परिंदों के 'परिंडो' का सफर:रिजेक्ट मटकी के बजाय टीन के बनने लगे हैं, आधुनिक परिंडे में खर्च होते हैं 150 से 200 सौ रूपए

झालरापाटन9 दिन पहले
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समय परिवर्तनशील है और कहते हैं कि यह अपने साथ हर चीज में बदलाव लेकर आता है। पिछले सालों में कुछ ऐसा ही परिवर्तन आया है, पक्षियों के लिए पेड़ों पर बांधे जाने वाले परिंडो में। समय के साथ परिंडे आधुनिक और पक्षियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित हो गए हैं। लेकिन आधुनिकता ने परिंडो की कीमतें भी बढ़ा दी है। कुछ सालों पहले तक लोग मुफ्त के परिंडे बांध पुण्य कमाते थे,अब नए परिंडो को बांधने में 150 से 200 रुपये तक खर्च होते हैं।

रिजेक्ट मटकी से टीन तक का सफर

गर्मियों के मौसम में परिंडे बांधने की परंपरा पुरानी है। 90 के दशक तक लोग घर में रखी पुरानी मटकी को बीच में से काट कर उसे सूत की रस्सी के सहारे पेड़ पर लटका थे। और रोजाना उसमें पानी भरतें थे। लेकिन फ्रिज की वजह से जब घर में मटकीयों का प्रचलन कम हुआ,तो मिट्टी के रेडीमेड परिंडे बाजार में कुम्हार की दुकानों पर बिकने लगे अभी भी यह परिंडे बाजार में 20 से लेकर 50 रुपये तक बिकते हैं। लेकिन अब परिंडे टीन के बनाए जाने लगे हैं। जिनकी कीमत 150 से लेकर 200 तक होती है।

सुरक्षित भी और सुविधाजनक भी

कई वर्षों से पक्षियों के लिए परिंडे बांधने वाले भूतपूर्व सैनिक बने सिंह ने बताया की टीन के बने परिंडे पक्षियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक होते हैं। वे इनमें आराम से बैठकर पानी भी पी सकते हैं और दाना भी चुग सकते हैं। मिट्टी के परिंडे कुछ दिनों में टूट कर नीचे गिर जाते हैं या फिर छोटे बच्चे पत्थर से अपना निशाना बना लेते हैं।

लेकिन टीन के रंग-बिरंगे परिंडे मजबूत होते हैं और पक्षी की इनकी ओर आकर्षित भी होते हैं। लेकिन इनमें एक कमी जरूर है इनमें पक्षियों को उतना ठंडा पानी नहीं मिलता जितना मिट्टी के परिंडो में मिलता है।

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