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मंडे पॉजिटिव:धावक रोहित बोले, अोलंपिक मैराथन में देश के लिए मेडल जीतना है सपना

टोंक11 दिन पहले
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  • गोवा में राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता की मैराथन दौड़ में 700 प्रतिभागियों को पीछे छोड़ गोल्ड जीतने के बाद आए चर्चा में

कमलेश कुमार महावर | मन में अगर खुद को साबित करने का जज्बा हो तो किसी भी प्रकार कमी या रुकावट सफलता के आड़े नही आ सकती हैं और मेहनत के दम पर कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता हैं। गोवा में खेलो इंडिया के तहत आयोजित हुई राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता की 21 किमी मैराथन दौड़ में 700 प्रतिभागियों को पीछे छोड़ गोल्ड जीतकर चर्चा में आए बमोर के रोहित बैरवा का लक्ष्य अब ओलंपिक मैराथन में देश के लिए गोल्ड जीतना हैं।टोंक शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर बमोर गांव के रहने वाले गरीब परिवार के रोहित (17) के पास दौड़ के लिए कभी जूते तक नहीं थे।

लेकिन कभी भी नंगे पैर तो कभी साधारण जूते पहन कर उसने छोटी सी उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर खूद का नाम कमाया हैं। महज 17 साल की उम्र में दो दर्जन मैडल जीत चुके रोहित ने यूथ स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से गोवा में अगस्त माह में खेलो इंडिया के तहत आयोजित हुई राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में 700 प्रतिभागियों को पीछे छोड़ एक घंटा 13 मिनट में गोल्ड मेडल जीता था। जिसके बाद टोंक पहुंचने पर सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया, जिलाप्रमुख सराेज बंसल के अलावा कलेक्टर चिन्मयी गोपाल, मालपुरा एसपी राकेश बैरवा समेत कई लोगों ने उसको सम्मानित कर उत्साह बढ़ाया था। 17 साल में ही जिलें का नाम रोशन कर लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके रोहित का अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना हैं।

भाई का सपना पूरा करने की जिदरोहित ने बताया कि जब वह छोटा था तो उसके बड़े भाई संजय अच्छे धावक की वजह से मैराथन में ट्रॉफी में जीत चुके थे। लेकिन उनके पैर में चोट लगने के बाद उन्होंने दौड़ना छोड़ दिया। फिर मैंने तय कर लिया कि बड़े भाई के सपने को मैं पूरा करूंगा। फिर स्कूल प्रतियोगिता में दौड़ लगी तो अव्वल रहा। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और टॉफियां और मेडल जीतते चले गए। विदित रहे अब तक रोहित स्कूली गेम से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक जयपुर, हरियाणा, पंजाब, गोवा आदि बड़े शहरों में स्टेट और नेशनल स्तर की 25 टॉफियां और मेडल जीत चुका हैं।

बमोर के रोहित मजदूर परिवार से रखते हैं ताल्लुकबमोर निवासी रोहित का परिवार काफी गरीब परिवार से है। उसके माता-पिता गांव में ही मजदूरी कर आजीविका चला रहे है। चार भाई-बहनो सबसे छोटे रोहित का बड़ा भाई संजय बीएड कर रहा है और प्राइवेट टीचर है। कॉलेज में द्वितीय वर्ष के छात्र रोहित की बहन भी कॉलेज की पढ़ाई कर रही है। रोहित ने बताया कि शुरु से आर्थिक समस्या आती रही हैं, लेकिन गांव व समाज के अलावा भामाशाह उसकी प्रतिभा को देखकर मदद करते हैं। वही अब तो सरकार भी काफी मदद मिल रही हैं।

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