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25 एमएलडी के प्लांट की तैयारी:जोधपुर में टेक्सटाइल उद्योगों के लिए 200 करोड़ लागत से बनेगा नया ट्रीटमेंट प्लांट

जोधपुर6 दिन पहलेलेखक: मनोज कुमार पुरोहित
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  • नई संस्था गठित व नए सीईटीपी के सदस्य और सदस्यता शुल्क का निर्णय शीघ्र

जोधपुर में टेक्सटाइल उद्योगों के लिए 200 करोड़ की लागत से नया ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। विश्व में इस बार पर्यावरण दिवस की थीम रिस्टोरेशन ऑफ इको सिस्टम दिया गया। जोधपुर के उद्योगों द्वारा निस्तारित किए जाने वाले अनुपचारित या प्राथमिक उपचारित पानी में अंतिम ट्रीटमेंट कर इसे कृषि या स्वयं उद्योगों की ओर से काम में लिया जाकर राजस्थान व जोधपुर के बिगड़ते इको सिस्टम को किस तरह संरक्षित किया जाए।

इस विषय में पहल करते हुए जोधपुर पॉल्यूशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (पूर्व की जोधपुर प्रदूषण निवारण ट्रस्ट) की मांग पर राजस्थान सरकार एक नए कॉमन इफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थापना करेगी। राज्य सरकार ने एक कॉरपस फंड की स्थापना करते हुए इस प्लांट के लिए 200 करोड़ की अनुमानित लागत को देखते हुए 50 करोड़ रुपए की ग्रांट का प्रावधान किया है।

शेष फंड के लिए जाेधपुर पॉल्यूशन एंड रिसर्च फाउंडेशन व संबंधित कंपनी की आगामी बैठकों में तय किया जाएगा। नए सीईटीपी के सदस्य व सदस्यता शुल्क का निर्णय शीघ्र किया जाएगा। नए कॉमन इफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट की तैयारियां शुरू करते हुए जोधपुर पॉल्यूशन कंट्रोल एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से एक नई उप संस्था के रूप में नई कंपनी का गठन किया जा रहा है। जोधपुर टेक्सटाइल हैंड प्रोसेसर्स एसोसिएशन की अनुशंसा पर जोधपुर पॉल्यूशन कंट्रोल एंड रिसर्च फाउंडेशन (जेपीआरएफ) की ओर से कमेटी का गठन किया गया है।

फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर की ओर से जारी इस आदेश में मारवाड़ टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव श्रीकांत शर्मा को संयोजक बनाया गया है। नई संस्था का नाम मारवाड़ पॉल्यूशन कंट्रोल फाउंडेशन रखा है। वर्तमान में जेपीआरएफ का कॉमन इफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट सांगरिया में स्थापित है, जिसकी क्षमता 20 एमएलडी है।

इस प्लांट से जोधपुर शहर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की टेक्सटाइल व स्टील इंडस्ट्रीज के प्राथमिक उपचारित पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। इसकी क्षमता कम होने के मद्देनजर नया ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। यह प्लांट केवल टेक्सटाइल उद्योगों के लिए होगा। इसका काम अगले कुछ दिनों में शुरू कर दिया जाएगा।

कारण कि मुख्यतया टेक्सटाइल उद्योग द्वारा ही अधिकांश पानी निस्तारित किया जाता है और जब टेक्सटाइल उद्योगों के लिए एक अलग ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हो जाएगा तो शेष उद्योगों के निस्तारित पानी का पुराने ट्रीटमंेट प्लांट में आसानी से ट्रीटमेंट हाे सकेगा।

उद्योगों को समग्र बढ़ावा मिलेगा

वर्तमान सीईटीपी व नए सीईटीपी के पूर्ण होने के बाद जोधपुर के उद्योग एवं उद्यमी राहत की सांस लेंगे और उद्योगों को समग्र रूप से बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में 20 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट है व नया 25 एमएलडी का होगा। इससे जोधपुर की अगले 10 वर्षों की मांग पूरी हो जाएगी। - जीके गर्ग, मैनेजिंग डायरेक्टर, जेपीआरएफ

डायरेक्टर्स बनाए सर्वे पूरा

जेपीआरएफ की ओर से आदेश जारी कर डायरेक्टर्स बनाए गए हैं। इसमें श्रीकांत शर्मा, उमेश लीला, ज्ञानीराम मालू, नरेंद्र जैन, पूजनीश गुलेच्छा, जुगनू खान, हेमंत सांखला व जसराज बोथरा शामिल हैं। वहीं इस मामले में सूरत की कंपनी की ओर से सर्वे भी पूरा करवा लिया गया है। अब इसकी डीपीआर तैयार की जाएगी।

जेपीआरएफ के मार्गदर्शन में होगा काम

संयोजक शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार के आदेश पर रीकाे ने इसके लिए सालावास में 25 बीघा जमीन जेपीआरएफ को निशुल्क आवंटित की है। ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने में करीब 3 वर्ष का समय लगेगा। यह कार्य जेपीआरएफ के मार्गदर्शन में मारवाड़ पॉल्यूशन कंट्रोल एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से किया जाएगा।

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