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शहर में दूसरा गैस चलित शवदाह गृह:75 लाख रुपए से शहर में दूसरा गैस शवदाह गृह बनेगा, निविदा दर पर सहमति बनी तो दिवाली तक शुरू होगा

जोधपुर21 दिन पहले
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कोरोना दूसरी लहर में संक्रमित शवाें के दाह संस्कार में आई दिक्कतों के बाद निर्णय। - Dainik Bhaskar
कोरोना दूसरी लहर में संक्रमित शवाें के दाह संस्कार में आई दिक्कतों के बाद निर्णय।

शहर में दूसरा गैस चलित शवदाह गृह जल्द स्थापित होगा। सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर में शवों के दाह संस्कार को लेकर आई दिक्कतों को देखते हुए गैस चलित शवदाह गृह के लिए 75 लाख रु. स्वीकृत कर उत्तर नगर निगम को नोडल एजेंसी बनाया है। निगम ने निविदा जारी की, लेकिन तय समय में इसमें एक फर्म ही शामिल हुई। फर्म के ज्यादा दर देने से निविदा को निरस्त कर दिया। उत्तर निगम जल्द ही दूसरी इच्छुक फर्मों से निविदाएं मांगेगा। निगम अफसरों का मानना है कि अगर इस बार उचित दर आती है तो दिवाली के पहले जोधपुर में गैस आधारित शवदाह गृह तैयार हो जाएगा।

चिताएं कम पड़ गई थीं, एकमात्र गैस शवदाह गृह की भी क्षमता थी

कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित शव के दाह संस्कार को लेकर परिजन व समाज भयभीत नजर आए। कुछ समाज ने तो कोरोना संक्रमित शव को जलाने की भी पाबंदियां तय कर दी थी। हिंदू सेवा मंडल सहित कुछ समाज ने तो अतिरिक्त चिता स्थल भी तैयार किए, लेकिन मौतों के आगे यह भी कम पड़ने लगे थे। ऐसे में शहर में एक-दो और गैस आधारित शवदाह गृह होते तो यह दिक्कत नहीं आती।

ओसवाल माेक्षधाम में गैसचलित

ओसवाल माेक्षधाम में 35 लाख में गैसचलित शवदाह गृह स्थापित हुआ था। जिसमें मशीन, गैस कंटेनर, ट्राॅली और उसका बेस आदि शामिल हैं। इसमें 10 बर्नर लगे हैं। कोरोना की पहली व दूसरी लहर में प्रशासन ने यहां सैकड़ों संक्रमित शवों का दाह संस्कार करवाया। हालांकि एक दिन में 7 या 8 दाह संस्कार ही हाे पाने से दूसरे शवदाह गृह की जरूरत महसूस की गई थी। इसे लेकर प्रशासन ने राज्य सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखा था।

पारंपरिक रूप से लकड़ियों से दाह संस्कार के लिए 350-400 किलो लकड़ियों की जरूरत पड़ती है। इसका खर्च कम से कम 4 से 5 हज़ार के बीच पड़ता हैं। यही दाह संस्कार गैस आधारित शवदाह गृह में हो तो 400-500 रुपए में ही संभव है।

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