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मरीजों की फर्जी भर्ती दिखाई, बेच दिए 250 रेमडेसिविर:जिन्हें वाॅरियर्स माना उन्होंने ही बेच डाले प्राणरक्षक इंजेक्शन, MDM अस्पताल के 14 नर्सिंगकर्मी संदेह के घेरे में

जोधपुर2 महीने पहले
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जोधपुर संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज महत्वपूर्ण माने गए रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। महामारी के घोर संकटकाल में जब संक्रमितों के परिजन एक-एक इंजेक्शन के लिए दर-दर भटक रहे थे तब अस्पताल के ही 17 नर्सिंगकर्मी इंजेक्शन की कालाबाजारी में जुटे थे, जिसमें अब तक 14 नर्सिंग स्टाफ इस मामले में पूरी तरह लिप्त होना बताया जा रहा है, वहीं 3 नर्सिंग स्टाफ अभी संदेह के घेरे में हैं।

हैरानी की बात यह है कि यह घोटाला अस्पताल प्रशासन, जिला कलेक्टर द्वारा नियुक्त RAS अफसरों और मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारियों की नाक के नीचे हुआ, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। यह खुलासा मई की शुरुआत में एक मरीज की शिकायत पर गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है। कमेटी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट MDM अस्पताल अधीक्षक को पेश की। इस जांच कमेटी में तीन बार संशोधन हुए और सदस्यों को अंदर-बाहर किया गया। अब एक माह बाद सौंपी रिपोर्ट में भी कमेटी पूरे निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई, क्योंकि कमेटी ने अभी भी पूरे प्रकरण की गहन जांच की आवश्यकता बताई है। कमेटी ने अप्रैल में भर्ती 213 मरीजों को जारी 279 इंजेक्शन की जांच की। इसमें 22 नर्सिंगकर्मियों की जांच की गई थी।

रिपोर्ट के दो मुख्य बिंदु; कई रोगियों को इंजेक्शन जारी तो हुए लेकिन लगे ही नहीं

  • अस्पताल में भर्ती संक्रमितों को रेमडेसिविर जारी किए जा रहे थे। जांच में सामने आया कि कई मरीजों के नाम से इंजेक्शन तो जारी हुए, लेकिन उन्हें लगाए नहीं गए। यह वार्ड इंचार्ज द्वारा पेश की गई सूची में पाया गया।
  • जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कई रोगी तो वार्ड में भर्ती ही नहीं पाए गए, उनके नाम से फर्जी टिकट बनाकर रेमडेसिविर जारी कर उठा लिए गए। कमेटी ने संदिग्ध 17 नर्सेज की सूची रिपोर्ट में पेश की है।

फार्मासिस्ट पर भी संदेह: कमेटी ने लिखा- जांच हो कि उन्होंने किस कर्मचारी को इंजेक्शन दिए
जांच कमेटी को रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी करने वाले DDC काउंटर के फार्मासिस्ट की भूमिका संदिग्ध लग रही हैं। कमेटी ने लिखा है कि DDC फार्मासिस्ट द्वारा किस कर्मचारी को दवा दी गई, इसका सत्यापन होना जरूरी है। ताकि, यह पता चल सके कि कौन गलत है। DDC ​​​​​​पर बैठा फार्मासिस्ट या कर्मचारी? इसके साथ BHT नंबर का भी जिक्र किया गया है, यह एडमिशन लिस्ट में है या नहीं, जिससे कम्प्यूटर की पर्ची और वार्ड में भर्ती मरीज के टिकट भी मिलान हो सकेगा।

इधर, कमेटी खुद असमंजस में- 1 माह बाद रिपोर्ट दी, फिर निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई
मई के शुरूआत में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की शिकायत मिली थी। जिस पर उपअधीक्षक डॉ. पीके खत्री, एक चिकित्सा अधिकारी, और नर्सिंग अधीक्षक की जांच कमेटी बनाई गई। फिर डॉ. खत्री ने स्वास्थ्य कारणों के चलते असमर्थता बताई तो उप अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र गुर्जर को अध्यक्ष बनाया गया। शेष सदस्य वो ही रहे। बाद में कमेटी ने प्राथमिक जांच कर विस्तृत जांच के लिए अधीक्षक को कहा।

इसके बाद अंत में मेडिसिन के डॉ. अरविंद जैन को जांच कमेटी का अध्यक्ष बनाकर कमेटी में जोड़ा गया। जांच फिर शुरू हुई, फाइनल रिपोर्ट देने के बावजूद कमेटी किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई। कमेटी का अभी भी मानना है कि मामले की विस्तृत और गहन जांच की आवश्यकता है।

कुल 22 की जांच, 14 पूरी तरह लिप्त, 3 अभी भी संदेह के घेरे में

  • भरत विश्नोई: अप्रैल में लेबर रूम में ड्यूटी के दौरान 45 मरीजों के लिए 68 इंजेक्शन DDC 8 काउंटर से जारी करवाए।
  • पृथ्वीसिंह: पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड 1 में ड्यूटी के दौरान 21 मरीजों के लिए 22 इंजेक्शन DDC 8 काउंटर से जारी करवाए।
  • दिलीप शर्मा: न्यू गायनी वार्ड में ड्यूटी के दौरान 18 मरीज के लिए 22 इंजेक्शन DDC आठ काउंटर से जारी करवाए।
  • गौरी बंजारा: लेबर रूम में ड्यूटी के दौरान 12 मरीजों पर 20 इंजेक्शन DDC काउंटर 3 और 8 से जारी करवाए।
  • सुमन धाका: पीडिया वार्ड तीन में ड्यूटी के दौरान 16 मरीजों के लिए 16 इंजेक्शन DDC काउंटर 3 से जारी करवाए।
  • कुलदीप: पोस्ट नेटल वार्ड में ड्यूटी के दौरान 11 मरीजों के लिए 12 इंजेक्शन DDC काउंटर 3 से जारी करवाए।
  • मीरा: पीडिया 2 में 8 मरीजों के लिए 13 इंजेक्शन DDC काउंटर 8 से जारी करवाए।
  • संगीता: पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड 2 में ड्यूटी के दौरान 9 मरीजों के लिए 13 इंजेक्शन DDC आठ से जारी करवाए।
  • नरेश: एनआईसीयू और डे-केयर में ड्यूटी के दौरान 7 मरीजों के लिए 10 इंजेक्शन DDC 3 और 8 से जारी करवाए।
  • अरुण: पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड 2 में ड्यूटी के दौरान 7 मरीजों के लिए 9 इंजेक्शन DDC काउंटर 8 से जारी करवाए।
  • निर्मला और सीमा: लेबर रूम में ड्यूटी के दौरान 4 मरीजों के लिए 8 इंजेक्शन DDC काउंटर 8 से जारी करवाए।
  • मूलकांता: लेबर रूम में 8 मरीजों के 9 इंजेक्शन डीडीसी काउंटर 8 से जारी हुए।
  • रेणू: ने सेमिनार हॉल और पोस्ट ऑपरेटिव 1 में ड्यूटी के दौरान 5 मरीजों के लिए 9 इंजेक्शन DDC 8 से जारी करवाए।

ये अभी संदिग्ध

  • प्रेमसिंह: पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड 2 में ड्यूटी के दौरान 6 मरीजों के लिए 6 इंजेक्शन DDC काउंटर 8 से जारी करवाए।
  • सरोज चौधरी: पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड 1 में ड्यूटी के दौरान 7 मरीजों के लिए 7 इंजेक्शन DDC आठ से जारी करवाए।
  • चैनाराम: सेमिनार हॉल में ड्यूटी के दौरान 4 मरीजों के लिए 7 इंजेक्शन DDC काउंटर 8 से जारी करवाए।

डॉक्टर या फार्मासिस्ट का रिपोर्ट में नाम नहीं
जांच कमेटी के सदस्य एव अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र गुर्जर के अनुसार उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में किसी डॉक्टर और फार्मासिस्ट का नाम नही है। सिर्फ 13 तेरह नर्सिंग कर्मियों को ही सस्पेक्ट माना गया है। विस्तृत जांच के लिए और कमेटी भी बन सकती है। रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी करेंगे।

फर्जी मरीजों की भर्ती
आश्चर्य की बात यह है कि जांच कमेटी बनाते समय अस्पताल प्रबंधन ने यह बताया था कि फर्जी मरीजों की भर्ती दिखाकर इंजेक्शन का गड़बड़झाला किया गया है, लेकिन जांच रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े को लेकर कोई महत्वपूर्ण तथ्य नहीं दिए हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए और समय की आवश्यकता है। इसके अलावा किसी फार्मासिस्ट पर संशय नहीं जताया गया है, जबकि नर्सिंगकर्मियों का कहना था कि बिना फार्मासिस्ट की मिलीभगत के इंजेक्शन का गड़बड़झाला नहीं हो सकता। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि अधीक्षक डॉ एमके आसेरी इस प्रकरण में सस्पेक्ट नर्सिंगकर्मियों से उनका पक्ष जानने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से निर्देश लेंगे।

नो बेड-नो रेमडेसिविर
अप्रैल के अंत से मई के पहले पखवाड़े तक जोधपुर में कोरोना चरम पर था। उस समय अस्पतालों में नो बेड की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शनों की मांग भी बहुत अधिक बढ़ गई। बाजार में इनके उपलब्ध नहीं होने के कारण कालाबाजारी बढ़ गई। ब्लैक में ये इंजेक्शन 30 से 50 हजार रुपए तक में बेचे गए। ऐसे में 230 रेमडेसिविर इंजेक्शन का गायब होना बहुत बड़ा घोटाला माना जा रहा है।

MDMH के अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी ने बताया- जांच रिपोर्ट हमें मिल गई है, जिस अब कलेक्टर, कमिश्नर, प्रिंसिपल और डायरेक्टर को आगे की कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।