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  • Today, Even After 14 Years, I Have Not Forgotten, It Was A Big Challenge To Get The Hostages Out Safely, My Batchmate Major Sandeep Unnikrishnan Gave His Martyrdom.

मुंबई अटैक 26/11:आज 14 साल बाद भी नहीं भूले, बंधक बनाए लाेगाें काे सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनाैती था, मेरे बैचमेट मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने शहादत दी

झुंझुनूं2 महीने पहले
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मुंबई की ताज होटल में आतंकी हमले की आज 26/11 की बरसी है। उस आतंकी हमले की घटना को देश-दुनिया शायद ही भूल पाए। हाेटल में घुस आए आतंकियों ने लाेगाें काे ढाल बना लिया था। ऐसे में हमारे सामने लाेगाें काे सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनाैती थी। मेरे साथी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन इस एनएसजी कमांडो ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। हमने आतंकियों का डटकर सामना किया।

ऑपरेशन को लीड कर रहे संदीप का एक-एक टास्क महत्वपूर्ण था। हम 14 बंधकों को आतंकियों के चंगुल से बचाने में कामयाब हुए लेकिन इस ऑपरेशन में संदीप शहीद हो गए थे। इस घटना को जब भी याद किया जाता है मेजर संदीप को याद जरूर किया जाता है।

उस दिन संदीप ने साथियों से कहा था कि आप यहीं रुको, मैं ऊपर जाकर संभालता हूं। फायरिंग चल रही थी और संदीप ऊपर जाने के लिए लिफ्ट की तरफ बढ़ने लगे, इस दाैरान ही उनकाे गाेली लगी और वे शहीद हो गए। आतंकी हमले का वह मंजर हम ताउम्र नहीं भूलेंगे। आज भी संदीप हमारी यादों में जिंदा है। -जैसा मेजर हेमंत सिंह ने भास्कर रिपोर्टर मनाेज टांक काे बताया...

विशेष बातचीत : ताज में घुसे आतंकियों काे ढेर करने में झुंझुनूं के मेजर हेमंत सिंह का था अहम याेगदान

फिल्म में भी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन व मेजर हेमंत सिंह
मुंबई ताज हाेटल हमले काे लेकर हाल ही बनी फिल्म मेजर में हमारे जवानों की बहादुरी काे दिखाते हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन व मेजर हेमंत सिंह का भी जिक्र किया गया है। इस ऑपरेशन में मेजर संदीप के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे झुंझुनूं जिले के दूडिय़ा (गुढागाैड़जी) निवासी मेजर हेमंत सिंह शेखावत।

फिल्म में मेजर संदीप के जीवन और ताज ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी दी गई थी। इससे पहले 2020 में बनी वेब सीरीज स्टेट ऑफ सीज में भी मेजर हेमंत सिंह शेखावत की बहादुरी का जिक्र है। इसमें मेजर संदीप की जिंदगी से जुड़ी कई झलकियों को दिखाया गया है। दोनों मेजर बैचमेट थे और 26/ 11 ऑपरेशन का हिस्सा भी रहे।

2015 में सेवानिवृत्ति के बाद अडानी ग्रुप का बने हिस्सा

मेजर हेमंत सिंह 2015 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अडानी ग्रुप से जुड़े थे। अब वे बगड़ के पीरामल ग्रुप के मुंबई में सुरक्षा और एडमिन हैड हैं। इनके परिवार में माता-पिता, पत्नी भावना राठौड़ और दो बच्चे हैं। भावना राठौड़ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बाघसिंह राठौड़ की पुत्री हैं।

कई ऑपरेशनों में भाग ले चुके हैं मेजर हेमंत
मेजर हेमंत सिंह शेखावत का जन्म दूड़िया गांव में कायम सिंह शेखावत के यहां हुआ। स्कूली शिक्षा जयपुर में माहेश्वरी पब्लिक स्कूल व स्नातकोत्तर राजस्थान विश्वविद्यालय से किया। इसके बाद दिल्ली जाकर सेना भर्ती की तैयारी की और साल 2000 में ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी में सिलेक्ट हुए। पहली पोस्टिंग जम्मू बॉर्डर पर ऑपरेशन पराक्रम के समय हुई। इन्फेंट्री यूनिट के साथ नॉर्थ ईस्ट राज्यों तथा यूएन मिशन में कांगो सिविलवार के हालातों में भी सेवा का मौका मिला।

26 नवंबर 2008 को हुआ था मुंबई के ताज होटल में अटैक
पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते आए दस आतंकियों ने मुंबई के ताज होटल सहित कई जगह हमला किया था। ताज में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की जिसमें 160 से ज्यादा लोगों की जान गई और 300 से ज्यादा घायल हुए थे।

बंधक बनाए लाेगाें काे आजाद कराने और आतंकियों काे ढेर करने के लिए सेना ने स्पेशल ऑपरेशन चलाया। मेजर हेमंत सिंह शेखावत भी उसका हिस्सा रहे थे। सेना ने सभी लाेगाें काे आजाद कराया और आतंकियों काे ढेर किया। पाकिस्तान के एक आतंकी कसाब काे जिंदा पकड़ा गया था, जिसे बाद में फांसी दी गई।

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