बिना चाशनी वाले गुलाब जामुन, CM-शाह भी दीवाने:120 साल पुराना जायका, शेयर की तरह घटती-बढ़ती है रेट

जोधपुर3 महीने पहलेलेखक: पूर्णिमा बोहरा

क्या आपने ऐसा समोसा खाया है जिसमें आलू ही न हो। क्या ऐसी मैगी खाई है जिसमें मसाला ही न हो। तो फिर बिना चाशनी वाले गुलाब जामुन का तो आपने नाम ही नहीं सुना होगा। चलिए आपको बताते हैं। ये है जोधपुर का 120 साल पुराना फेमस जायका चतुर्भुज के गुलाब जामुन। 10 बाई 30 फीट की दुकान में एक शताब्दी से बन रहे इस गुलाब जामुन की डिमांड सात समंदर पार तक है। देश के गृहमंत्री अमित शाह से लेकर खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इसके दीवाने हैं। पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और इरफान पठान सहित कई सेलिब्रिटी भी इसका स्वाद चख चुके हैं। खास बात यह है कि सेंसेक्स की तरह इस मिठाई के भाव रोज बढ़ते घटते हैं। राजस्थानी जायका की इस कड़ी में आपको ले चलते हैं जोधपुर की पुंगलपाड़ा रोड पर जहां मिलते हैं चतुर्भुज के गुलाब जामुन....

दुकान मालिक राहुल अग्रवाल बताते हैं उनकी पुश्तैनी दुकान 1890 से चल रही है। यहां बनने वाले गुलाब जामुन का स्वाद 120 साल में कभी नहीं बदला। इसका राज है सीक्रेट रेसिपी। जिस अनुपात में सामग्री मिलाई जाती थी उसी अनुपात को अभी तक कायम रखा गया है। यहां तक कि गुलाब जामुन के साइज से लेकर सिकाई तक सब लगभग फिक्स रहता है। निचोड़ने पर इनमें चाशनी की एक बूंद तक नहीं टपकती। राहुल इस दुकान को संभालने वाली चतुर्भुज अग्रवाल की पांचवीं पीढ़ी से हैं।

स्टॉक की तरह चेंज होती है रेट
राहुल के पिता रमेश चंद्र बताते हैं कि चतुर्भुज उनके दादा थे। किसी जमाने में गुलाब जामुन 4 रुपए किलो में बेचे जाते थे। अब भाव 480 रुपए है। लेकिन भाव में उतार-चढ़ाव होता रहता है। बिल्कुल सेंसेक्स की तरह। हर दूसरे-तीसरे दिन गुलाब जामुन के दाम आपको अलग मिलेंगे। यह सारा गणित दूध के भाव पर डिपेंड करता है। दूध कम रेट में मिलने पर गुलाब जामुन के दाम भी कम कर दिए जाते हैं। फेस्टिवल और वेडिंग सीजन में दूध महंगा मिलने के कारण दाम भी उसी के अनुसार तय होते हैं।

चाशनी का मैनेजमेंट
रमेशचंद्र बताते हैं कि गुलाबजामुन का पूरा माल उनकी निगरानी में तैयार होता है। गुलाब जामुन आमतौर पर दो प्रकार से बनते हैं। पनीर और मावा। उनके यहां केवल मावा व शक्कर से तैयार करते हैं। बाकी जगहों पर चाशनी एक्स्ट्रा होती है, जो डिब्बे में फैल जाती है। लेकिन यहां सिर्फ उतनी चाशनी मिलाते हैं, जितनी कि गुलाब जामुन के अंदर रहे। मावा भी एक ही भरोसेमंद सप्लायर से दूध लेकर खुद तैयार करते हैं। बनाने में शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है। यही कारण है कि लोग यहां के गुलाब जामुन ज्यादा पसंद करते हैं। भले ही दूसरी दुकानों के मुकाबले दाम ज्यादा हों।

करोड़ों का कारोबार
रमेशचंद्र के अनुसार हर दिन 250 किलो गुलाब जामुन बनाए जाते हैं। रोज नया माल तैयार होता है। एक किलो का भाव 450 से 480 रुपए के बीच रहता है। एक अनुमान के मुताबिक सालाना कारोबार करीब 4 करोड़ रुपए का रहता है। कई नेता जैसे केन्द्रीय गृहमंत्री के लिए जोधपुर के भाजपा नेता यहीं से गुलाब जामुन लेकर जाते हैं। वहीं जयपुर में मुख्यमंत्री निवास पर भी यहीं से गुलाब जामुन जाता है।
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