पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

8 दिन में एक परिवार के 4 लोगों की मौत:पहले बड़े बेटे की मौत हुई, 8वें दिन एक घंटे में छोटे बेटे और माता-पिता ने दम तोड़ा; अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं मिली जगह

जोधपुर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
पांच बच्चों के सिर से उठा पिता का साया। - Dainik Bhaskar
पांच बच्चों के सिर से उठा पिता का साया।

कोरोना के कहर ने एक परिवार को पूरी तरह से बिखेर दिया। आज ऐसे ही एक परिवार कहानी सामने आई है। इसमें 11 साल का रितेश अपने पिता चेतन प्रकाश के कोरोना से निधन के बाद अपनी मां डिंपल के आंसू पोंछ रहा है। बोल रहा है कि तू चिंता मत करो मां। मैं हूं ना।

नांदड़ी में रहने वाले इस परिवार पर दुख का पहाड़ ऐसा टूटा कि पहले बड़े बेटे जुगल प्रजापत और फिर 32 साल के छोटे बेटे चेतन की मौत हो गई। बाद में 69 साल के बंशीलाल प्रजापत व 68 साल कमलादेवी भी कोरोना से चल बसे। अब घर के हालात ऐसे हैं कि गुजारा करना भारी पड़ रहा है।

जुगल का निधन 24 अप्रैल को हुआ, लेकिन गत 1 मई को महज एक-एक घंटे के अंतराल में माता-पिता और पुत्र तीनों खत्म हो गए। श्मशान में एक साथ तीन कोरोना संक्रमित बॉडी आने पर उन्हें अंतिम संस्कार की जगह नहीं मिली। जिस चिता पर पिता का दाह संस्कार हुआ। उसी पर बेटे का अंतिम संस्कार किया। मां के लिए जगह नहीं बची तो पत्थर लाकर उस पर लकड़ियां रखकर अंतिम संस्कार किया गया।

एक तरफ बड़े भाई की चिता जल रही थी, दूसरी तरफ छोटे भाई की तबीयत खराब हुई
24 अप्रैल को जब कोरोना संक्रमित जुगल का दाह संस्कार हो रहा था। उसी दिन छोटे भाई चेतन की तबीयत खराब हो गई थी। इसलिए वो बड़े भाई की अंतिम यात्रा भी नहीं जा सका। तबीयत खराब हाेने पर उसे घरवाले AIIMS लेकर गए, जहां एक मई को उसने अंतिम सांस ली। इधर 30 अप्रैल को दोनों के माता-पिता बंशीलाल व कमलादेवी की तबीयत खराब हुई। उन्हें 30 अप्रैल को एमजीएच में भर्ती करवाया, लेकिन एक मई को दोनों खत्म हो गए।

बेड भी नहीं मिला

30 अप्रैल को बंशीलाल और कमला की एक साथ तबीयत खराब होने पर एमजीएच लाया गया। जहां उन्हें पांच घंटे बैठे रहने के बाद शाम साढ़े चार बजे वार्ड में भर्ती कर बेड दिया गया और पंद्रह घंटे बाद एक मई को सुबह करीब साढ़े आठ बजे उनकी मौत हो गई। माता-पिता से एक घंटे पहले छोटे बेटे चेतन की मौत हो गई।

घर में अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं
प्राइवेट जॉब करने वाले चेतन और जुगल की पत्नियों के पास घरवालों के अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं थे। इस दौरान परिजनों और मित्रों ने चंदा करके अंतिम संस्कार की सामग्री मंगवाई। इसके बाद इन लोगों ने सोमवार को चारों की अस्थियां लेकर जुगल का 12 साल का बेटा जय अपनी बुआ नीतू के साथ हरिद्वार गया। जहां से वे मंगलवार देर शाम को जोधपुर पहुंचे।

पीछे बचे बच्चे और मृतकों की विधवा
परिवार में बंशीलाल व कमला के दुनिया चले गए, लेकिन जुगल के निधन के बाद उनकी पत्नी संतोष, 14 साल का बेटा राहुल, 11 साल की बेटी वंदना व 12 साल का बेटा जय का कोई नहीं बचा है। वहीं छोटे भाई चेतनप्रकाश की पत्नी डिंपल और 11 साल का बेटा रितेश व 7 साल की बेटी विदया बचे हैं। अब परिवार में भी इनको संबल देने वाला भी कोई नहीं। डिंपल कहती है कि किराए के मकान और बच्चों की पढ़ाई के अलावा परिवार के बिना अकेले जीवन गुजारना उनके लिए मुश्किल हो गया है।

किस किसको संभालता
बंशीलाल के भतीजे तुलछीराम प्रजापत का कहना है कि चेतन की मौत हुई तो तीये के दिन उसकी पत्नी डिंपल को बताया कि उसके पति की मौत हो गई है। इससे पहले उसको यही बताया गया था कि उसके सास-ससुर की डेथ हुई है। उसका पति जिंदा है।

बंशीलाल की बेटी अन्नुदेवी का कहना है कि परिवार खत्म हो गया। सरकार ने कोई राहत नहीं दी। बमुश्किल परिवार व मित्रों द्वारा इनकी मदद की जा रही है, लेकिन वो भी कितना और कब तक करेंगे। इसलिए प्रशासन भी इनकी मदद करे।

खबरें और भी हैं...