मानसून की अच्छी बारिश से खड़ीन पानी से लबालब:अब किसानों को रास आ रही ऑर्गोनिक खेती, उन्नत बीजों की बुआई से 40% चने व 20% गेहूं की पैदावार बढ़ी

जैसलमेर16 दिन पहले
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जिले में अब आर्गेनिक चने व गेहूं की बम्पर पैदावार होगी। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के तहत कृषि वैज्ञानिकों ने उन्नत किस्म के बीज तैयार कर लिए हैं। गौरतलब है कि जैसलमेर में पारंपरिक रूप से खड़ीन खेती की जाती है। वहां उगने वाले चने व गेहूं को ही बीज के रूप में दोबारा से बुवाई किया जाता है। इससे धीरे धीरे पैदावार में कमी आ रही थी। पारंपरिक खेती से किसानों का माेहभंग भी होता जा रहा था।

इसी क्रम में पायलट प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के तहत जिले के 10 खड़ीनों में चार अलग अलग उन्नत किस्मों के बीज बोए। इनमें खास तौर पर पोषण प्रबंधन पर ध्यान रखा गया। इसके तहत ये उन्नत किस्म के बीज बोने से पैदावार में जबरदस्त इजाफा हुआ और यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से सफल रहा। अब खड़ीनों में चने व गेहूं की बम्पर पैदावार होगी और यह खेती पूरी तरह से आर्गेनिक है।

जैसलमेर में 20 खड़ीन, एक का दायरा 100 से 1000 बीघा तक

जैसलमेर में स्टेट टाइम से करीब 20 खड़ीन है। यह 100 बीघा से लेकर 1 हजार बीघा तक के हैं। और भी कई खड़ीन तैयार हो रहे हैं। मरुस्थल में जल-संग्रह तकनीकों का विवरण बिना खडीन के नाम से अधूरा है। राजस्थान के थार मरुस्थलीय क्षेत्र में पानी की कमी के कारण फसलें बहुत प्रभावित होती है। भूमि में जल की कमी तथा भूमिगत जल की क्षारीयता के कारण यह समस्या और भी जटिल हो जाती है। ऐसे में वर्षा-जल ही शुष्क खेती का एकमात्र स्रोत है। खडीन एक विशेष प्रकार की भूमि पर बनाया जाता है। इसके लिए कठोर, पथरीली तथा अत्यन्त कम ढालदार ‘जेन्टिल स्लोप’ भूमि अनुकूल रहती है।

खेती आर्गेनिक, 10 खड़ीनों में तैयार किए उन्नत किस्म के बीज

खड़ीन के गेहूं व चना बाजार में आते ही बिक जाते हैं। इसकी वजह यह है कि यह पूरी तरह से आर्गेनिक होते हैं। किसी भी तरह की रासायनिक खाद आदि का उपयोग नहीं किया जाता है। अब पैदावार बढ़ने से किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होगा, साथ ही दाम भी बढ़ेंगे। खड़ीन खेती पारंपरिक खेती है। बरसाती दिनों में खड़ीनों में पानी संग्रहण किया जाता है।

दो माह तक उस जमीन में नमी रहती है और उसके बाद पानी सूख जाता है या खाली कर दिया जाता है और बीज बुवाई कर दी जाती है। कृषि भूमि में पर्याप्त नमी पैदाकर उसमें फसल उत्पादन करने की परंपरागत तकनीक को ही खड़ीन खेती कहते हैं। परियोजना के तहत जिले के 10 खड़ीनों में उन्नत किस्म के बीज तैयार किए गए हैं।

चने में 30 से 40 और गेहूं में 15 से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी - कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि लगातार दो साल से जिले के 10 खड़ीनों में चार अलग अलग किस्म के बीज बुवाई किए थे। यह प्रयास सफल रहा और चने में 30 से 40 प्रतिशत व गेहूं में 15 से 20 प्रतिशत पैदावार में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यह बीज अन्य किसानों के लिए भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। ताकि नहरी क्षेत्र में भी पैदावार बढ़ सके।

राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के तहत हमने खड़ीन खेती के लिए उन्नत बीज तैयार किए हैं। गेहूं में 15 से 20 प्रतिशत और चने में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी है। आम तौर पर खड़ीन में उगने वाली फसल के ही बीज बोए जाते थे। अब पोषण प्रबंधन के आधार पर बेहतर बीज तैयार करवाए गए हैं।
डॉ. दीपक चतुर्वेदी, कृषि वैज्ञानिक

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