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मंडे पॉजिटिव:लॉकडाउन में भी दूध के कारोबार में नहीं आई कमी, अब भी रोजगार की संभावनाएं, गत वर्ष से अधिक रहा कारोबार

टोंक13 दिन पहले
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  • जिले में रोज 60 से 70 हजार लीटर दूध की बिक्री, पशुपालन भी बढ़ा

एम.असलम | जिले में लॉकडाउन में भी दूध के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। यहां तक की गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष उत्पादन में वृद्धि ही हुई है तथा इसमें अब भी रोजगार के काफी अवसर की गुंजाइश बनी हुई है। वर्तमान में दूध उत्पादन की स्थिति का पता लगाने एवं उसमें अवसर के संभावनाओं को देखने के लिए जिला दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ टोंक डेयरी के दो वर्ष के आंकड़े देखे, तो स्पष्ट है कि जिले में इसका कारोबार बढ़ रहा है।हाल ये है कि स्कूलों में काेरोना काल से पहले तक करीब 35 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से 1575 स्कूलों, मदरसों आदि में सवा करोड़ के दूध की प्रति माह खपत हो रही था।

वो पिछले एक साल से बंद होने के बावजूद भी दूध वितरण में कमी नहीं आई है। यानी की प्रति वर्ष इस में वृद्धि हो रही है। जिससे स्पष्ट है कि किसान के लिए ये अतिरिक्त आय का साधन होने के साथ ही बेरोजगारी की समस्या के समाधान की भी इसमें काफी गुंजाइश है। वर्तमान में जिले की आबादी 17 लाख है। प्रतिव्यक्ति को 250 ग्राम दूध की खपत भी माने तो जिले में प्रतिदिन करीब 4 लाख 25 हजार लीटर दूध की आवश्यकता है। जबकि एक अनुमान के तहत जिले में बाजार में 65 से 70 हजार लीटर दूध विक्रय हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग अपने-अपने घरों में ही पशु पालन कर दूध की पूर्ति कर लेते हैं।

लेकिन शहरी क्षेत्र की दूध का कारोबार अधिक बढा है। लोगों में चाय का चलन बढ़ने एवं इम्यूनिटी पावर बढाने के लिए दूध के महत्व को देखते हुए दूध की खपत अधिक हो रही है। ऐसे में कहा जा सकता है कि जिले में दूध के कारोबार में रोजगार की काफी संभावनाएं बनी हुई है। जिले में है काफी संभावनाएंजिला दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ की प्रबंधक प्रमोद चारण का कहना है कि वर्ष 2020-21 में कोरोनाकाल होते हुए भी संघ लगभग 160 लाख रुपए लाभ लाने का प्रयास किया गया है। संघ प्रगति कर रहा है। दूध के कारोबार में निसंदेह आगे भी काफी संभावनाएं है।

गत वर्ष से संघ लाभ में होने के कारण मालपुरा दुग्ध संयंत्र पर एक नवीन सरस पार्लर 24 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ है। कोरोनाकाल में वर्तमान में भी करीब 30 हजार लीटर दूध का विक्रय हो रहा है। किसानों एवं पशुपालकों को मुख्यमंत्री संबल योजना के तहत 2 रुपए प्रति किलो के हिसाब से अनुदान भी दिया जाता है।30 हजार से अधिक किसानों को मिल रहा है लाभमहज टोंक डेयरी से ही 30 हजार 402 किसानों को लाभ मिल रहा है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि जहां दूध स्वास्थ के लिए लाभदायक है, वहीं ये किसान एवं पशुपालक की अतिरिक्त आय का भी माध्यम बना हुआ है। पशुपालकों का मानना है कि पशुओं की देखभाल के लिए जितनी मेहनत करते हैं, उसका दूध के रुप में वो उपहार देते हैं।

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