जन संकल्प से हारेगा कोरोना:15 दिन तक आईसीयू में रहा, 2 अस्पताल बदले, डॉक्टर बोले- फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया, भाई ने हौसला बढ़ाया, 21 दिन में जीत ली जंग

टोंक6 महीने पहले
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टोंक। कोरोना वारियर,, घनश्याम राजस्थानी । - Dainik Bhaskar
टोंक। कोरोना वारियर,, घनश्याम राजस्थानी ।
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज दूसरी कड़ी- फेफड़े 30% संक्रमित थे, ऑक्सीजन लेवल 80 पहुंच गया था, मगर हार नहीं मानी...

घनश्याम बैरवा | कोरोना वॉरियर कोरोना वॉरियरमन के हारे हार है मन के जीते जीत...। कोरोना से लड़ाई में जीत के लिए इन दिनों यह अचूक मंत्र किसी दवा से कम नहीं है। यह मंत्र कोरोना संक्रमित हुए नगर परिषद के एनयूएलएम प्रबंधक घनश्याम बैरवा को सांस में तकलीफ, फेफड़ों के काम करना बंद कर देने व दो अस्पतालों में उपचार लेकर 15 दिन बाद भी आईसीयू से निकाल लाया। कोरोना को हराने की पूरी कहानी बता रहे हैं टोंक में सोरण ग्राम पंचायत के इस्लामपुरा गांव के रहने वाले व नगर परिषद के कर्मचारी घनश्याम बैरवा...।26 सितंबर 2020 को मुझे हड्डी बुखार महसूस हुआ, तो मैंने टोंक सआदत चिकित्सालय में डॉ. रामेश्वर बैरवा तथा डॉ. राजीव यादव को दिखाया। अगले तीन दिन टोंक अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती रहा।

30 सितम्बर को मुझे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया। यहां पर मुझे सांस लेने व चलने फिरने में बहुत कठिनाई महसूस हो रही थी। मेरे मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। मेरी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आ रही थी। सीटी स्कैन करवाया तो सिटी स्कोर 14 आया। डॉक्टर ने कहा कि तुम्हारे फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया है और ऑक्सीजन लेवल भी 80 से 85 पर आ गया है और फेफड़ों में काफी हद तक कफ जम गया है। फेफड़ों में 30 प्रतिशत संक्रमण हो चुका था। मुझे टोंक से जयपुर एसएमएस रेफर कर दिया। वहां भी मुझे रिलीफ नहीं मिला। एसएमएस में मेरी दुबारा कोरोना की जांच कराई गई जो पॉजिटिव आई। उसके बाद मुझे आरयूएचएस अस्पताल में रेफर कर दिया गया। मुझे कोविड के इलाज की दवाइयां व इंजेक्शन दिए गए, लेकिन मुझे सांस लेने की दिक्कत बढ़ती ही जा रही थी और मैं बेड से 1 इंच भी हिल नहीं सकता था। हिलते ही मेरी सांस भर आती थी।

अस्पताल में भर्ती हुए मुझे लगभग 15 दिन हो चुके थे, फिर भी मैंने मेरे दिमाग में कभी भी नकारात्मक विचार आने नहीं दिए और मैंने अपना विल पावर स्ट्रांग रखा। मैंने नींबू और गर्म पानी लेना शुरू किया उससे मुझे थोड़ा-थोड़ा रिलीफ मिला। मेरे बड़े भाई राधेश्याम बैरवा 24 घंटे मेरे साथ रहे व मुझे हौसला दिया। कुल मिलाकर मैं 21 दिन टोंक व जयपुर के अस्पताल में भर्ती रहा। अपने विल पावर एवं सकारात्मक सोच से इस बीमारी से जंग जीत कर व स्वस्थ होकर घर लौटा।मेरी अपील... कोरोना को हल्के में न लें। मैं सभी आम जन से अपील करना चाहूंगा कि कोरोना को हल्के में ना लें यह एक बहुत ही गंभीर बीमारी है। सभी लोग मास्क लगाए व सामाजिक दूरी का पालन करें। वैक्सीन तो अवश्य लगवाएं।(जैसा भास्कर रिपोर्टर विनोद शर्मा को बताया)

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