नवरात्रि विशेष:जिले का एकमात्र करणी माता मंदिर, जहां भक्त उनकी मूर्ति की नहीं बल्कि चरण पादुका की पूजा करते हैं

मथानिया20 दिन पहलेलेखक: महेंद्रसिंह चारण
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करणी माता का मथानिया में जिले का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां उनकी मूर्ति की नहीं बल्कि चरण पादुका की पूजा की जाती है। - Dainik Bhaskar
करणी माता का मथानिया में जिले का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां उनकी मूर्ति की नहीं बल्कि चरण पादुका की पूजा की जाती है।
  • करणी माता का जन्म सुआप गांव में हुआ था, जोधपुर किले की नींव रखने के बाद मथानिया आईं थी माता

जन-जन के आस्था की प्रतीक करणी माता का मथानिया में जिले का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां उनकी मूर्ति की नहीं बल्कि चरण पादुका की पूजा की जाती है। करणी माता की जोधपुर और बीकानेर के ऐतिहासिक किलों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दोनों ही किलों की नींव रखवाने में उनका योगदान है।

कहा जाता है कि एक बार मंडोर प्रवास के समय उनके परमभक्त मथानिया निवासी अमराजी चारण ने उनकी आराधना कर मथानिया में चरण रखने की मन्नत मांगी। चारण राव जोधा के दरबार के राज्य कवि भी थे। उनकी आराधना पर जोधपुर किले की नींव स्थापना के दो दिन बाद मां करणी अमराजी चारण के गांव मथानिया आई।

यहां दो दिन तक रहीं। इस दौरान अमराजी ने मन्दिर बनवाने की प्रार्थना की। उनको गुम्बदाकार की बजाय तिबारेनुमा मन्दिर बनवाने तथा उसमें मूर्ति की जगह चरण स्थापित करने की आज्ञा दी। तब से यहां करणी माता की मूर्ति की बजाय उनके खड़ाऊ अर्थात चरण पादुका का पूजा की जा रही है।

मन्दिर स्थापना के साथ ही यहां अखण्ड ज्योति प्रज्जवलित है। कहा जाता है कि उस दौरान करणी माता ने अमराजी चारण को तीन वरदान दिए थे। महामारी, प्राक्रतिक प्रकोप व एक घर से दूसरे घर में आग नहीं फैलेगी और न कोई नुकसान होगा।

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