डेंगू का खतरा बढ़ा:बीडीके अस्पताल में संसाधन होने के बावजूद डेंगू मरीजाें के लिए प्राइवेट अस्पतालाें से ला रहे प्लेटलेट्स

झुंंझुनूं6 दिन पहले
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बीडीके अस्पताल में पर्दे से ढंकी ब्लड कंपोनेंट मशीन। - Dainik Bhaskar
बीडीके अस्पताल में पर्दे से ढंकी ब्लड कंपोनेंट मशीन।
  • 3 साल पहले मंजूर ब्लड कंपाेनेट यूनिट शुरू नहीं, 8 महीने से मशीन भी तैयार, लेकिन अस्पताल प्रशासन कर्मचारी काे प्रशिक्षण नहीं दिला सका

जिले के सबसे बड़े बीडीके अस्पताल प्रशासन की लापरवाही मरीजाें काे संकट में डाल रही है। यहां तीन साल पहले मंजूर हुई ब्लड कंपाेनेंट यूनिट आज तक शुरू नहीं हाे पाई है। जबकि दाे साल पहले यहां आईं मशीनाें काे आठ महीने पहले ही इंस्टाॅल भी किया जा चुका है।

अस्पातल प्रशासन की लापरवाही यह रही कि इन आठ महीने में वह एक भी कर्मचारी काे इसके संचालन का प्रशिक्षण नहीं दिलवा पाया है। इसका नतीजा यह है कि बीडीके अस्पताल में भर्ती हाेने वाले डेंगू मरीजाें के लिए भी प्लेटलेट्स का इंतजाम करने के लिए परिजनाें काे प्राइवेट अस्पतालाें के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बदलते माैसम के इस दाैर में बीडीके अस्पताल सहित जिले के अस्पतालाें में इन दिनाें डेंगू और डेंगू लाइक इलनेस के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्लेटलेट्स और प्लाज्मा की जरूरत के बीच बीडीके अस्पताल में ब्लड कंपाेनेंट यूनिट शुरू नहीं हाेना मरीज व उनके परिजनाें के लिए परेशानी का बड़ा कारण बना हुआ है। पिछले साल डेंगू का प्रकाेप बढ़ने के समय बीडीके अस्पताल में

ब्लड कंपाेनेंट यूनिट शुरू करने की कवायद की गई थी लेकिन सैंट्री फ्यूज पार्ट नहीं होने से इसे शुरू नहीं किया जा सका। इसके बाद तत्कालीन चिकित्सा निदेशक के दौरे पर यूनिट काे लेकर सवाल उठने पर सैंट्री फ्यूज पार्ट भी आ गया और मशीनाें काे इंस्टॉल भी कर दिया गया। इसके बावजूद तकनीकी स्टाफ नहीं होने से आज भी इसे शुरू नहीं किया गया है।

एक्सपर्ट कार्मिक की जरूरत है
ब्लड कंपाेनेंट यूनिट के लिए तकनीकी कार्मिक की समस्या है, जो सेपरेशन यूनिट को चला सके। इसके लिए चिकित्सा निदेशक को पांच दिन पहले ही पत्र भिजवा चुके हैं और उन्होंने इसकी अनुशंषा भी कर दी है। जल्द ही यूनिट शुरू कर देंगे।
-डाॅ. कमलेश झाझड़िया, पीएमओ, बीडीके अस्पताल

बीडीके में होने वाली जांचों में 10% मरीज डेंगू के मिल रहे
इन दिनाें बीडीके अस्पताल में डेंगू जांच के लिए सुबह से लाइनें लग रही हैं। हर दिन औसत 150 डेंगू जांच की जा रही है। जिसके लिए 12 बजे सैंपल लिए जाते हैं। इनमें 10 डेंगू पाॅजिटिव मिल रहे हैं। अकेले बीडीके अस्पताल में ही हर दिन 15 से ज्यादा डेंगू पाॅजिटिव केस मिल रहे हैं। लेकिन उनकाे एडमिट नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल के मेडिसीन वार्ड एक और दाे पूरी तरह से भर चुके हैं और उनके गलियारे में मरीजाें काे बैड देकर इलाज किया जा रहा है।

प्लेटलेट्स की सुविधा निजी अस्पतालाें के भरोसे : शहर में तीन ब्लड बैंक है। जिनमें एक बीडीके अस्पताल और निजी अस्पतालाें में है। बीडीके अस्पताल में पिछले साल ब्लड कंपाेनेट यूनिट शुरू नहीं हाेने की बड़ी वजह सेंटर फ्यूज मशीन नहीं आना बताया गया था। लेकिन इस मशीन काे आए भी सात महीने से ज्यादा का समय हाे चुका है और ब्लड कंपाेनेट यूनिट इंस्टाॅल भी हाे चुकी है। शुरू नहीं किया गया है। इस कारण मरीजाें काे निजी ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स के लिए भेज रहे हैं।

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