गांव से इतना लगाव, सरनेम 'अग्रवाल' से 'झुनझुनवाला' किया:7 महीने पहले राकेश की पत्नी और छोटे भाई का परिवार आया था कुलदेवी पूजने

झुंझुनूं2 महीने पहले
राकेश झुनझुनवाला को सरनेम झुंझुनूं ने दिया।

द बिग बुल...द किंग ऑफ दलाल स्ट्रीट...शेयर मार्केट का बादशाह। इन सारे नाम से जाना जाता था राकेश झुनझुनवाला को। रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

राकेश झुनझुनवाला का राजस्थान के झुंझुनूं से भी नाता जुड़ा हुआ है। उनको झुनझुनवाला सरनेम यहीं से मिला। उनका असल सरनेम था अग्रवाल, जो बाद में झुनझुनवाला हुआ।

झुझुनूं के रहने वाले CA मनीष अग्रवाल ने बताया कि राकेश झुनझुनवाला के परदादा और दादा झुंझुनूं से 30 किलोमीटर दूर मलसीसर के रहने वाले थे। 100 साल पहले झुनझुनवाला के दादा परिवार समेत कानपुर चले गए थे। राकेश के दादा सिल्वर के कारोबारी थे। उस समय कानपुर में उन्होंने सिल्वर किंग के नाम से पहचान बना ली। इस बीच राकेश के पिता राधेश्याम इनकम टैक्स ऑफिसर बने और मुंबई में बस गए।

राकेश के दादा और पिता का झुंझुनूं से गहरा लगाव था। यही कारण रहा कि पिता ने सबसे पहले अपना नाम राधेश्याम झुनझुनवाला रखा। इसी सरनेम को राकेश ने भी अपनाया। अग्रवाल सरनेम की जगह अपने पिता की तरह वे भी झुनझुनवाला लगाने लगे। राकेश झुनझुनवाला और उनके छोटे भाई राजेश झुनझुनवाला के परिवार झुंझुनूं से किसी न किसी बहाने जुड़े रहे। यही कारण था कि परिवार अक्सर कुलदेवी राणी सती के दर्शन के लिए यहां आता रहता था।

राकेश झुनझुनवाला का रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उनका पैतृक गांव झुंझुनूं के पास मलसीसर है।
राकेश झुनझुनवाला का रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उनका पैतृक गांव झुंझुनूं के पास मलसीसर है।

7 महीने पहले आया था परिवार
7 महीने पहले जनवरी-फरवरी में राकेश की पत्नी रेखा, छोटा भाई राकेश और उनका परिवार झुंझुनूं आया था। यहां राणी सती मंदिर में दर्शन किए थे। श्रीराणी सती मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सीए मनीष अग्रवाल ने बताया कि राकेश भी एक बार मंदिर आए थे। झुनझुनवाला परिवार हर साल मंदिर की वार्षिक पूजा में शामिल होता है। राणी सती माता अग्रवालों की कुल देवी है।

झुंझुनूं का राणी सती मंदिर, यहां हर साल आता है झुनझुनवाला परिवार। यह उनकी कुलदेवी भी हैं।
झुंझुनूं का राणी सती मंदिर, यहां हर साल आता है झुनझुनवाला परिवार। यह उनकी कुलदेवी भी हैं।

जिस हवेली को बेचा, आज वहां मार्केट
सेठ मोतीलाल कॉलेज के सचिव जीएल शर्मा बताते हैं कि झुनझुनवाला के परिवार की करीब 70-80 साल यहां पहले हवेली हुआ करती थी। जिसे केडिया परिवार को बेच दी थी। अब उस जगह केडिया मार्केट बना है। अब उनकी झुंझुनूं में कोई संपत्ति तो नहीं है, लेकिन परिवार का जुड़ाव काफी है। 10-15 दिन पहले ही राकेश के भाई राजेश झुनझुनवाला डूंडलोद आए थे।

राकेश झुनझुनवाला के पिता राधेश्याम झुनझुनवाला (कुर्सी पर बैठे) 15 फरवरी 2011 को जेजेटी यूनिवर्सिटी की नींव रखने के लिए झुंझुनूं आए थे।
राकेश झुनझुनवाला के पिता राधेश्याम झुनझुनवाला (कुर्सी पर बैठे) 15 फरवरी 2011 को जेजेटी यूनिवर्सिटी की नींव रखने के लिए झुंझुनूं आए थे।

2011 में पिता के साथ आए थे झुंझुनूं
राकेश झुनझुनवाला का झुंझुनूं की जेजेटी यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रहा। पिता राधेश्याम झुनझुनवाला के साथ यूनिवर्सिटी की नींव रखने के लिए 15 फरवरी 2011 को राकेश भी झुंझुनूं आए थे। राकेश झुनझुनवाला का टीबड़ेवाला परिवार में ननिहाल है।

जेजेटी यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. विनोद टीबड़ा ने बताया कि राधेश्याम झुनझुनवाला ने यूनिवर्सिटी में मदद करने की बात कही थी। झुनझुनवाला परिवार झुंझुनूं के डूंडलोद में ट्रस्ट के जरिए लोगों की मदद करता है।

2011 में राकेश झुनझुनवाला झुंझुनूं आए थे। तब वे डूंडलोद में विद्यापीठ ट्रस्ट के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
2011 में राकेश झुनझुनवाला झुंझुनूं आए थे। तब वे डूंडलोद में विद्यापीठ ट्रस्ट के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

भाई राजेश संभालते हैं मोतीलाल ट्रस्ट
राकेश के भाई राजेश झुनझुनवाला सीए हैं। वे मुंबई के मोतीलाल ट्रस्ट के सभी शिक्षण संस्थाओं का काम देखते हैं। ट्रस्ट का झुंझुनूं में भी सेठ मोतीलाल कॉलेज है। कॉलेज के सचिव जीएल शर्मा ने बताया कि राजेश लगातार डूंडलोद आते हैं। डूंडलोद झुंझुनूं शहर से 25 किलोमीटर दूर है। यहां डूंडलोद विद्यापीठ ट्रस्ट के जरिए झुनझुनवाला परिवार चैरिटी करता है।