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व्यवस्था ने दम तोड़ा:एसएमएस की इमरजेंसी में महिला को एंट्री नहीं दी, गेट पर मौत हुई

टोंक13 दिन पहले
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  • भास्कर विचार : नियम इंसानों के लिए होते हैं, इंसान नियमों के लिए नहीं; व्यवस्था यह बात कब समझेगी? ये हैल्थ इमरजेंसी है... जीवन बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए मगर बड़ा सवाल है कि जिम्मेदार रेफरल जैसे कायदों में ही क्यों उलझे रहते हैं
  • पांच निजी अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी बताकर भर्ती नहीं किया

गुंसी सवाई मानसिंह अस्पताल की इमरजेंसी के सामने शनिवार को ऑक्सीजन के अभाव में गुन्सी की एक महिला ने तड़प-तड़प कर जान गंवा दी। गुंसी की मृतका के जेठ सत्यप्रकाश खंडेलवाल ने बताया कि उसके छोटे भाई की पत्नी रश्मि खंडेलवाल की शनिवार सुबह अचानक तबीयत खराब हो गई। वह तुरंत उसे लेकर राधा स्वामी सत्संग व्यास कोविड सेंटर पहुंचे, जहां से उन्हें इलाज के लिए दूसरे अस्पताल जाने को कहकर वहां से भेज दिया। इसके बाद वह मरीज को लेकर 5 प्राइवेट हॉस्पिटल लेकर पंहुचा, लेकिन सभी जगह पर बेड और ऑक्सीजन की कमी का हवाला देकर किसी भी अस्पताल में मरीज को भर्ती नहीं किया।

अंतत: अस्पतालों के चक्कर लगाते लगाते 6 घंटे गुजर जाने के बाद शाम 4 बजे उसे लेकर एसएमएस अस्पताल पंहुचा, जहां इमरजेंसी का गेट बंद मिला तब तक महिला की हालत बिगड़ चुकी थी। वह मरीज को लेकर इमरजेंसी के सामने रखी पत्थर की बेंच पर बैठ गया और मरीज को अस्पताल प्रशासन से एडमिट करने की गुहार लगाता रहा। इस दौरान उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उसने ऑक्सीजन के अभाव में वहीं तड़प-तड़प कर जान दे दी। इस दर्दनाक मौत से अस्पताल में खड़े लोगों की आंखें नम हो गई और लोगों ने सरकार को कोसा। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल के गेट पर ऐसी दर्दनाक मौत चिकित्सा प्रशासन और सरकारी तंत्र की व्यस्वथाओं को शर्मसार करने वाली घटना है।

हैरत : इसी दौरान पुलिस गाड़ी से लाई महिला को भर्ती कर इलाज भी शुरू कर दिया था

जयपुर | एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर शनिवार शाम को छह बजे गुंसी से एक गंभीर महिला मरीज को लाया गया। गेट पर ही उसे यह कहकर रोक दिया गया कि आरयूएचएस से रेफरल केसों को ही यहां भर्ती किया जा रहा है। बेसुध महिला मजबूरन वहीं बेंच पर लेट गई। वहीं उसकी मौत भी हो गई। महिला की मौत का घटनाक्रम लोगों ने रिकॉर्ड किया और फेसबुक पर लाइव भी कर दिया। नियम-कायदों में उलझी व्यवस्था ने दम तोड़ दिया।

हैरत की बात थी कि दस मिनट बाद ही पुलिस की गाड़ी में लाई गई एक महिला पेशेंट को उसी इमरजेंसी से दाखिल कर लिया गया और कुछ ही देर में इलाज भी शुरू कर दिया गया। लोगों का आरोप है कि अस्पतालों में वीआईपी सिंड्रोम यानी सिफारिश से मरीजों को भर्ती करने की बीमारी बहुत पुरानी है। बड़ा सवाल कि मेडिकल इमरजेंसी के दौर में कब तक मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ होता रहेगा। एसएमएस अधीक्षक डॉ. राजेश शर्मा ने कहा है कि इस घटना की सत्यता की जांच जरूर कराएंगे।

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