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लक्ष्मी विलास पैलेस:उदयपुर के इस होटल में चम्मच 45 रुपए का होगा और इतने में प्रति वर्गफीट जमीन का मूल्यांकन कर बेच दिया था; पूर्व केंद्रीय मंत्री शौरी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जोधपुर12 दिन पहले
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उदयपुर का लक्ष्मी विलास पैलेस।
  • सीबीआई कोर्ट जोधपुर के जज पूरण कुमार शर्मा के फैसले में इसकी बानगी मिलती है कि इस तरह घोटला किया गया
  • कोर्ट ने मामले की जांच कर रही सीबीआई की मंशा पर भी उठाए सवाल, कहा- आरोप पत्र पेश करने की बजाए अंतिम रिपोर्ट पेश की

(नरेश आर्य). उदयपुर की प्रसिद्ध लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को औने-पौने दामों में बेचने के मामले में किस तरह घोटाला किया गया इसकी बानगी सीबीआई की विशेष कोर्ट के फैसले में लिखी गई टिप्पणियों में मिलती है। सीबीआई कोर्ट जोधपुर के जज पूरण कुमार शर्मा के फैसले ने परत दर परत घोटाले को उजागर किया है। होटल की जमीन को 45 रुपए प्रति वर्गफीट बताया गया, जबकि इतने में तो इस प्रतिष्ठित होटल का एक चम्मच आया होगा। कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां करते हुए उन्होंने सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही यह मामला पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी के दोहरे चरित्र को दर्शाता है।

सीबीआई पर उठाए सवाल
कोर्ट ने कहा कि जब नीलामी में अनियमितता व होटल को 244 करोड़ के कम मूल्य में बेचना सीबीआई के समक्ष अन्वेषण के दौरान आ चुका था, फिर भी सीबीआई द्वारा क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी, जो एक विचारणीय प्रश्न है। जबकि संपूर्ण देश सीबीआई को एक प्रतिष्ठित अनुसंधान एजेंसी मानता है।

एक चम्मच भी 45 रुपए से ज्यादा की कीमत का होता

  • अपने फैसले में उन्होंने लिखा कि संपत्ति मूल्यांकनकर्ता द्वारा संपत्ति की कीमत जिन तीन आधार पर कम मानी है वे आधार भी अर्थहीन है, क्योंकि नीलामी से पूूर्व होटल चल रहा था। वर्तमान में भी होटल व्यवसाय के लिए ही नीलामी की जा रही थी। इसलिए होटल व्यवसाय को नहीं रोका जा रहा था तो इस आधार पर कीमत को कम नहीं आंका जा सकता।
  • 500 मीटर की दूरी पर लेक होना भी संपत्ति का अवमूल्यन होना माना है। जबकि वर्तमान में भी यह लेक वहीं पर स्थित है। हाईटेंशन लाइन को भी संपत्ति के अवमूल्यन का आधार माना है, जो कि संपत्ति का अवमूल्यन का कारण नहीं हो सकता था। क्योंकि उसे स्थानान्तरित किया जा सकता है।
  • कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार तीनों आधार पर 500 रुपए से 1000 रुपए वर्गफीट की कीमत को 45 रुपए वर्ग फीट की कीमत आंकना बिल्कुल निराधार प्रतीत होता है। 45 रुपए वर्ग फीट, जो कि डीएलसी रेट की पांच प्रतिशत राशि से भी कम राशि होती है।
  • तीनों आधारों पर 45 रुपए वर्ग फीट की जमीन की कीमत आंकना इस बात का स्पष्ट प्रदर्शित करता है कि संपत्ति मूल्यांकनकर्ता ने नीलामदार को लाभ पहुंचाने की नीयत से ही इतनी कम राशि आंकी गई तथा संपत्ति नीलामकर्ता द्वारा चल संपत्ति का मूल्यांकन भी नहीं किया। मूल्यांकनकर्ता अगर चल संपत्ति का मूल्यांकन सद्भाविक रूप से करता तो शायद इस होटल में काम आ रहे एक चम्मच की कीमत भी 45 रुपए से अधिक का मूल्यांकन करता।

सभी सचिव आईएएस थे, उन्हें पता था होटल की क्या कीमत हो सकती है
कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार के जिस मंत्री व सचिवों द्वारा लक्ष्मी विलास होटल को बेचान किया गया, वह उदयपुर में स्थित है। इस बारे में वे पूर्ण ज्ञान रखते थे एवं इस बात का पूर्ण ज्ञान था कि उदयपुर की इस होटल की क्या कीमत हो सकती है। क्योंकि सभी सचिव भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे। जिन्हें सामान्य ज्ञान के तहत इस संबंध में ज्ञान था कि इस होटल व भूमि की क्या कीमत हो सकती है। सीबीआई के अन्वेषण अधिकारी इस महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इस विनिवेश का आधार ही मूल्यांकन रिपोर्ट थी। जब अन्वेषण अधिकारी ने कर्मसे कंपनी को कम मूल्यांकन का दोषी मान लिया था तो इस मूल्यांकन एवं इस मूल्यांकन के आधार पर निर्णय लेने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र पेश करना था, न कि अंतिम रिपोर्ट पेश की जानी थी।

जब प्राइवेट व्यक्ति होटल को चलाकर लाभ प्राप्त करता है तो सरकार क्यों नहीं?
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब होटल को न चलने के जो कारण बताते हुए इसको विनिवेश करने का निर्णय लिया गया है। इसका अर्थ यह है कि सरकार इस होटल को चलाने में असफल या नाकामयाब हो रही है। क्या यह सरकार की अकर्मण्यता को द्योतक नहीं है। क्योंकि दूसरी ओर इसी संपत्ति में होटल ही चलाने के लिए विनिवेश की आड़ लेकर निजी व्यक्ति को देकर षड़यंत्रपूर्वक सरकार को हानि पहुंचाई गई व षड़़यंत्रकारियों ने स्वयं लाभ प्राप्त किया। जब प्राइवेट व्यक्ति होटल को चलाकर लाभ प्राप्त कर सकता है तो सरकार क्यों नहीं? यह भी उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा सरकारी संस्थान को निजी व्यक्तियों के हाथों में सौंपकर पूंजी का केंद्रीयकरण करना चाहती है।

भ्रष्टाचार निवारण पर विचार रखे, फिर भी कृत्य किया
कोर्ट ने कहा, कि आरोपी अरुण शौरी जो कि समाचार जगत से संबंध रखते हैं। उन्होंने समाचार पत्रों व अपने साक्षात्कारों में कई बार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के बारे में अपने विचार रखे हैं। फिर भी उनके द्वारा यह कृत्य किया गया, जो कि उनके दोहरे चरित्र को दर्शाता है। वर्तमान समय में नियम व कानून की जानकारी रखने वाले सफेदपोश अपराधी कानून की आड़ लेकर संगठित रूप से अपराध करते हैं। कोर्ट ने कहा, कि वर्ष 2018 से पूर्व यह स्थिति यह थी, कि लोक सेवक सेवानिवृत्त हो चुके थे। उनके विरूद्ध प्रसंज्ञान लेते समय किसी अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं थी।

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