संकट में डेयरी:ऊंटनी के दूध के नहीं मिल रहे खरीदार हर माह एक हजार के मुकाबले 150 लीटर की बिक्री

जैसलमेर22 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

80 लाख रुपए की लागत से पोकरण में लगाई थी डेयरी, प्रचार-प्रसार के अभाव में नहीं बढ़ रही दूध की डिमांड पश्चिमी राजस्थान की पहली कैमल मिल्क डेयरी पोकरण में कुछ माह पूर्व मरूगंधा परियोजना के सहयोग से 80 लाख रुपए की लागत से स्थापित की गई थी। जिस समय डेयरी लगी उस समय ऊंटपालकों को राज्य पशु संवर्द्धन के साथ रोजगार मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन वर्तमान में ऊंटनी के दूध के खरीदार नहीं मिलने के कारण लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है।

पश्चिमी राजस्थान की पहली कैमल मिल्क डेयरी पोकरण में स्थापित होने से पोकरण विधानसभा के ऊंटपालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन लोगों ने रूचि नहीं दिखाई, जिसके कारण ऊंटनी के दूध के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। हर माह एक हजार के मुकाबले सिर्फ 150 लीटर दूध ही बिक रहा है। कैमल कलस्टर कॉर्डिनेटर नगेंद्र माथुर ने बताया कि पोकरण में स्थापित डेयरी के लिए पोकरण विधानसभा के 240 ऊंट पालकों का एक समूह बनाया गया था। जिसका पाबूजी राठौड़ ट्रस्ट दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड नाम रखा गया हैं। समूह में 28 हजार ऊंटों को शामिल किया गया हैं। फेडरेशन के माध्यम से ऊंटनी का दूध डेयरी तक पहुंचता है।

लेकिन प्रचार व प्रसार के साथ स्थानीय लोगों की ऊंटनी के दूध के प्रति कम जागरूकता के कारण पोकरण विधानसभा क्षेत्र में इनकी डिमांड न के बराबर है। गौरतलब है कि ऊंटनी का दूध कई गंभीर बीमारियों में औषधि के रूप में उपयोग में लिया जाता है। ऊंटनी का दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है।

लापरवाही; लोगों को ऊंटनी के दूध से तैयार प्रोडेक्ट की जानकारी नहीं, इसलिए बिक्री बढ़ने की बजाय घट रही है >लिवर के लिए फायदेमंद : ऊंटनी के दूध का उपयोग लीवर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। लीवर की कार्यप्रणाली में कुछ खास एंजाइम को रक्त में डालना भी शामिल है। वहीं जब किसी वायरस अटैक की वजह से लीवर डैमेज की स्थिति बनती है, तो इन एंजाइम का स्तर बढ़ जाता है। ऊंटनी का दूध लीवर एंजाइम्स के बढ़े हुए स्तर को कम करने में मदद कर सकता है, जो कि लीवर स्वास्थ्य की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत है। मधुमेह को करता है नियंत्रित : ऊंटनी के दूध से ब्लड शुगर को भी नियंत्रित किया जा सकता है। ऊंटनी के दूध में एंटीहाइपरग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर को कम करने वाला गुण) पाए जाते हैं। ऊंटनी का दूध लिपिड प्रोफाइल में सुधार करके और इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करके मधुमेह के घरेलू उपचार के रूप में काम कर सकता है।

कैंसर से बचाव में मददगार : ऊंटनी का दूध कैंसर से बचाव किया जा सकता है। ऊंटनी के दूध का उपयोग ऑटोफैगी को बढ़ावा देकर आंत और स्तन कैंसर कोशिकाओं पर एंटीप्रोलिफेरेटिव प्रभाव डाल सकता है। ऑटोफैगी सेल्स से जुड़ी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कोशिकाएं स्वयं से अनावश्यक घटकों को हटाने का काम करती हैं। किडनी के लिए भी फायदेमंद : ऊंटनी का दूध अप्रत्यक्ष रूप से किडनी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। जेंटामाइसिन (बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए उपयोग में लाई जाने वाली एंटीबायोटिक) का दुष्प्रभाव नेफोटॉक्सिक प्रभाव का कारण बन सकता है।

ऊंटनी के दूध को लेकर आमजन में उत्साह नहीं होने और ऊंटनी के दूध के प्रति रुझान नहीं होने के कारण दुग्ध डेयरी में उत्पादन पर काफी असर पड़ा है। ऐसे में परेशान अधिकारी इन दिनों अन्य जिलों में अपने भाग्य आजमाने में जुटे हुए हैं। पोकरण में ऊंटनी के दूध के उत्पादक नहीं बिकने के कारण अधिकारी इन दिनों जोधपुर, नागौर और बीकानेर में अपने भाग्य आजमाने लगे हुए हैं। हालांकि डेयरी के शुभारंभ के समय प्रचार प्रसार किया गया था। लेकिन रोजाना प्रोडेक्ट बेचने के चलते इस डेयरी का बहुतायत में प्रचार-प्रसार करने के साथ ही ऊंटनी के दूध के फायदे भी आमजन को बताएं जाने होंगे। ताकि ऊंटनी के दूध को खरीदने के लिए जागरूक हो सके। लेकिन इस मामले में डेयरी प्रबंधन फिसड्डी साबित हो रहा है। जिससे आमजन में भी ऊंटनी के दूध की खरीद के प्रति क्रेज नहीं बढ़ रहा है।

पोकरण विधानसभा में लोगों ने ऊंटनी के दूध व दूध से बने उत्पादों के प्रति कम रूचि दिखाई दे रही है। जिसके कारण इस क्षेत्र में दूध व अन्य उत्पाद न के बराबर सप्लाई हो रहे हैं। आगामी दिनों में राज्य के अन्य जिलों में प्रचार व प्रसार के माध्यम से दूध की सप्लाई की जाएगी। जिससे राज्य पशु ऊंट रखने वालो ऊंटपालकों को रोजगार मिलेगा वहीं परियोजनाओं की भी आय बढ़ेगी।

^ऊंटनी के दूध के उत्पादकों के साथ साथ ऊंटों के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए पश्चिमी राजस्थान की पहली डेयरी का शुभारंभ किया गया था। लेकिन पिछले कुछ समय से आमजन में ऊंटनी के दूध के उत्पादों के प्रति रुझान नहीं है। जिसके कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है।नगेन्द्र माथुर, कैमल कलस्टर कॉर्डिनेटर, पोकरण

खबरें और भी हैं...