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चिंता:4 लाख 19 हजार हैक्टेयर में रबी बोआई का लक्ष्य, एक चौथाई भूमि बीसलपुर की नहरों से होती है सिंचित

टोंक9 दिन पहले
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  • धरतीपुत्रों की नहरों पर टिकी नजरें, कहा-सिंचाई पर हाेने वाले खर्च से मिलेगी राहत

कृषि विभाग की ओर से जिले में इस बार 4 लाख 19 हजार हैक्टेयर में रबी फसल की बोआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य का एक चौथाई हिस्सा बीसलपुर बांध से निकल रही नहरों के माध्यम से सिंचित होता रहा है। दूसरी ओर किसानों की ओर से इन दिनों बोआई कार्य किया जा रहा है। कई किसान सरसों व गेहूं की बोआई के लिए पलाव करने की तैयारी में है तो कई किसान बोआई कार्य कर अब बीसलपुर समेत जिले के अन्य बांधों की नहरों में पानी छोडने की उम्मीद बांधे है। किसानों के अनुसार समय रहते बीसलपुर बांध से पानी छोड़े जाने से सिंचाई पर खर्च होनेवाली मोटी रकम बचेगी वहीं सिंचाई के लिए मारामारी की भी स्थिति भी नही पनपेगी।उल्लेखनीय है कि जिले में सामान्य से कम हुई बारिश के चलते जहां बीसलपुर बांध में पानी की आवक हुई वहीं किसान रबी फसलों की बोआई को लेकर बांध से सिंचाई का पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे है। इसके साथ ही किसान रबी की फसल में जुटे दिखाई दे रहे है। कही पर गेहंू व सरसों की अगेती बुवाई की जा चुकी है। कुछ किसान सरसों व गेहूं के लिए खेत तैयार करने में लगे है। मेहंदवास निवासी राजाराम जाट, मोहनलाल यादव आदि का कहना है कि बीसलपुर बांध से निकल रही दायीं व बायीं मुख्य नहर में नवम्बर माह के पहले सप्ताह में ही पानी छोडा जाना चाहिए। जिससे वे गेहूं व सरसों की बुवाई पूर्व (पलाव) पानी छोडकर खेत तैयार कर सके। समय रहते पानी छोडे जाने से मुख्य नहरों समेत अन्य माइनरों व वितरिकाओं की टेल पर बसे गांव के खेतों को भी पानी मिल सकेगा।कुल लक्ष्य के मुकाबले करीब लाख हैक्टयर भूमि हो सकेगी सिंचितबीसलपुर बांध की 51.64 किलोमीटर लम्बी दायीं मुख्य नहर से 218 गांवों की कुल 69 हजार 393 हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है। नहर से राजमहल, संथली, दूनी, सांखना, दाखिया, मुगलानी, नगरफोर्ट वितरिकाएं व टोंक ब्रांच शामिल हंै। इन वितरिकाओं की कुल लम्बाई 581 किलोमीटर है। बांध की बायीं मुख्य नहर 18.65 किलोमीटर लम्बी तथा कुल वितरण तंत्र 93.62 किलोमीटर लम्बा है। ये टोडारायसिंह क्षेत्र के 38 गांवों से गुजरती हुई 12 हजार 407 हैक्टेयर जमीन को सिंचित करती है। इसके अलावा भी करीब 20 हजार अनकमाण्ड क्षेत्र की सिंचाई भी किसान चोरी चुपके बीसलपुर बांध की नहरों व वितरिकाओं से करते आए है।यूं पड़ रही है सिंचाई के पानी की आवश्यकतासरसो की बुवाई का उचित समय एक से 15 अक्टूबर के बीच उचित माना गया है। जबकि गेहूं की बुवाई का समय 15 से 20 नवम्बर के बीच है। हालांकि बोआई के बीच तापमान का भी ध्यान रखा जाता है। बावजूद जिले में सरसों व चने की बोआई को लेकर इन दिनों में किसान सिंचाइ के पानी को लेकर परेशान है।जल्द मिले नहरी पानीबीसलपुर बांध से किसानों को समय रहते नहरी पानी दिया जाए। पानी छोड़ने में देर हुई तो आंदोलन किया जाएगा।-रामचन्द गुर्जर, पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत खरेड़ाकिसानों की मांग का प्रस्ताव सरकार को भिजवाया हैकिसानों की मांग का प्रस्ताव सरकार को भिजवाया है। बांध से निकल रही नहरों में पानी छोड़ने का फैसला सरकारी उच्च स्तर पर होगा। ऐसे में निर्देश मिलने के बाद ही सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की तिथि तय होगी। फिलहाल नहरों की सफाई व मरम्मत कार्य जारी है।-आर. सी. कटारा, अधिशासी अभियन्ता, बीसलपुर सिंचाई परियोजना

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