पर ब्राह्मी वर्ण इस प्रकार लिखे गए हैं कि उनको बांय से दाएं पढ़ना पड़ता है। इसके अतिरिक्त समय-समय पर महिषासुर मर्दिनी की प्रतिकृति, पाटरी जार, कामदेव व इंद्र की मृण मूर्तियां, शंख के चूड़े, व मनके भी प्राप्त हुए हैं।

क्या कहते हैं जानकार इतिहासकार कालूराम शर्मा एवं प्रकाश व्यास के अनुसार खेड़ा सभ्यता टोंक से 40 किमी दूर दक्षिण पूर्व तथा बूंदी से 70 किमी उत्तर पूर्व में स्थित नगर या करकोट नगर के क्षेत्र से संबंधित है। यह क्षेत्र वर्तमान उनियारा विधानसभा क्षेत्र में आता है। पूर्व में इस करकोट नगर को मालवों ने अपने राज्य की राजधानी बनाया था। यहां की खुदाई से मालव जनपद कालीन सिक्कें भी प्राप्त हुए हैं। यहां से रांगे की एक सील भी प्राप्त हुई थी। डा. रामावतार मीणा ने लिखा है कि “नैनवा देवली मार्ग पर स्थित मुचकुंदेश्वर महादेव जी का प्रसिद्ध मंदिर है। जो लगभग 2000 वर्ष पूर्व का माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग की ऊंचाई 4 फीट तथा व्यास 3 फीट का है। इस मंदिर में शिवलिंग पर सिंदूर का चौला चढाया जाता है। बाद में अभिषेक होता है। राजा मुचकुंद की शिव भक्ति के कारण प्रकट होने से इस शिवलिंग का नाम मुचुकुंदेश्वर महादेव पड़ा है।

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