9 किलो चांदी से बना 9 फीट ऊंचा ताजिया:आधे फीट के ताजिये से हुई शुरुआत, 1962 में बना चांदी का ताजिया

झुंझुनूं2 महीने पहले

झुंझुनूं का यह ताजिया अपनी अलग ही पहचान रखता है। इससे चांदी का ताजिया कहते हैं। इसको देखने के लिए हर साल ही अलग भीड़ होती है। शहर में करीब 60 साल से परम्परा निभाई जा रही है। इसी ऊंचाई 9 फीट है और वजन भी 9 किलो है। धोबियान बिरादरी का एक परिवार इस परंपरा को निभा रहा है। इसकी शुरुआत आधा फीट के ताजिये से हुई थी। धोबियान बिरादरी का यह चांदी का ताजिया अपने आप में कई खासियत समेटे हुए है।

60 साल पहले बना चांदी का ताजिया
झुंझुनूं में 60 साल पहले यह चांदी का ताजिया बनाया गया था। वर्ष 1962 में पहली बार यह चांदी का ताजिया बनाया गया था। उस समय इसकी ऊंचाई आधा फीट और चांदी आधा किलो थी। अब इसकी ऊंचाई 9 फीट और चांदी की मात्रा भी 9 किलो है। धोबियान बिरादरी की ओर से शहर में 60 साल से लगातार यह ताजिया निकाला जा रहा है। अलग अलग कारीगरों ने इस ताजियों को अलग अलग समय में बनाया है।

लाइसेंसधारी मोहम्मद अकरम बताते हैं कि इस ताजिए को फतेहपुर के कारीगर इब्राहिम लोहार व 2007 में शकूर लोहार चूरूवाला ने अलग-अलग समय में बनाया 9 फीट ऊंचा यह ताजिया अकीदतमंदों के सहयोग व चढ़ावे में आने वाली राशि और चांदी से बनाया गया है। मस्जिद के नीचे ताजिए की बैठक लगती है। इसको कर्बला नहीं ले जाया जाता है। इसको सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।

ऐसे हुई शुरुआत
धोबियान बिरादरी के चांदी के ताजिए का अपना इतिहास है। हासम खोखर व शाकिर खोखर ने बताया कि पहले चद्दर का ताजिया निकाला जाता था। 1962 में पिलानी की एक अकीदतमंद महिला ने चांदी के हथेली के आकार का ताजिया पेश किया। इसके बाद से यह चांदी का ताजिया बनाने का फैसला हुआ। ताजिए पर आने वाले नजराने (चढ़ावे) से इस चांदी के ताजिए को 1962 में बनाने की शुरुआत हुई। बनाने की शुरुआत गुलाम अहमद खोखर ने कराई थी।

चौथी पीढ़ी निभा रही है परम्परा
चांदी के ताजिया की शुरुआत गुलाम अहमद खोखर ने की थी। इंतकाल के बाद भाई अब्दुल गनी खोखर लाइसेंसधारी बने। उनके बाद अब्दुल रज्जाक टेलर मास्टर ने संभाला जो गनी खोखर के भतीजे थे। मरहूम मोहम्मद असलम टेलर 2008 तक इसके लाइसेंस धारी थे। 2009 में मोहम्मद असलम खोखर के इंतकाल के बाद चौथी पीढ़ी के मोहम्मद अकरम इसके लाइसेंस धारी हैं, जो मोहम्मद असलम खोखर के बेटे हैं।

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