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डिस्कॉम के अच्छे दिन:25,15,00,000 रु. जमा कर एक भी कनेक्शन नहीं दिया

जोधपुर25 दिन पहले
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  • जोधपुर के 5,030 किसानाें को कृषि कनेक्शन का इंतजार }प्रत्येक ने कम से कम 40-70 हजार की डिमांड राशि जमा करवाई, फिर भी कनेक्शन नहीं

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने व उनकी आय दोगुनी करने का यह सरकारी तरीका गजब है। जिन किसानों ने वर्ष 2012 में सिंचित खेती करने की उम्मीद में बिजली कनेक्शन के आवेदन किए थे, उनके खेत एक दशक बाद भी सूखे पड़े हैं। उलटे वे खुद कर्जदार बन गए हैं। डिस्कॉम ने 5030 किसानों से 251,500,000 रुपए जमा करके एक भी कनेक्शन नहीं दिया। नवम्बर 2020 में नोटिस जारी कर 15 जनवरी तक डिमांड राशि भरवाई।

जिले के 4410 किसानों ने सामान्य श्रेणी, 256 ने अनुसूचित जाति, 364 ने स्पेशल श्रेणी सहित 5030 किसानों ने कृषि कनेक्शन लेने के लिए 50 हजार से दो लाख तक कि राशि जमा करवा रखी है। पांच-आठ माह से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद कनेक्शन नहीं दिए। ऐसे में खरीफ फसल की सीजन भी इंतजार में निकल जाएगी। जबकि वे नलकूप खुदवा चुके हैं। मशीनरी, सिंचाई उपकरणों पर लाखों रुपए खर्च कर कर्जदार बन गए हैं।

स्टील के भाव बढ़े, टाइमिंग का पता नहीं

जोधपुर डिस्कॉम (जोनल) के मुख्य अभियंता इम्तियाज बेग ने बताया कि मांग पत्र जमा होने के बाद जल्दी से जल्दी कनेक्शन का प्रयास करते हैं लेकिन स्टील भाव बढ़ जाने के कारण पूर्व में खरीदे मेटेरियल की सप्लाई में दिक्कतें आ रही। कनेक्शन जारी होने के समय को लेकर कुछ कह नहीं सकते।

किसी ने बैंक तो कोई कर्ज के लिए रिश्तेदारों के पास पहुंचा

1. मथानिया नेवरा रोड के किसान सोनाराम ने 16 जनवरी को मांग पत्र की राशि जमा कराई। इसके बाद नलकूप व उपकरणों पर 7 लाख से अधिक रुपए खर्च किए। अधिकतर रुपए उधार लिए।

2. ओसियां धुंधाड़िया के जेठाराम ने 2012 में कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इस साल 4 जनवरी को डिमांड भरकर ट्यूबवेल खुदवा लिया। कर्जा लेकर पूरी मशीनरी खरीद ली।
3. नेवरा गांव के ही पूनाराम ने 18 दिसंबर 2012 को कृषि कनेक्शन का फार्म भरा था। 11 नवंबर 2020 को 45400 डिमांड भर दिए। नलकूप, तारबंदी व उपकरणों पर 11 लाख रुपए खर्च हो गए।

डिमांड नोट जारी हुए तो लगा कनेक्शन मिल गया मगर कर्ज ही बढ़ा... 10 लाख तक का कर्जा चढ़ा

नवंबर 2020 में डिमांड नोट जारी कर 15 जनवरी 2021 तक राशि जमा कराने को कहा। किसानों ने जल्दी कनेक्शन मिलने की आस में डिमांड राशि जमा करवा दी। मांग पत्र राशि 40 हजार से 70 हजार रुपए थी। इसके बाद ट्यूबेल बनाने में 1.5 लाख से 2.50 लाख रुपए, ट्यूबवेल की मशीनरी पर 3.25 लाख से 4 लाख तक खर्च हुए।

इनके अलावा सिंचाई उपकरणों पर 60 हजार से 80 हजार व मेड़ तार-जाली पर भी 1 लाख से 1.50 रुपए लग गए। प्रति किसान कम से कम 6.75 लाख से 9.50 लाख रुपए के कर्ज तले दब गया। इतने रुपए खर्च करने के बाद भी कनेक्शन नहीं मिले।

31 जुलाई तक 3000 कनेक्शन का आश्वासन, तब तक 32 हजार हेक्टेयर में सिंचाई नहीं, 400 करोड़ का नुकसान

जिले में 5030 कृषि कनेक्शन लंबित है। इन कनेक्शनों के जारी होने में देरी से दो लाख बीघा में सिंचाई नहीं हो सकेगी। ऐसे में सिंचाई की सुविधा के चलते 20 हजार रुपए के प्रति बीघा के फसल उत्पादन का नुकसान संभव है। इस आकलन से जिले 400 करोड़ के फसल का नुकसान है। साथ ही 25 हजार लोगों की उम्मीदों पर भी पानी फिर जाएगा। हालांकि 24 जून को किसान संघ के साथ वार्ता में अधिकारियों ने 31 जुलाई तक 3000 कनेक्शन जारी करने का आश्वासन दे रखा है।

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