किठाना के जगदीप का देश में उजाला:बधाई हाे! उपराष्ट्रपति चुनाव में हमारे धनखड़ की हुई धाकड़ जीत, अल्वा काे 346 मताें से हराया

झुंझुनूं2 महीने पहले
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पैतृक गांव किठाना में देर रात तक आतिशबाजी। फोटो - रोहिताश्व - Dainik Bhaskar
पैतृक गांव किठाना में देर रात तक आतिशबाजी। फोटो - रोहिताश्व

झुंझुनूं जिले के शनिवार का दिन ऐेतिहासिक रहा है। जिले के किठाना गांव निवासी जगदीप धनखड़ देश के उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। चुनाव में धनखड़ ने मारग्रेट अल्वा काे 346 मताें के भारी अंतर से हराकर यह जीत हासिल की है। शेखावाटी के लिए यह तीसरा अवसर है जब क्षेत्र का काेई व्यक्ति देश उच्च संवैधानिक पद पर पहुंचा है। इनसे पहले सीकर जिले की बहू छाेटी लाेसल निवासी प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति रहीं, उनके बाद सीकर जिले के खाचरियावास निवासी भैराेसिंह शेखावत उपराष्ट्रपति रह चुके हैं। अब यह तीसरा माैका है जब शेखावाटी के झुंझुनूं जिले के किठाना गांव निवासी जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति चुने गए हैं।

उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार धनखड़ ने विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया। चुनाव में 725 सांसदाें ने मतदान किया। धनखड़ को 528 वोट मिले, जबकि अल्वा को महज 182 वाेट ही मिल पाए, 15 वोट अमान्य घोषित किए गए। अब 11 अगस्त को वे उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। जगदीप धनखड़ की जीत की पूरी संभावना थी।

धनखड़ वर्ष 1989 में चाैधरी देवीलाल के 75वें जन्मदिवस पर दिल्ली में हुई रैली में 75 गाड़ियाें में समर्थकाें काे साथ लेकर पहुंचे थे। इसके बाद देवीलाल ने उन्हें जनता दल की टिकट देकर झुंझुनूं से सांसद का चुनाव लड़वाया।जिसमें धनखड़ रिकाॅर्ड मताें से जीते। बाद में केंद्र सरकार में इन्हें मंत्री भी बनाया गया।

जगदीप धनखड़ की सफलता में शनिवार का संयोग

जगदीप धनखड़ की सफलता में शनिवार का अजीब संयाेग है। तीन साल पहले जुलाई 2019 में धनखड़ काे बंगाल का राज्यपाल बनाने की घाेषणा हुई थी तब भी शनिवार का दिन था। पिछले महीने 16 जुलाई काे भाजपा संसदीय बाेर्ड ने उनकाे उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया तब भी शनिवार का दिन था। अब उपराष्ट्रपति के वाेटिंग व जीत का दिन भी संयाेग से शनिवार ही है।

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किठाना गांव में 18 मई 1951 को एक किसान परिवार में जन्मे धनखड़ की प्रारंभिक शिक्षा किठाना के सरकारी स्कूल में ही हुई। इसके बाद छठी कक्षा की पढ़ाई चार किलोमीटर दूर घरड़ाना गांव के सरकारी स्कूल में की। बाद में उनका सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में प्रवेश हो गया। वे बड़े भाई कुलदीप धनखड़ के साथ सैनिक स्कूल चले गए। पिता गोकुलचंद व माता केशरीदेवी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए जयपुर में किराए के मकान में रहने लगे। सैनिक स्कूल से पढ़ाई के बाद महाराजा कॉलेज जयपुर से बीएससी ऑनर्स में स्नातक व राजस्थान विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की।

वे सेना में जाना चाहते थे लेकिन नजर कमजोर होने की वजह से नहीं जा पाए। जगदीप चार बहन-भाइयाें में दूसरे नंबर के हैं। सबसे बड़े भाई कुलदीप व छाेटे रणदीप धनखड़ हैं। बहन इंद्रा तीसरे नंबर की हैं। वर्ष 1979 में डॉ. सुदेश से शादी हुई। जगदीप ने जयपुर हाई काेर्ट व सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में वकालात की। वे झुंझुनूं के सांसद व केंद्रीय मंत्री व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी बने।

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वकालात के गुरु बाेले- अंग्रेजी पर पकड़ और प्रजेंटेशन बहुत अच्छा है उनका

जगदीप ने 1978 के बाद मेरे पास 6 साल तक जूनियर के रूप में वकालत की। तब मैं हाईकोर्ट में वकील था। जगदीप के चाचा व किठाना गांव के सरपंच रहे चौधरी हरबंश धनखड़ का मैने एक केस लड़ा था। जब से यह परिवार मेरे संपर्क में है। चौधरी हरबंश ही जगदीप को मेरे पास वकालात के लिए लाए थे। हम एक ही जिले के होने के नाते में हमेशा परिवार की तरह रहे हैं।

जगदीप बहुत कुशाग्रबुद्धि हैं, अंग्रेजी पर उनकी अच्छी पकड़ है और उनका प्रजेंटेशन भी बेहतर है। जगदीप ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने तब भी मुझसे मिलकर आशीर्वाद लिया था, अभी भी शपथग्रहण कार्यक्रम के लिए टेलीफोन आया है लेकिन उम्र और अस्वस्थता की वजह से यहीं से उनकी बेहतरी के लिए प्रार्थना करुंगा। - जैसा कि हाईकाेर्ट के एडवाेकेट व पूर्व कार्यवाहक राज्यपाल नवरंगलाल टीबड़ेवाल ने रिपाेर्टर माेहम्म्द मुस्लिम काे बताया

स्पेलिंग में चूक हुई तो कक्षा मेंं खड़े होकर जगदीप ने शिक्षक को भी गलती बताई

जगदीप में बचपन से ही गलत बात का प्रतिराेध करने की प्रवृति रही है, कक्षा में भी जब काे साथी गलती करता ताे तुरंत टाेकता। गलती पर शिक्षक काे भी टाेकने में काेई हिचक नहीं हाेती थी। एक बार शिक्षक ने ब्लैक बोर्ड पर बतौर उदाहरण अंग्रेजी में राम और श्याम लिखा। जिसमे राम का पहला अक्षर कैपिटल और श्याम का पहला अक्षर स्माॅल लिख दिया। जिस पर जगदीप ने तुरंत ही कक्षा में खड़े हाेकर शिक्षक को उनकी भूल बताई, तब हम छठी कक्षा में पढ़ते थे। पढ़ाई में होशियार इतने थे कि होमवर्क स्कूल में ही पूरा कर लेते थे।

गणित की कॉपी कभी घर नहीं ले जा पाते थे, क्योंकि सहपाठी उसे देखकर अपना गृहकार्य करते थे। गांव से डेढ़ कोस पैदल चलकर पढ़ने के लिए घरड़ाना आते थे। उस वक्त गांव में प्राथमिक स्कूल ही था। - जैसा कि सहपाठी व सेवानिवृत्त पीटीआई हरदयालसिंह राव ने रिपाेर्टर विद्याधर धायल काे बताया

जगदीप मुझसे 20 वर्ष छोटे हैं, लेकिन दोस्ताना है, फाेन करके हाल-चाल पूछते हैं

जगदीप मेरे से उम्र में 20 वर्ष छोटे हैं लेकिन व्यवहार दोस्ताना रखते हैं। जगदीप ने गांव वालों से कानूनी सलाह की कोई फीस ली। पिता पेशे से रेलवे कांट्रेक्टर थे लेकिन खेती भी करते थे। बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए वे जयपुर की संग्राम कॉलोनी में किराए के मकान में रहे। किठाना में उनके मकान (ऊंची हवेली) के कद के अनुरूप ही परिवार का मान-सम्मान ऊंचा रहा है।

पिता गोकुलचंद-मां केशरीदेवी ने स्वयं केवल साक्षर होते हुए भी बेटों को उच्च शिक्षा के साथ संस्कार भी दिए। उन संस्काराें के कारण ही आज जगदीप ने किठाना गांव काे गौरवान्वित किया है। सुप्रीम कोर्ट में वकालात करते और बंगाल में राज्यपाल रहते समय व्यस्तता के बावजूद फाेन करके मेरी और गांव के अन्य लाेगाें की कुशलक्षेम पूछना कभी नहीं भूलते हैं।- जैसा कि चचेरे भाई 92 वर्षीय चौधरी रामजीलाल धनखड़ ने रिपाेर्टर विपुल महमिया काे बताया

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