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  • Queue Of Patients In The Hospital, 22 Thousand Patients Reached Saadat Hospital In 13 Days, Out Of Which 2 Thousand 912 Were Admitted, Tests Increased By Two And A Half Times

मौसमी बीमारी बढ़ी:अस्पताल में मरीजों की कतार, 13 दिन में सआदत अस्पताल पहुंचे 22 हजार मरीज, इनमें से 2 हजार 912 भर्ती, ढाई गुना बढ़ गई जाचें

टोंक13 दिन पहले
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टोंक। मौसम में आए बदलाव के चलते सआदत अस्पताल में रोगियों का आंकड़ा बढ़ गया है। मेडिकल वार्ड में भर्ती रोगी। - Dainik Bhaskar
टोंक। मौसम में आए बदलाव के चलते सआदत अस्पताल में रोगियों का आंकड़ा बढ़ गया है। मेडिकल वार्ड में भर्ती रोगी।
  • रोगी बढ़े तो प्रबंधन को खोलना पड़ा न्यू मेडिकल वार्ड, मच्छरों से इस बार फिर मलेरिया व डेंगू के मरीज बढ़ने का अंदेशा

बारिश थमने के बाद अब मौसमी बीमारियां लोगों को चपेट में ले रही है। इस बीच बदलता मौसम लोगों पर भारी पड़ रहा है। इससे लोग वायरल फीवर समेत अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हालात यह है कि निजी समेत सरकारी अस्पतालों में सप्ताहभर से मरीजों का आंकड़ा बढ़ गया है। आलम यह है कि इस पखवाड़े में ही 22 हजार 431 मरीज सआदत अस्पताल की शरण ले चुके है। इतना ही नहीं 2912 मरीजों को भर्ती होना पड़ा। दिन रात में उमस के चलते लोगों के पसीने छूट रहे हैं। ऐसे में बेपरवाह हुए लोग खांसी, जुकाम आदि की चपेट में आ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले 15 दिनों से रोगियों की संख्या में भी दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है। हालात यह है कि मंगलवार को डेढ़ हजार से अधिक का आउटडोर रहा। इसके साथ ही भर्ती मरीजों का दबाव बढ़ने व स्टाफ की कमी से चिकित्साकर्मियों के हाथ-पैर फूलने लगे हैं। स्थिति यह है कि अस्पताल खुलने से पहले ही चिकित्सक कक्ष में रोगियों की कतार लग जाती हैं। चिकित्सक को आते ही टेबल पर पर्चियों का अम्बार मिलता है।मरीज बढ़े तो खाेलना पड़ा न्यूमेडिकल वार्ड, 150 मरीज भर्तीसआदत अस्पताल में मेडिकल वार्ड में पलंगों की संख्या कम रहने से मरीजों व परिजनों में आए दिन कहासुनी होना आम था। मरीजों के बढ़ते दबाव के बाद अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल वार्ड के उपर दूसरे तल पर बने वार्ड को भी मेडिकल वार्ड में तब्दील कर रोगियों को भर्ती करना शुरू कर दिया। इससे लोगों को राहत मिलने लगी है।जिला अस्पताल में बच्चे भी पहुंच रहे बड़ी संख्या में, 20 पलंग पर 46 भर्तीजिला अस्पताल में इलाज के लिए बच्चे भी पहुंच रहे हैं।

शिशु वार्ड में 20 पलंगों की क्षमता है। जबकि मंगलवार को 46 से अधिक बच्चे भर्ती दिखाई दिए। अचानक मौसम बदलने से बच्चे सबसे ज्यादा बीमार हैं। वहीं कोरोना की तीसरी लहर डर भी बना हुआ है।मच्छर बढ़ने से बीमारियोंका खतरा बढ़ रहाशहर समेत जिलेभर के कई खाली प्लाटों में बारिश व घरों से निकलने वाला पानी जमा है। जगह-जगह जमा बदबूदार पानी पानी मलेरिया व डेंगू को न्योता दे रहा है। इनमें पनप रहे मच्छर इस बार फिर से मलेरिया व डेंगू के पांव पसारने का कारण बनेंगे।

इधर, ढाई गुना हुआ जांचों का भार, 1200 से 1400 जांचे हो रही रोजाना मौसमी बीमारियों की चपेट में आए रोगियों की बढ़ती संख्या ने टेक्नीशियनों की सांसें फूला दी है। स्थिति यह है कि एक माह पहले तक जहां 70 से 90 लोगों की जांचे प्रतिदिन होती थी। यह आंकड़ा बढकर अब 200 के करीब पहुंच गया है। यानि की एक मरीज की कम से कम 7 से 8 जांचें की जा रही है। ऐसे में 200 मरीजों की करीब 1200 से 1400 जांचें रोजाना होने लगी है। इनमें भी अधिकतर रोगियों की सीबीसी जांच की जा रही है। ऐसे में रोजाना रक्त व अन्य नमूने लेकर उन्हें निर्धारित समय पर रिपोर्ट देने में पसीने छूट रहे हैं।

वायरल रोगियों की जांच में मिलरहे डेंगू के भी लक्षणजिला अस्पताल आ रहे कई रोगियों की जब जांच कराने का परामर्श दे रहे है तो उनमें प्लेटलेट्स कम मिलने पर डेंगू रोगी मानकर उपचार किया जा रहा है। चिकित्सक भी स्वीकार रहे है कि प्रतिदिन करीब 5 से 7 रोगियों में डेंगू के लक्षण मिल रहे है। हालांकि चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 49 रोगियों में डेंगू के लक्षण मिले है। जबकि वर्ष 2020 में 136, वर्ष 2019 में 521, वर्ष 2018 में 409 डेंगू रोगियों की पुष्टि हुई थी। इसी प्रकार इस वर्ष स्क्रब टाइफस के 13 व चिकनगुनिया के 26 मरीज मिले है।

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