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  • Rahul Jain Of Awaan Started Handloom Business With Two Handlooms By Taking Loan For Employment Five Years Ago, Today 25 30 Youth Have Been Employed With Themselves, With Online Sales, Well known Companies Like Raymonds Are Buying Its Products, Annual Turnover Of 40 Lakhs

5 साल में ही सालाना टर्नओवर 40 लाख पहुंचा:5 साल पहले 3 लाख रुपए का लोन लेकर शुरू किया हैंडलूम, गांव के 30 युवाओं को दे रहे हैं नौकरी, आवां ब्रांड की साड़ी की लांच

टोंक2 महीने पहलेलेखक: महावीर बैरवा
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हथकरघा आवां पर साड़ी तैयार करते कारीगर। - Dainik Bhaskar
हथकरघा आवां पर साड़ी तैयार करते कारीगर।

टोंक जिले के एक छोटे से गांव आवां के राहुल जैन ने 5 साल पहले हैंडलूम के तौर हरकरघा उद्योग शुरू किया था। जैन आचार्य विद्यासागर महाराज व मुनि श्री सुधासागर महाराज की प्रेरणा से मध्यप्रदेश व बुनकर सेवा केंद्र जयपुर से प्रशिक्षण लिया। फिर अपने गांव आवा में ही लोन लेकर श्री विद्याशीष हथकरघा उद्योग आवां की शुरुआत की। 5 साल में टर्नओवर 40 लाख रुपए तक पहुंच चुका है और अब 30 लोगों को रोजगार भी दे रहा है। इतना ही नहीं शनिवार को आवां ब्रांड नाम की साड़ी भी लांच की।

राहहनु ने बताया कि शुरू-शुरू में प्रोडक्ट की बिक्री को लेकर परेशानी आई लेकिन हिम्मत नहीं हारी और खादी कपड़ो की मार्केटिंग शुरू की। वहीं जिला उद्योग केंद्र टोंक के महाप्रबंक शैलेंद्र शर्मा से मिला और अपना आगे का प्लान बताया। शर्मा ने हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। राहुल के बड़े भाई चिराग जैन, आशीष जैन ने भी प्रोत्साहित किया। फिर राहुल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लोन लेकर आठ हैंडलूम ले आया और बेरोजगर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे इसमें युवा काम करने लगे और आज एक बड़ा हथकरघा उद्योग स्थापित हो गया। इसमें बेडशीट, चद्दर, टावल, साड़ी समेत पेंट शर्ट, कुर्ता इत्यादि के कपड़ों का निर्माण हो रहा है

ऑनलाइन बिक्री से बढ़ा कारोबार

राहुल जैन ने बताया कि इस कारोबार में सबसे बड़ी परेशानी इसके उत्पाद की मार्केटिंग की है। स्थानीय स्तर पर इसकी डिमांड कम होने से गांव में हथकरघा उद्योग को पनपाना काफी मुश्किल सा है, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और इसके उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग की तो कारोबार चल पड़ा।

40 लाख का है टर्न ओवर

राहुल जैन ने बताया कि लोन लेकर शुरू किया कारोबार आज सरकार की ओर से भी प्रोत्साहन मिलने एवं ऑनलाइन बिक्री के चलते अच्छा चल रहा है। जयपुर में भी कुछ हैंडलूमें लगाई हैं। आज इस कारोबार से सालाना 40 लाख का टर्नओवर है।

ट्रेनिंग भी करवा चुका है राहुल कई बेरोजगारों को

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के द्वारा बुनकरों को कौशल बढ़ाने के लिए गत साल यहां ट्रेनिंग का आयोजन किया गया था, जिसमें समिति के 20 बुनकरों को उन्नत प्रशिक्षण दिया गया और विशेष डिजाइन बूटी की साड़ी सिल्क दुपट्टा, जूटबैग इत्यादि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। बुनकर सेवा केंद्र जयपुर के निदेशक तपन शर्मा बताते हैं कि यहां पर निर्मित साड़ी को आवा साड़ी के नाम से हम राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित कर रहे हैं।

आज जयपुर में होगा आवां साड़ी का उद्घाटन;

समिति के अध्यक्ष आशीष जैन ने बताया कि इस हथकरघे पर बनी की क्वालिटी और बनावट लोगों को इतनी पसंद आ रही है कि अब सरकार ने कोटा डोरिया की तरह आवां साड़ी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का प्रयास शुरू कर दिया है।

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