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  • One And A Half Lakh Devotees Offered 55 Lakhs In Six Months, The Light Comes Back By Rubbing The Stone Of Chandli Hinglaj Mataji's Name Or Applying Kajal Of Akhand Jyot In The Eyes,

आस्था का बड़ा केंद्र चांदली की हिंगलाज माता मंदिर:डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने 6 महीने में चढ़ाए 55 लाख, अखंड ज्योति का काजल लगाने से लौट आती है आंखों की रोशनी

टोंक8 दिन पहले
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मंदिर में विराजमान चांदली की हिंगलाज माता। - Dainik Bhaskar
मंदिर में विराजमान चांदली की हिंगलाज माता।

चांदली की हिंगलाज माताजी का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक बड़ा केंद्र है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यहां सालाना करीब सवा करोड़ रुपए से ज्यादा का चढ़ावा आ रहा है। ये चढ़ावा भी उन श्रद्धालुओं का है जिनकी आंखों की रोशनी हिंगलाज माता के आशीर्वाद से लौट आती है। दरअसल सामान्य तौर पर एक आंखों का डॉक्टर घर पर मरीजों को देखकर हर महीने करीब 2-3 लाख रुपए कमा लेता है। लेकिन हिंगलाज माताजी इससे तीन गुना आगे है।

हिंगलाज माता के श्रद्धालुओं में कुछ तो ऐसे भी है जिनकी आंखों की रोशनी बड़े-बड़े डॉक्टर भी ठीक नहीं कर पाएं, लेकिन माता की अखंड ज्योति का काजल आंखों पर लगाने या फिर माता के नाम का पत्थर घिसकर आंखों पर लगाने मात्र से ही ठीक हो गई। यहां आने वाले लोगों की संख्या का आंकड़ा तो मंदिर समिति के पास नहीं है, लेकिन जिस तरह सालभर हजारों श्रद्धालु यहां आते है और लाखों-करोड़ों रुपए दान करते है। उससे लगता है कि माता के दर पर मत्था टेकने वाले हजारों लोगों को फायदा पहुंचता है। जिसके चलते श्रद्धालु दिल खोलकर चढ़ावा चढ़ाते है।

पांच किलो चांदी, आठ-दस ट्रॉली अनाज आता है
चांदली हिंगलाज माता समिति के कोषाध्यक्ष कस्तूरचंद मीणा ने बताया कि माताजी के चढ़ावे के रूप में साल में 8-10 ट्रॉली अनाज व पांच किलो चांदी आ जाती है। इसके अलावा करीब 2 लाख नारियल आ जाते है। यह चढ़ावा पुजारियों के हिस्से में जाता हैं। दानपेटियों और सहयोग राशि समिति के हिस्से में आती है। समिति का टर्नओवर सालाना करीब सवा करोड़ रुपए हैं। इन रुपयों से मंदिर का विकास करवाने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं भी मुहैया करवाई जा रही है।

लोगों में कायम है अटल आस्था
देवली तहसील के चांदली की पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर परिसर में बिखरे पत्थर को घिसकर आंखों की पलकों पर लगा देने से, या अखंड ज्योति के काजल को लगाने से आंखों की रोशनी लौट आती है। इसी मान्यता के चलते यहां सालाना करीब 3 लाख लोग आते है। इसके चलते इसे नेत्रदान करने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है। लोगों की तो यहां तक मान्यता है कि मंदिर परिसर में बिखरे पड़े पत्थर को घर ले जाकर और घिसकर पलकों पर लगाने तक से भी काफी आराम मिलता है। ऐसे कई श्रद्धालु नवरात्रि में मंदिर पर आए।

पाकिस्तान से आना बताते है लोग
हिंगलाज माता के बारे में किवंदती है कि चांदली की पहाड़ियों से पहले सलखनी की पहाड़ी पर करीब 500 साल पहले माता प्रकट हुई थी। जो बाद में चांदली सरोवर के पास बड़ी पहाड़ी पर पर स्थापित हुई। साथ ही ये भी मान्यता है कि पाकिस्तान में पहाड़ों पर विराजमान हिंगलाज माता वहां से नाराज होकर चांदली गांव के पास पहाड़ी पर प्रकट हुई थी। इससे पहले चांदली के एक कुंभकार (कुम्हार) परिवार को दर्शन देकर यहां आने की बात भी सामने आई।

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