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  • 60% Of The Father's Lungs Were Infected, Both Daughters Were At The Heart Of The Hospital At Every Moment Of Life, Recovered From Positivity And Hustle And Brought Home

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:पिता के 60% फेफड़े संक्रमित हाे चुके थे, दाेनाें बेटियां जिंदगी दांव पर लगा अस्पताल में हर पल साथ रहीं, सकारात्मकता व हाैसले से ठीक कराकर घर लाईं

जोधपुर4 महीने पहलेलेखक: नरेश आर्य
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ऋचा और श्रुति अपने पापा के साथ। - Dainik Bhaskar
ऋचा और श्रुति अपने पापा के साथ।
  • गंभीर बीमारियाें से पीड़ित 67 वर्षीय बुजुर्ग ने बेटियों की मदद से कोरोना को दी मात

डायबिटीज व हृदयरोग से पीड़ित 67 साल के रिटायर्ड इंजीनियर पिता का कोरोना पाॅजिटिव होना और सीटी स्कोर 17 आना उनकी दो बेटियों को झकझोरने वाला था। क्रिटिकल कंंडीशन में पहुंचने के बावजूद इन दो बेटियों ने हिम्मत नहीं हारी और खुद के पॉजिटिव होने के डर को भुलाकर लगातार 8 दिन तक हॉस्पिटल में उनके पास रहकर उनकी सेवा की और हौंसले से कोरोना पर जीत दिलाकर पिता को घर लेकर लौटीं। इस दरम्यान दोनों बेटियों ने अपने चार बच्चों को घर पर ही रखा।

संयोग यह भी था, जिस दिन पिता घर आए तब दोनों बेटियों की शादी की सालगिरह और छोटी बेटी का बर्थ डे भी था। इन बेटियों के संघर्ष की यह कहानी हमें हिम्मत और बहादुरी के साथ यह सीख देती है कि बीमारी चाहे कितनी बड़ी हो, अगर उससे हौसले और सकारात्मकता के साथ लड़ा जाए तो हराया जा सकता है।
छह अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद सातवें अस्पताल ने किया एडमिट

माणकचौक निवासी धर्मनारायण राजपुरोहित रेलवे से रिटायर्ड इंजीनियर हैं। उनकी पत्नी आशा का 2009 में निधन हो चुका है। उनके केवल दो बेटियां ऋचा व श्रुति हैं। ऋचा बताती हैं, कि पापा को 18 अप्रैल को सूखी खांसी शुरू हुई। अस्पताल में चैक कराया। उसी दिन कोरोना का सैंपल दे दिया, जिसकी रिपोर्ट अगले दिन आई, जो पॉजिटिव थी। दोनों बहनें डर गईं। परिचित की सलाह पर 21 अप्रैल को करवाए सीटी स्कैन में स्कोर 0 आया तो राहत की सांस ली। 6 दिन बाद 27 अप्रैल को ऑक्सीजन लेवल 83 तक पहुंच गया।

सुबह 4 बजे पिता को लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए। सबसे पहले एम्स पहुंचे, लेकिन वहां वेटिंग लंबी होने की वजह से एडमिट नहीं किया। खूब मन्नतें भी कीं, लेकिन काम नहीं आई। इसके बाद एमडीएम, एमजीएच, गोयल, मेडिपल्स व श्रीराम अस्पताल गए, सब जगह निराशा हाथ लगी। अंत में कमला नगर अस्पताल पहुंचे तो सौभाग्य से गैलरी में जगह मिल गई।

गुजरात से मंगाए रेमडेसिविर
फेफड़े के संक्रमण को ठीक करने के लिए डॉक्टर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए कहा, 2 दिन तक घूमे, लेकिन कहीं नहीं मिले। अहमदाबाद में मेरे मौसाजी भी कोरोना पीड़ित थे। उनके लिए मंगाए गए 2 रेमडेसिविर काम नहीं आने पर जोधपुर से गाड़ी भेजकर मंगाए।

दामाद ने घर पर बच्चों को संभाला
सीटी स्कैन का स्कोर 17 आया, इससे हम हिल गए थे। पापा के 60% से भी ज्यादा फेफड़े संक्रमित हो चुके थे। मेरे जीजाजी की डेथ हो चुकी है, इसलिए दोनों बहनों के बच्चे मेरे पति के पास ही थे। मेरी दोस्त सीमा अग्रवाल खाना भेजती थी।

गानों-किताबों से सकारात्मक माहौल बनाया
ऋचा कहती है, कि ब्लूटूथ स्पीकर, कैटली, नेबुलाइज करने का सामान तथा किताब महासमर मंगा ली थी। उन्हें गिलोय के पानी के साथ-अजवायन के पानी की भाप देते। म्यूजिक सुनाती। ऑक्सीजन लेवल 85 आता, पापा पूछते तो हम 92-93 बताते। उनमें कॉन्फिडेंस आता।



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