अस्पताल में यह कैसी व्यवस्था:मालपुरा के सामुदायिक अस्पताल में गंदगी व दुर्गंध में इलाज, मरीजों को उपचार से ज्यादा बीमार होने का डर

टोंक2 महीने पहले
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मालपुरा। राजकीय सामुदायिक अस्पताल में लाखों रुपए के जनरेटर  कबाड़ में पड़े है जबकि भर्ती मरीज बिजली की समस्या जूझते हैं। - Dainik Bhaskar
मालपुरा। राजकीय सामुदायिक अस्पताल में लाखों रुपए के जनरेटर कबाड़ में पड़े है जबकि भर्ती मरीज बिजली की समस्या जूझते हैं।
  • अधिकारी जांच करने के लिए आते हैं तब ही होती है सफाई, कबाड़ मेंे पड़े लाखों के जनरेटर

मालपुरा राजकीय सामुदायिक अस्पताल में स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ रही है। गंदगी व सड़ांध के कारण अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को अपने रोग का उपचार से ज्यादा महामारी की चपेट में आने का डर सता रहा है। हालत यह है कि भर्ती वार्ड के शौचालयों के पाइप टूटे होने के कारण वार्ड के पीछे मलमूत्र एकत्र हो सड़ांध फैला रहा है। इससे भी गंभीर स्थिति अस्पताल भवन के पीछे लेबर रुम से फेंके जाने वाली गंदगी के कारण बनी हुई है। स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत पर्याप्त बजट व स्वच्छता की तमाम व्यवस्थाओं के सरकारी आदेश निर्देश व बजट के बावजूद मालपुरा के सरकारी अस्पताल में चिकित्सा प्रशासन की अनदेखी व आपसी खींचतान के चलते हाल बेहाल है। स्थिति यह है कि नागरिकों की शिकायत के बावजूद मालपुरा अस्पताल की जांच किसी अधिकारी द्वारा नहीं की जाती ओर जांच के लिए आने की सूचना मिलने पर अस्पताल में एक दिन के लिए विशेष श्रमिकों से अंदर सफाई कर दिखाई जाती है। जबकि मोर्चरी के आस पास व ऑक्सीजन प्लांट के सामने जमा मलमूत्र की सड़ांध जस की तस बनी रहती है।

बिजली कटौती से मरीज हो रहे परेशान
सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज आए दिन बिजली कटौती के दौरान अंधकार व अन्य विद्युत सुविधाएं बंद होने से परेशान रहते है जबकि सामुदायिक अस्पताल को सरकारी कोष से लाखों रुपए खर्च कर उपलब्ध कराए गए बड़े बड़े दो जनरेटर कबाड़ में पड़े है। मजे की बात यह है कि मरीजों की मांग के नाम चिकित्सा प्रशासन द्वारा नए जनरेटरों की मांग सरकार से की जाती है। जबकि एमआरएस कोष से इन्हें तैयार नहीं कराए जा रहें और एमआरएस की राशि को अनावश्यक व फर्जी तरीकों से व्यय की जाती है।

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