कुरकुरे दिलाने के बहाने दरिंदगी:मासूम से दरिंदगी के प्रयास के आराेपी काे घटना के 64 दिन में ही दस साल की सजा

झुंझुनूं9 दिन पहले
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रतनलाल - Dainik Bhaskar
रतनलाल

जिले के डूमाेली खुर्द में घर के बाहर बच्चाें के साथ खेल रही मासूम काे कुरकुरे दिलाने के बहाने ले जाकर दरिंदगी का प्रयास करने के आराेपी आंबेडकर नगर विहार (डाबला) निवासी रतनलाल काे पाेक्साे काेर्ट ने दस साल की सजा सुनाई है। आराेपी पहले भी इसी तरह के एक मामले में दस साल की सजा काट चुका है। कोर्ट ने यह फैसला वारदात के 64 दिन में ही सुना दिया। घटना 4 मार्च काे हुई थी।

आराेपी रतनलाल पुत्र सरदारराम बच्ची को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया था। दरिंदगी की काेशिश की लेकिन गांव की महिलाओं को देखकर छाेड़ कर भाग गया। पुलिस ने आराेपी को दूसरे ही दिन गिरफ्तार कर लिया था और पांचवें दिन पाेक्साे कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। न्यायाधीश ने आराेपी रतनलाल काे दस साल कैद व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर 30 दिन कारावास की सजा के आदेश दिए।

पांच दिन में चालान पेश, पुलिस केस ऑफिसर स्कीम में शामिल किया, इसलिए 64 दिन में सजा

मामले काे गंभीरता से लेते हुए सिंघाना थाना पुलिस ने आराेपी आंबेडकर नगर विहार (डाबला) निवासी रतनलाल मेघवाल के खिलाफ पांच ही दिन में 9 मार्च काे चालान पेश कर दिया था। आराेपी के खिलाफ 22 गवाह और 300 दस्तावेज पेश किए गए। पुलिस ने 315 पेज की चार्जशीट में आरोपी के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड को भी आधार माना है, जिसमें उसने करीब 15 साल पहले सात साल की मासूम को दुष्कर्म के बाद कुएं में धकेला था। उस दुकानदार को प्रमुख गवाह बनाया, जिससे आरोपी ने मासूम काे साथ ले जाकर कुरकुरे व टॉफी खरीदी थी।

2007 में भी आराेपी ने मासूम से दुष्कर्म कर कुएं में धकेला था, तब भी हुई 10 साल कैद

रतनलाल 31 जनवरी, 2007 काे अपने गांव विहार डाबला से 7 साल की मासूम काे शाम के समय घर के बाहर से उठाकर ले गया था। उसे खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया और कुएं में धकेल दिया। उस समय रतनलाल भी ग्रामीणाें के साथ मासूम काे तलाशने का नाटक करता रहा। रातभर तलाश जारी रही। तड़के करीब 4 बजे रतन गायब हो गया। तब पुलिस ने शक के आधार पर उसे पकड़ा।

करीब 14 घंटे बाद अगले दिन सुबह साढ़े आठ बजे पुलिस ने उसकी निशानदेही पर मासूम काे सूखे कुएं से जिंदा बाहर निकाल लिया था। उस समय पाटन पुलिस ने आराेपी रतनलाल काे दुष्कर्म, हत्या का प्रयास, अपहरण के मामले में गिरफ्तार कर चालान पेश किया था। जिस पर 9 अक्टूबर, 2007 काे एडीजे नीमकाथाना ने उसे 10 साल की सजा सुनाई थी। सजा काटकर रतनलाल 2017 में जेल से बाहर आया था। वह शादी समाराेह में बर्तन साफ करने का काम करता था। डूमाेली खुर्द में भी वह शादी में बर्तन साफ करने गया था।

इन्हाेंने पहुंचाया आराेपी काे सलाखाें के पीछे

1. आराेपी काे सजा दिलाने में सिंघाना थानाधिकारी भजनाराम की भी अहम भूमिका रही है। उन्हाेंने आराेपी काे गिरफ्तार कर उसके खिलाफ पांच ही दिन में काेर्ट चालान पेश किया। पुलिस केस ऑफिसर स्कीम में इस मामले काे लेकर लगातार माॅनीटरिंग की। गवाहाें काे स्वयं लेकर आए। आराेपी का पुराना आपराधिक रिकाॅर्ड भी न्यायालय में पेश किया।

2. आराेपी काे जल्द सजा दिलाने के लिए विशिष्ट लाेक अभियाेजक लाेकेंद्र सिंह शेखावत ने मामले में फास्ट ट्रायल के लिए काेर्ट से आग्रह किया। नियमित सुनवाई के लिए गवाहाें काे पुलिस के माध्यम से काेर्ट तक पहुंचाया। सभी गवाहाें के बयान कराए तथा आराेपी के पुराने आपराधिक रिकाॅर्ड काे पेश कर कठाेर सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

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