जगदीप धनखड़ बने नए उपराष्ट्रपति:सैनिक स्कूल में पढ़े धनखड़ की इच्छा फौजी बनने की थी, उपराष्ट्रपति धनखड़ के सहपाठी ने साझा कीं यादें

झुंझुनूं2 महीने पहलेलेखक: मोहम्मद मुस्लिम
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झूंझनूं जिले के किठाना गांव में हवेली, जहां धनखड़ का बचपन बीता। - Dainik Bhaskar
झूंझनूं जिले के किठाना गांव में हवेली, जहां धनखड़ का बचपन बीता।

निर्वाचित उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जन्म राजस्थन के झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में 18 मई 1951 को एक किसान परिवार में हुआ। सुप्रीम काेर्ट में जानेमाने वकील धनखड़ के उपराष्ट्रपति चुने जाने पर शनिवार को झुंझुनूं से जयपुर व दिल्ली तक जश्न का माहाैल रहा। सजाए गए किठाना में आतिशबाजी कर मिठाई बांटी गई। इससे पहले जीत के लिए ग्रामीणों ने गांव के मंदिर में यज्ञ-हवन भी किया। एडवाेकेट जगदीप धनखड़ की प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में ही हुई।

छठी कक्षा की पढ़ाई के लिए गांव से चार किलोमीटर दूर घरड़ाना गांव के स्कूल में उनकाे दाखिल दिलाया गया। करीब एक वर्ष यहां पढ़ने के बाद उनका सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में प्रवेश हो गया। वे बड़े भाई कुलदीप धनखड़ के साथ चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल में पढ़ने चले गए। सैनिक स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद धनखड़ ने महाराजा कॉलेज जयपुर से बीएससी ऑनर्स से स्नातक और राजस्थान विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई की। सेना में जाना चाहते थे, लेकिन नजर कमजोर होने की वजह से नहीं जा पाए। धनखड़ की पत्नी डॉ. सुदेश किठाना में सिलाई, कढ़ाई-बुनाई सेंटर चलाती हैं। बहू-बेटियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है।

बचपन से ही गलत बात के विरोध की आदत थी

हरदयालसिंह राव सहपाठी (घरड़ाना)
हरदयालसिंह राव सहपाठी (घरड़ाना)

जगदीप में बचपन से ही गलत बात का प्रतिराेध करने की प्रवृत्ति रही है, एक बार शिक्षक ने ब्लैक बोर्ड पर बतौर उदाहरण अंग्रेजी में राम और श्याम लिखा। इसमें राम का पहला अक्षर कैपिटल और श्याम का पहला अक्षर स्माॅल लिख दिया। इस पर जगदीप ने तुरंत ही शिक्षक को उनकी भूल बताई, तब हम छठी कक्षा में पढ़ते थे। उनकी लिखावट भी बहुत सुंदर होती थी। हम उनकी ही काॅपी लेते थे।

एड. नवरंगलाल टीबड़ेवाल (झुंझुनूं) वकालत के गुरु
एड. नवरंगलाल टीबड़ेवाल (झुंझुनूं) वकालत के गुरु

जगदीप ने 1978 के बाद मेरे पास 6 साल तक हाई काेर्ट में जूनियर के रूप में वकालत की। जगदीप के चाचा किठाना गांव के सरपंच रहे चौधरी हरबंश धनखड़ उन्हें मेरे पास वकालत के लिए लाए थे। वह मुवक्किलों से जल्द ही आत्मीय रिश्ता बना लेते थे। हमारा कार्यालय हीराबाग जयपुर में था। कुशाग्र बुद्धि धनखड़ की अंग्रेजी में अच्छी पकड़ है। कोर्ट में वह केस की पूरी तैयारी करके जाते थे।