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अंजाम तक पहुंचा आतंक:शहर के 3 युवक आतंकी करार, एक के पिता बोले- फैसला मंजूर

जाेधपुरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

जोधपुर के तीन युवकों बरकत, मोहम्मद साकिब अंसारी और अशरफ अली को 7 साल पुराने मामले में बुधवार को आतंकी करार दिया गया। ये तीनों सीकर के मारूफ के मार्फत जोधपुर में स्लीपर सेल तैयार करने और आतंकियों के लिए साजो-सामान जुटाने व रैकी करने का काम कर रहे थे। वहीं, शहर के मसरत इकबाल को बरी किया गया। मार्च 2014 में इंडियन मुजाहिदीन का जोधपुर मॉड्यूल पकड़ में आया था।

आतंकियों के इस स्लीपर सेल ने देश में दहशत फैलाने के लिए हमलों की प्लानिंग, बम बनाने की प्रैक्टिस, रैकी और विदेशी पर्यटकों पर हमलों की साजिश व इसके प्रयास का सिलसिला चला दिया। जोधपुर को इसका केंद्र बनाया गया और आतंकी तहसील अख्तर उर्फ मोनू को भी जोधपुर में छुपाया गया था। आतंकियों के इस नेटवर्क में जोधपुर शहर के कुछ युवा भी शामिल हो चुके थे।

पिता ने कहा था- साकिब दाेषी निकला ताे मैं सख्त सजा मांगूंगा
प्रतापनगर बरकतुल्लाह कॉलोनी निवासी मोहम्मद असलम अंसारी से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस पर क्या कहूं। कोर्ट का फैसला मंजूर है। बाकी इस पर कुछ कहने जैसा नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मार्च 2017 में साकिब के पकड़े जाने पर उसके पिता अंसारी ने कहा था कि ‘जांच में मेरा बेटा साकिब दोषी साबित होता है, तो मैं खुद कानून से सख्त सजा देने की मांग करुंगा।

अशरफ अली खान-त्रिपोलिया में ऑफिस को आतंकियों का अड्डा बनाया-
लायकान निवासी अशरफ पुत्र साबिर अली पठान जोधपुर में आतंकियों का प्रमुख साथी बना। त्रिपोलिया स्थित हीरा गोल्ड ऑफिस 2 साल आतंकियों का अड्‌डा बना रहा। यहां मारूफ, अमार, वकार, अजहर आते और रुकते थे। दिसंबर 2012 में यहीं आतंकियों ने जोधपुर में पर्यटकों पर चाकू से हमले की प्लानिंग की थी। अशरफ को जोधपुर का अमीर नियुक्त किया था। इसके लिए दो टीमें बनाई, जिनमें एक में साकिब व इकबाल, तो दूसरी में मोहम्मद जावेद व बरकत को शामिल किया था।

इन्होंने घंटाघर, नई सड़क व मेहरानगढ़ में पर्यटकों को चाकू मारने के प्रयास भी किए थे। अशरफ व साकिब ने इंडियन मुजाहिदीन का नेटवर्क तैयार किया और उन्हें मंडोर में शपथ दिलाई। अशरफ और साकिब ने ही इकबाल भटकल के निर्देश पर तहसील अख्तर उर्फ मोनू को जोधपुर के चौहाबो पहला पुलिया सोमानी कॉलेज के निकट क्षेत्र में एक मकान में पनाह दी थी। बाद में उसे जोधपुर से बाहर भेज दिया गया।

मो. साकिब अंसारी- कंप्यूटर जानकार, भटकल ने कहा तो फोन-सिम खरीदे-
प्रतापनगर थानांतर्गत बरकतुल्लाह कॉलोनी निवासी मो. साकिब अंसारी पुत्र मो. असलम अंसारी कंप्यूटर का जानकार था। आतंकी रियाज भटकल के कहने पर साकिब ने मारूफ के लिए 12 जून 2013 को भटकल के भेजे फर्जी दस्तावेज से फोन व सिम खरीदा। भदवासिया में जहां से फोन व सिम खरीदे, वहीं पर एक्टिवेट कर इकबाल के मार्फत यह सिम जयपुर में वकार के पास भेजा। वहां से मारूफ तक पहुंचा।

इसी तरह, भटकल ने नागौर के देवेंद्र नाम का फर्जी मतदाता परिचय पत्र साकिब को भेजकर एक और सिम खरीदने को कहा था। साकिब ने रातानाडा चौराहा से यह सिम ले ली। इसे लेने के लिए वकार जोधपुर आया। यही सिम मोनू के पास पहुंचने के बाद यासीन भटकल की पत्नी जाहिदा के पास पहुंच गया था। वकार ने भी पाकिस्तान से मिले फर्जी परिचय पत्र से नागौर के राजेंद्र के नाम से सिम व डाटा कार्ड जयपुर से खरीदे और साकिब को सौंप दिए। साकिब यही सिम से बात करता था।

बरकत अली: जिहाद के नाम पर चंदा जुटाता, बम टेस्ट किए-
शांतिप्रिय नगर हाजी स्ट्रीट निवासी बरकत अली पुत्र लियाकत अली तेली कंस्ट्रक्शन ठेकेदारी करते आतंकियों के संपर्क में आया था। उसे आकाओं ने आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा देने का काम दिया गया। रियाज के कहने पर मारूफ ने जिहाद का चंदा एकत्र करना शुरू किया। अशरफ व साकिब ने रसीदें छपवाकर भेजी। आतंकियों के निर्देश पर साकिब के साथ बरकत ने भी ताजमहल व लाल किले की रैकी की थी।

मोनू से साकिब को बम बनाने की ट्रेनिंग मिली। उसके साथ बरकत ने पाल शिल्पग्राम की फैक्ट्री और गंगाणा में बम के परीक्षण किए थे। बरकत के पकड़े जाने के बाद पिता ने पुलिस को बताया था कि वो दोस्तों के साथ चंदा जुटाता था। किस काम के लिए चंदा कर रहा था, इसका पता नहीं था। जबकि, वो इससे दो-तीन साल पहले से पाक आतंकी वकास के संपर्क में था। उसी ने साकिब के घर विस्फोटक पहुंचाए थे।

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