भक्ति संध्या:भगवान मुनिसुव्रतनाथ की शांतिधारा की, भक्ति संध्या में आरती, प्रश्न मंच व अखंड भक्तामर पाठ

टोंकएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • चित्र का प्रभाव चरित्र पर पड़ता है... आर्यिका स्वस्ति भूषण

गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के सान्निध्य में मंगलवार को चौधरीयान मंदिर में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की चांदी के झारी से वृहद शांति धारा की गई। शांति धारा करने का सौभाग्य जितेंद्र कुमार, अमन कुमार कासलीवाल, विमल चंद, संजय कुमार के परिवार को मिला। इस मौके पर ब्रह्मचारी प्रियंका दीदी ने शांति धारा के महत्व की जानकारी दी। समाज के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी राजेश अरिहंत ने बताया कि संत भवन में आयोजित कार्यक्रम में माताजी को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य पदम कुमार, दिनेश, धनराज जैन गोधा परिवार को मिला।

धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि चित्र का प्रभाव चरित्र पर पड़ता है, जो जितना ऊर्जावान होता है। उसका चित्र भी उतना ही ऊर्जावान होता है। घर के प्रथम कमरे में लगे चित्र से पता चलता है कि व्यक्ति किस स्वभाव का है। इस मौके पर मनोज, पारस, पदम, कालू, सतीश, विमल, निर्मल, निशा, संजू, मंजू, संतोष, गुड़िया, रचना आदि श्रद्धालु मौजूद रहे। इससे पहले भगवान नेमिनाथ विधान की पूजा की गई। सौधर्म बनने का सौभाग्य अशोक उर्मिला छाबड़ा को मिला। शाम को भक्ति संध्या में आरती, प्रश्न मंच समेत अखंड भक्तामर के पाठ शुरू किए गए। इसी प्रकार श्री महावीर जिनालय निवारिया में स्वर्ण कार्य युक्त वेदी में पंडित कपिल शास्त्री के निर्देशन में मूलनायब भगवान महावीर स्वामी के साथ साथ मुनिसुव्रतनाथ व पार्श्वनाथ को कमलासन पर विराजमान किया गया। यह जानकारी एडवोकेट सुरेन्द्रकुमार जैन ने दी।

खबरें और भी हैं...